श्यामू के पास सोने की मुहरे और शक । The Haunted Door In The Jungle
⇒ दूसरी दुनिया में लौटने के बाद भी श्यामू कई दिनों तक सामान्य नही हो पाया। उसकी आँखों के सामने वही नीला दरवाजा सामने आता, बैंगनी आसमान और गोपाल का चेहरा घूमता रहता। कई बार उसे लगता कि यह सब सपना था ।
⇒ लेकिन जब वह अपनी जेब में एक रखी सोने की मोहर देखता तो, उसे यकीन हो जाता कि वह सब सच है।
⇒ अगले दिन वह देवगढ़ के सुनार के पास पहुँचा। सुनार ने जैसे ही मुहर को हाथ में लिया , उसके चेहरे का रंग बदल गया।
⇒ उसने मुहर को कई बार उलट – पलट कर देखा । और धीमी आवाज में पुछा कि श्यामू यह तुम्हें कहाँ से मिली ?
⇒ श्यामू घबरा गया और वह गोपाल का रहस्य किसी को नही बताना चाहता था। उसने झूठ बोल दिया कि उसे यह जंगल मे मिली।
⇒ सुनार कुछ देर चुप रहा फिर बोला बेटा मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसी मुहर नही देखी होगी। यह सैकड़ों साल पुरानी लग रही है।
⇒ लेकिन इस समय का कोई निशान नही है। यह सुनकर श्यामू के रोंगटे खड़े हो गए।
⇒ मुहर बेचने के बाद उसे इतने पासे मिले कि उसने अपनी झोपड़ी की मरम्मत करवा ली। और दो नही बकरियाँ भी खरीद ली।
⇒ लेकिन यही बात गाँव वालों की आँख में चुभने लगी। ठाकुर भैरव सिंह ने एक दिन चौपाल में कहा….
⇒ एक गरीब चरवाहा अचानक पैसे वाला कैसे बन गया ? जरूर कोई राज छिपा है… ? उसके बेटे रघु ने बोला बापू …. मैंने इसको कई बार जंगल की ओर जाते देखा है।
⇒ मुझे लगता है यह कोई खजाना ढूंढ आया है।
⇒ उसी दिन से रघु और उसके दो साथी श्यामू पर नजर रखने लगे। उधर श्यामू की रातें भी अजीब होने लगी।
⇒ जब भी वह सोता उसे एक ही चीज दिखता सपने मे वही गुफ़ा के सामने खड़ा होता । लेकिन इस बार गुफ़ा से किसी की दर्दनाक आवाज आती — हमे बचाओ….
⇒ फिर अचानक अंधेरे में दो लाल आंखे चमक रही होती । श्यामू डरकर जग जाता। उसे कुछ समझ नही आता कि यह सपने में है या कोई सचमुच मुझे आवाज दे रहा है।
⇒ इसी तरह एक महिना बीत गया।
⇒ और फिर वह रात आ गई जिसका उसको इंतजार था। पूर्णिमा की रात…।

पूर्णमासी की एक रात और कुसुम भी आयी श्यामू के गाँव
⇒ पूरा जंगल चाँदनी में डूबा हुआ था। श्यामू चुपचाप अपनी झोपड़ी से निकला और उसी गुफ़ा की ओर चल पडा , गुफ़ा के अंदर जाते ही उसे वही नीली रोशनी नज़र आती है। पत्थर का दरवाजा धीरे – धीरे खुलने लगा ।
⇒ अगले ही गोपाल मुस्कुराता हुआ बाहर आया। श्यामू उसे देखकर खुश हो गया। दोनों मित्र काफी देर तक बातें करते रहे ।
⇒ लेकिन आज गोपाल कुछ बेचेन लग रहा था। उसकी निगाहे बार- बार अंधेरे की तरफ जा रही थी।
⇒ तभी अचानक गुफ़ा से हल्की पायल की आवाज आने लगी छन…. छन….. छन….। श्यामू चौक गया । उसने इधर उधर देखा लेकिन वहाँ कोई नही था।
⇒ फिर अचानक उसके सामने एक सुंदर लड़की आई ।
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⇒ उसकी उम्र लगभग श्यामू जितनी होगी। उसके लंबे बाल थे और आँखों में हल्की चमक थी। वह मुस्कुराकर बोली ,,, तो तुम ही हो श्यामू बकरीवाले ?
