जंगल में रहस्यमयी दरवाजा : उस भयानक रात श्यामू , गोपाल और कुसुम पहली बार दूसरी दुनिया के उस भयानक लाल आँखों वाले राक्षस से भयभीत हुए थें ।
वह क्यों गाँव के लोगो को बंदी बनाकर दूसरी दुनिया में ले जाता था ? और वह उनके साथ क्या करता था? क्या तीनों मिलकर उस भयानक राक्षस को काबू में कर पाएंगे ?
या वह राक्षस उन्हे भी पकड़ लेगा ? पढ़िए जंगल में रहस्यमयी दरवाजा भाग 3 अंतिम भाग ।
लाल आँखों वाले राक्षस का रहस्य । The Haunted Door To Another World
दूसरी दुनिया के पहाड़ों के उस पार अंधेरे में चमकती दो लाल आंखे अब भी श्यामू, गोपाल और कुसुम को घूर रही थी।
हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई थी। जंगल के विशाल पेड़ अजीब आवाजें निकाल रहे थे। दूर पहाड़ काले बादल मंडरा रहे थे।
श्यामू ने काँपते हुए पुछा, गोपाल आखिर वह है कौन ? गोपाल कुछ क्षण चुप रहा । उसके चेहरे पर पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।
उसका नाम कालकासुर है।
यह नाम सुनते ही कुसुम की आंखे झुक गई। सैकड़ों साल पहले उसने पूरी दूसरी दुनिया को अपने कब्जे में ले लिया था।
गाँव जलाए , लोगो को गुलाम बनाया और जो विरोध करता था उसे मौत दे देता था।
श्यामू ध्यान से सुनता रहा। फिर सात महान जादूगरों ने मिलकर उसे हराया और एक महान जादूगरों ने मिलकर उसे हराया और एक जादुई बोतल मे कैद कर दिया।
लेकिन वह बाहर कैसे आया ? श्यामू ने पुछा । गोपाल ने गहरी साँस ली । उसके सेवक वर्षों से उसकी शक्ति को वापस लाने की कोशिश कर रहे थे।
शायद अब वह पूरी तरह जाग चुका है।
तभी दूर कहीं से फिर वही गर्जना सुनाई दी । पूरी धरती हिल गई। श्यामू के मन मे अचानक देवगढ़ के वे लोग घूम गए जो वर्षों पहले गायब हो गए थे ।
अब उसे समझ आ गया था कि वे लोग कहा गए थे।
और शायद किस हाल में जी रहे थे। उसी क्षण उसने मन में निर्णय कर लिया। चाहे कुछ भी हो जाए…. वह स बार पीछे नही हटेगा।
दूसरी दुनिया में गए श्यामू का परिवर्तन
अगले कई दिनों तक श्यामू दुसरी दुनिया में गोपाल के साथ रहा।
हर रात गोपाल उसे जादू की छोटी-छोटी बातें सिखाता। कुसुम उसे सिखाती कि खतरे को पहचानना कैसे है। धीरे धीर श्यामू बदलने लगा।
जो लड़का कभी गाँव वालों की बात सुनकर चुप हो जाता था, अब उसकी आँखों में आत्मविश्वास दिखाई देने लगा ।
एक रात गोपाल उसे एक प्राचीन मंदिर ले गया। मंदिर हजारों साल पुराना था।
उसकी दीवारों पर अजीब चिन्ह बने हुए थे। मंदिर के बीचोंबीच पत्थर का एक बहुत बड़ा गोलकार चक्र था।
