अंतिम राजकुमारी — Bedtime Emotional Story In Hindi
⇒ अरावली के बीच बसा था सूर्यगढ़ – एक ऐसा राज्य जिसकी समृद्धि की मिसाल दूर – दूर तक दी जाती थी। सोने से जड़े महल , संगमरमर की दिवारे, और विशाल दरबार …… लेकिन अब वह सब बीते कहानी की यादे बन चुकी थी।
⇒ राजा विक्रम सिंह बहुत बूढ़े हो चुके थे , और रानी का देहांत पहले ही हो चुका था । और उनके वंश में बची थी सिर्फ एक संतान जिनका नाम – राजकुमारी आर्या था। लोग उसे प्यार से कहते थे , सूर्य गढ़ की आखिरी किरण है।
आने वाला तूफान
⇒ राज्य की सीमाओ पर बहुत से दुश्मनों की नजर थी , खजाना खाली हो चुका है। सेना थक चुके थे बार – बार यह बोल के की महाराज पड़ोसी राज्य से संधि कर लीजिये राजकुमारी का विवाह वही कर दीजिए । लेकिन राजा जानते थे यह विवाह नही सूर्य गढ़ का समर्पण होगा।
⇒ एक रात उन्होंने आर्या को बुलाया , बेटी हो सकता है, तू इस राज्य की आखिरी राजकुमारी हो….। आर्या मुस्कुराई – जब तक मैं हु तब तक सूर्य गढ़ खत्म नहीं होगा ।
राजकुमरी का रहस्य
⇒ आर्या बाकी राजकुमारी जैसी नही थी, उसे तलवार चलानी आती थी। घुड़सवारी में वह सैनिकों से भी आगे निकल जाती थी। और रात को महल के छत पर बैठ कर लोगों के झोपड़ियों के दिए गिन करती थी।
⇒ उसने बचपन में ही एक वचन लिया था, मै राज सिंघासन के लिए नही अपने लोगों के लिए जिऊँगी ।
विश्वासघात
⇒ एक दिन महल के अंदर से खबर फैल गई , दुश्मन सेना ने रात में हमला कर दिया। महल में आग लग गई….. चारों तरफ चीखे तलवालों की आवाज …. धुआँ …. खून …. राजा विक्रम सिंह ने आर्या को गुप्त सुरंग की ओर धकेला। जा बेटी …..
⇒ सूर्य गढ़ को जिंदा रखना .. और आप ? राजा मुस्कुराये — राजा भागते नही यह उनका आखिरी वाक्य था।
महल से जंगल
⇒ आर्या पहली बार राजकुमारी नहीं … एक अनाथ बेटी बनकर महल से बाहर निकली । उसके पास ना ताज था ना सेना , बस पिता की तलवार … और एक मुट्ठी मिट्टी — सूर्य गढ़ की।
⇒ वह गाँव- गाँव भटकती रही अपनी पहचान छुपाते हुए, और पहली बार उसने देखा कैसे उसकी प्रजा अपनी जिंदगी गुजर बसर कर रही है। कैसे भूखे सब लोग सो जाते हैं। उस दिन राजकुमारी मर गई । और एक रक्षक जन्मी।
जनता की राजकुमारी
⇒ धीरे – धीरे लोगों को पता चला यह कोई साधरण लड़की नही । वह उनके साथ खेतों में काम करती, बीमारों का इलाज करती … और रात को बच्चों को कहानियाँ सुनाती । एक बूढ़ी औरत ने उसके माथे को चूमकर कहा — तू राजकुमारी है ना ,,,,, आर्या की आखे भर आई ।
⇒ फिर बूढ़ी औरत बोली नही राजकुमारी वो नही जो महल में रहती है , वो जो लोगों के दिलों में बसती है।
अंतिम युद्ध
⇒ सालों बाद आर्या ने जनता की सेना तैयार की । किसान , लोहार , चरवाहे सब हथियार बन गए। उन्होंने सूर्य गढ़ की ओर कूच किया। वह महल अब खंडहर बन चुका था । लेकिन जैसे ही आर्या ने कदम रखा — हवा में वही पुरानी खुसबू थी ।
⇒ उसने मिट्टी उठाकर माथे से लगाई। मैं वापस आ गई हूँ पिता जी …. युद्ध शुरू हुए भयंकर …। लेकिन इस बार लड़ाई राज्य की नही घर की थी।
सबसे बड़ा त्याग
⇒ जब जीत करीब थी दुश्मन सेनापति ने एक चाल चली। उसने जनता पर तीर चलाने का आदेश दिया।
⇒ आर्या के सामने दो रास्ते थे,,,,, सिंहासन बचाना ,,,,, दूसरा लोगों को बचाना ।
⇒ उसने तलवार फैक दी और अपने लोगों के आगे ढाल बन कर खड़ी हो गई। तीर उसके सीने में आ लगा। जनता बच गई । दुश्मन हार गया।
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अंतिम क्षण
⇒ आर्या को महल की टूटी हुई सीढ़ियों पर लिटाया गया । वहीं …. जहाँ वह बचपन में खेलती थी । आसमान की ओर देखते हुए वह मुस्कुराई — पिता …. जी आज सूर्य गढ़ बच गया। लोग बहुत रो रहे थे ।
⇒ एक बच्ची उसके पास आई । दीदी — अब हम आपको कहाँ ढूँढेंगे ? जहाँ भी कोई अपने लिए नही… दूसरों के जिएगा… समझना ….। तुम्हारी राजकुमारी वही है और फिर उसकी आंखे बंद हो गई।
कहानी जो अमर हो गयी
⇒ सालों बाद सूर्य गढ़ फिर बसा । महल के जगह एक मंदिर बना , उसमे कोई मूर्ति नही बस एक तलवार , और एक मुट्ठी मिट्टी । लोग उसे कहते थे — ” अंतिम राजकुमारी ″
अंतिम पंक्तियाँ
⇒ वह आखिरी थी लेकिन उसके बाद कोई अंत नही हुआ … क्योंकि राज्य ताज से नही …. , त्याग से चलते हैं। और राजकुमारी महलों में नही लोगों के दिलों में अमर रहती हैं।