⇒ श्यामू कुछ बोल पाता उसके पहले वहाँ से वह लड़की गायब हो गई। श्यामू की चीख निकलते – निकलते रह गई ।
⇒ अगले ही पल वह कुछ दूर पर वह लड़की फिर से नजर आई । डरो मत…। मैं कुसुम हूँ । कुसुम शरारती आवाज में बोली , मुझे लोगों को डराना बहुत पसंद है।
⇒ धीरे – धीरे तीनों की बातचीत शुरू हो गई। कुसुम ने श्यामू से देवगढ़ के बारे में बहुत कुछ पुछा,।
⇒ लेकिन जब श्यामू उससे उसकी शक्ति के बारे में पुछा तो वह बहुत शांत हो गई। उसने कहा — हर शक्ति की एक कीमत होती है।
⇒ और कभी – कभी वह कीमत बहुत बड़ी होती है। उसके चेहरे का भाव देखकर लगा की वह कुछ छिपा रही है।
⇒ तभी गोपल ने बात बदल दी। इससे श्यामू का शक बढ़ गया। उसे महसूस हुआ कि वह दोनों उससे कुछ महत्वपूर्ण बात छिपा रही है।

जंजीरों से बँधे गाँव के लोग की जो लापता थे
⇒ कुछ देर बाद कुसुम अचानक गायब हो गई। गोपाल ने बताया की वह एक जरूरी काम से गई है । पूर्णमासी की रात खत्म होने वाली थीं ।
⇒ वास्तव में कुसुम दूसरी दुनिया के उस हिस्से की ओर जा रही थी , जहाँ आम लोगों का जाना मना था।
⇒ वह देवगढ़ के फसे लोगों को ढूंढ रही थीं । उसने पहले भी बहुत से गाँव के गायब लोगों को बचाया था ।
⇒ अब अदृश्य होकर वह घने जंगल में और ऊँची चट्टानों के बीच से गुजरती हुई आगे बढ़ी। अचानक उसे जंजीरों की आवाज सुनाई दी। छन …. छन…. छन …।
⇒ वह सावधानी से आगे बढ़ी। सामने जो दृश्य था, उसे देखकर उसकी साँसे रुक गई। कई लोग लोहे की जंजीरों में जकड़े हुए थे।
⇒ उनके चेहरे थके हुए थे और डरे हुए थे। तभी उसकी नजर एक बूढ़े से आदमी पर पड़ी ।
⇒ कुसुम का दिल धड़क गया वह आदमी देवगढ़ में से कोई था। वह वर्षों पहले गायब हुआ था, कुसुम को देखते ही उसके मन एक उम्मीद सी जग गई ।
⇒ वह फुसफुसाया क्या तुम मुझे देख सकती हो ? कुसुम चौक गई ।
⇒ हाँ…. उसने धीमी स्वर में कहा। बूढ़े की आँखों में आँसू आ गए। तो सुनो उसे मत जगने देना। किसे ? कुसुम ने पुछा ।
⇒ लेकिन बूढ़ा आदमी कुछ और बोल पाता उसके पहले धरती कांपने लगती है ।
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⇒ दूर खन से भारी कदमों की आवाज आने लगती है। धड़….. धड़….. धड …..। सभी कैदियों के चेहरे पर डर छा गया।
⇒ बूढ़ा काँपते हुए बोला , भाग जाओ, अभी भाग जाओ। जिसने अदृश्य कुसुम को भी देख लिया।
⇒ कुसुम तुरंत अदृश्य हो गई। उसे विश्वास था कि अब उसे कोई नही देख पाएगा। लेकिन भारी कदमों की आवाज लगातार उसक तरफ बढ़ रही थी।
⇒ धड़ …. धड़….. धड़….। अंधेरे में दो लाल विशाल आंखे चमकी।
⇒ कुसुम का दिल तेजी से धड़कने लगा , उसने पहले कभी ऐसी भयानक उपस्थिति महसूस नही की थी।
⇒ अचानक एक भारी आवाज गूंजी — मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ हो…. कुसुम बहुत ज्यादा डर गई।
⇒ वह अदृश्य थी। फिर उस प्राणी को उसके होने का पता कैसे चल गया ? अगले ही पल लाल आंखे वहीं घूमी जहाँ वो खड़ी थी।
⇒ अब उसे यकीन हो गया कि खतरा बहुत बड़ा है। वह तेजी से वहाँ से भागी।
⇒ पीछे से वही डरावनी आवाज फिर से सुनाई दी — भाग जाओ …. लेकिन ज्यादा दिन नही छिप पाओगी।
⇒ किसी तरह कुसम , गोपाल और श्यामू के पास पहुंची । उसका चेहरा पीला पड़ चुका था । उसने पुरी घटना बताई ।
⇒ पहली बार गोपाल भी डर गया। कुछ क्षणों तक तीनों के बीच सन्नाटा छाया रहा। तभी दूर पहाड़ों पर गर्जना गूंजी। पूरी दूसरी दुनिया कांप उठी।
⇒ गोपाल ने धीरे से कहा, समय कम होता जा रहा है…।
⇒ श्यामू ने पुछा, किस बात का समय ? लेकिन गोपाल ने कोई जवाबनही दिया । उसी क्षण दूर अंधेरे में दो लाल आंखे फिर से चमकी।
⇒ इस बार वे सीधे उनकी ओर देख रही थी। और पहली बार शायद श्यामू को एहसास हुआ वह भयानक खतरा अब केवल दूसरी दुनिया तक सीमित नही थी….।
The Haunted Door In The Jungle
भाग 2 समाप्त हुआ….इसका भाग 3 और आखरी भाग आपको जल्द पढ़ने को मिलेगा । और उसका लिंक भी मैं इसी पोस्ट में डाल दूँगा ।