गोपाल ने उस पर हाथ रखा। तभी कुछ शब्द चमकने लगे। श्यामू ने पढ़ा — जिसे शक्ति नही हरा सकती , उसे उसका अहंकार हराता है।
श्यामू कुछ समझ नही पाया लेकिन गोपाल मुस्कुरा दिया। यही कालकासुर की कमजोरी है। तभी अचानक कुसुम दौड़ती हुई आई।
उसके चेहरे पर घबराहट थी। मैंने कैदियों को फिर देखा क्या ? गोपाल चौका।
हां और उनमे देवगढ़ के लोग भी थे। श्यामू का खून खौल उठा, तो फिर देर किस बात की ? उसी रात तीनों कैदियों को छुड़ाने निकल पड़े।
गाँव के फंसे लोगो सभी कैदियों की मुक्ति
कई घंटों के यात्रा के बाद एक विशाल घाटी में पहुंचे। घाटी के बीचों बीच लोहे की जंजीरे से बंधे सैकड़ों लोग बैठे थे। कुछ बूढ़े थे।
कुछ जवान । कुछ तो इतने कमजोर हो चुके थे कि खड़े भी नही हो पा रहे थे।
तभी श्यामू की नजर एक बूढ़े आदमी पर पड़ी। वह देवगढ़ का ही था। बूढ़े ने उसे पहचान लिया ।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। बेटा हमे यहाँ से निकलो । श्यामू का दिल भर आया।
कुसुम अदृश्य हो गई। उसने पहरेदारियों की चाभी चुरा ली। गोपाल ने जादू से जंजीरों को कमजोर कर दिया ।
और फिर श्यामू ने पूरी ताकत से उसे तोड़ना शुरू किया, एक-एक करके कैदी मुक्त होने लगी।
लेकिन तभी धरती कांप उठी। आसमान काला हो गया। और घाटी में एक भयानक आवाज गूंजी — तो आखिर तुम यहाँ पहुँच ही गए।
सभी लोग डरकर पीछे हट गए। सामने कालकासुर खड़ा था।
उसका विशाल शरीर पहाड़ जैसा था। उसकी लाल आंखे आग की तरह जल रही थी। वह हंस रहा था। ऐसी हंसी जो सुनकर लोगो की आत्मा कांप जाए।
मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा था। गोपाल का चेहरा सफेद पड़ गया।
क्योंकि उसे समझ आ गया था । यह सब एक जाल था।
अंतिम युद्ध और रहस्यमयी बोतल
कालकासुर ने एक ही वार में कई पेड़ गिरा दिए। लोग चीखते हुए भागने लगे। श्यामू ने पहली बार बिना डरे उसका सामना किया । लेकिन
उसकी सारी शक्ति कालकासुर के सामने बहुत छोटी थी।
तभी गोपाल चिल्लाया, तुम्हें योजना याद है श्यामू समझ गया । वह जानबूझकर कालकासुर को चिढ़ाने लगा।
इतना बड़ा राक्षस होकर भी तुम डरते हो कालकासुर की आँखों में आग भड़क उठी।
मूर्ख इंसान ! वह पूरी ताकत से श्यामू के पीछे दौडा । श्यामू उसे उसी मंदिर की ओर ले गया। उधर कुसुम पहले ही दृश्य होकर वहाँ पहुँच चुकी थी।
लेकिन पाठक को अभी भी नही पता था कि वह क्या कर रही है। आखिरकार कालकासुर मंदिर तक पहुँच गया। वह हंसने लगा। बस यही है तुम्हारी उम्मीद ?
तभी मंदिर के चिन्ह चमक उठे। जमीन कांपने लगी। पत्थर का विशाल चक्र घूमने लगा।
कालकासुर का चेहरा बदल गया । पहली बार उसके चेहरे पर डर दिखाई दिया। नही।
उसी समय कुसुम अचानक प्रकट हुई। उसके हाथ में एक छोटी पुरानी बोतल थी।
लेकिन वह साधारण बोतल नही थी। वही जादुई बोतल थी , जिसमे कभी कालकासुर कैद हुआ था।
असल में कुसुम ने पूरे समय मंदिर के नीचे छिपे प्राचीन यंत्रों को सक्रिय किया था।
पूरा मंदिर एक विशाल जाल बन चुका था। पत्थर की जंजीरों जमीन से निकली ।
उन्होंने कालकासुर को जकड़ लिया। वह पूरी ताकत से छूटने की कोशिश करने लगा।
पहाड़ कांपने लगे। आसमान में बिजली चमकने लगी।
गोपाल ने अंतिम मंत्र पढ़ना शुरू किया। नीली रोशनी मंदिर में फैल गई।
फिर बोतल अपने आप खुल गई, उसके अंदर से एक भयंकर नीला भंवर निकला।
कालकासुर चीख उठा। नही नही चिल्लाने लगा ।
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उसका विशाल शरीर धुएं में बदलने लगा। वह धीरे-धीरे भंवर की ओर खिंचने लगा।
वह दहाड़ता रहा। संघर्ष करता रहा। लेकिन इस बार उसकी शक्ति बेकार थी।
कुछ ही क्षणों में उसका पूरा शरीर बोलत के भीतर समा गया। और बोतल अपने आप बंद हो गई।
उसी समय पूरे दूसरी दुनिया में शांति सी छा गई । काले बादल गायब हो गए।
लाल आंखे हमेशा के लिए बुझ गई।
दूसरी दुनिया का एक रहस्य जो हमेशा जीवित रहा
कालकासुर के कैद होते ही सभी गुलाम आजाद हो गए । देवगढ़ के लापता लोग भी मुक्त हो गए।
पूरे राज्य में खुशियां मनाई गई । कुछ दिन बाद वह दिन भी आ गया जब श्यामू को अपनी दुनिया लौटना था।
वह उदास था। गोपाल और कुसुम भी चुप थे।
तभी दुसरी दुनिया के सबसे बुजुर्ग जादूगर उनके सामने आए।
उन्होंने कहा — अब कालकासुर का अंत हो चुका है। लेकिन तुम्हारी दोस्ती का अंत नही होना चाहिए ।
फिर उन्होंने जादुई दरवाजे की ओर देखा ।
यह दरवाजा अब कभी बुरी शक्तियों के लिए नही खुलेगा।
लेकिन हर पूर्णमासी की रात यह कुछ घंटों के लिया खुला करेगा।
श्यामू की आँखों में चमक थी।
गोपाल मुस्कुराया कुसुम खुशी से हंस पड़ी ।
आखिरकर विदाई का समय आ गया। श्यामू अपने संसार में लौट आया।
लेकिन इस बार उसका दिल टूटा नही था।
क्योंकि वह जानता था कि यह आखिरी मुलाकात नहीं है। समय बीतता गया।
देवगढ़ में अब लोग उसका सम्मान करने लगे।
जो लोग कभी उसे गरीब और बेसहारा समझते थे वही लोग आज उसके लिये खड़े हैं।
उसकी तारीफ करते, वह आज भी वैसा सरल है ।
और फिर एक महीने बाद पूर्णमासी की रात आई ।
चाँद पूरा गोल था। श्यामू चुपचाप उसी गुफ़ा में पहुँचा। अचानक नीली रोशनी फैल गई।
पत्थर का दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा। और सामने गोपाल मुस्कुराता हुआ खड़ा था। उसके पीछे कुसुम भी दिखाई दी।
तीनों दोस्त हंस पड़े। पुरी रात उन्होंने बातें की।
पुराने किस्से सुनाये। नये अनुभव बांटे। और सूरज उगने से पहले दरवाजा फिर बंद हो गया।
तब से आज तक हर पूर्णमासी की रात वह रहस्यमयी दरवाजा कुछ घंटों के लिए खुलता है। गोपाल और कुसुम दूसरी दुनिया से आते हैं।
श्यामू उनसे मिलने जाता है। और यह रहस्य केवल उन तीनों दोस्तों को ही पता हैं।
देवगढ़ के लोग आज भी नही जानते थे कि पूर्णमासी की रात श्यामू जंगल में कहा चला जाता है।
मगर आज भी जब चाँद पूरा गोल और पूरा लाल होता है और जंगल में नीली रोशनी चमकती ही।
तब दो दुनियाओ की सीमा पर तीन सच्चे मित्र फिर से मिलते हैं। श्यामू , गोपाल और कुसुम ।
यहां कहानी के तीनों पार्ट समाप्त हो चुके हैं । कहानी कैसी लगी आप जरूर बताना । हमें आपके एक कमेन्ट का इंतजार रहेगा ।




