गरीब का सपना – मेहनत, जो किस्मत बदल दे । Success Story In Hindi । Inspirational Story In Hindi । Hindirama.com

गरीब का सपना - मेहनत, जो किस्मत बदल दे । Success Story In Hindi । Inspirational Story In Hindi । Hindirama.com

गरीब का सपना – मेहनत, जो किस्मत बदल दे । Success Story In Hindi

गाँव के बिल्कुल किनारे एक कच्चा टूटा घर था। घर के बाहर कीचड़ भरी चोटी सी गली और पीछे एक पुराना पीपल का पेड़ भी था। और उसी टूटे हुए घर में मोहन के माता – पिता वो सब साथ में रहते थे। घर बहुत छोटा था।

घर इतना छोटा था ,कि उसी कमरे में रसोई , सोने की जगह और समान सब कुछ उसी में था। गरिबी उनके घर की द्वारों पर साफ दिखाई देता था। मोहन के पिता  दिन भर मजदूरी करते कभी ईंट उठते , कभी सीमेंट ढोते तो कभी खेत में काम करते ।

लेकिन मजदूरी भी रोज नही मिलती थी। जिस दिन काम नही मिलता , उस दिन घर में चूल्हा नही जलता। मोहन की माँ गाँव के अमीर लोगों के घरों में बर्तन साफ करती और झाड़ू और पोंछा करती थी।

कई बार ऐसा होता था  कि रात को खाने में सिर्फ नमक रोटी मिलती , और  कभी कभी तो वो भी नसीब नही होती थी। तब मोहन की माँ कहती मुझे भूख नही तुम लोग खा लो,,,,, लेकिन मोहन समझता था कि माँ झूठ बोल रही है। वह अपनी रोटी का आधा हिस्सा माँ को दे देता था।

गरीबी में जन्म , सपनों में नही 

मोहन बचपन से ही बहुत समझदार था। जब वह 6 -7 साल का था। तब उसने पिता से पुछा – पिताजी , हम इतने गरीब क्यों हैं ? बेटा, हम गरीब जरूर हैं, लेकिन अगर तू पढ़ – लिख गया, तो हमारी गरीबी खत्म हो जाएगी।

उस दिन से मोहन ने पढ़ायी को बहुत गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। वह रोज स्कूल जाता, चाहे उसके पास चप्पल हो या ना हो । गर्मियों में उसके पैर जलते थे, सर्दियों में ठंड से काँपते थे, लेकिन वह स्कूल जाना नहइ छोड़ता ठा।

स्कूल में बाकी बच्चों के पास नए बैग , नई किताबें, और टिफिन होते थे । मोहन के पास पुराना बैग और फटी किताबे थी। लंच टाईम में जब सारे बच्चे खाना खाते, तब मोहन चुपचाप पानी पीकर बैठ  जाता।

भूख सबसे बड़ा शिक्षक हैं

एक दिन मोहन को अकेले बैठे उसके अध्यापक ने देखा , उसके अध्यापक ने पुछा – मोहन , तुम खाना क्यों  नही खाते ? मोहन चुप हइ वहाँ बैठा रहा अध्यापक समझ गए कि उसके पास खाना नही है , उस दिन से हर रोज उसका अध्यापक उसके लिए खाना देता ।

मोहन को पहली बार महसूस हुआ कि कोई तो है जो उसकी इस हालत को समझता है उसने और ज्यादा मेहनत से पढ़ाई शुरू कर दी। वह हर क्लास में अच्छे नंबर लाने लगा लेकिन घर की गरीबी पहले से भी ज्यादा बढ़ गई ।

एक दिन उसके पिता बीमार पड गए । अब घर चलाने के लिए जिम्मेदारी मोहन और उसकी माँ पर आ गई।

जिम्मेदारी उम्र से बड़ी थी  

मोहन अब स्कूल के बाद काम करने लगा था। वह कभी चाय की दुकान पर होता था , कभी सब्जी वाले की मदद करता, कभी ईंट – भट्टे पर काम करता । छोटे – छोटे हाथों से बड़ा काम करता था।शाम को वह काम करता था।

शाम को जब वह काम करके वापस लौटता, तब उसका शरीर थक चुका होता था, लेकिन वह फिर भी किताब खोलकर बैठा रहता। उसकी माँ कहती – माँ अभी, नही पढ़ूँगा , तो जिंदगी भर आराम नही मिलेगा ।

धीरे -धीरे समय बीतता गया और मोहन 8  वीं  क्लास मे पहुँच गया। कई बार स्कूल मे ही सो जाता था, क्योंकि रात को देर तक पढ़ता था।

दिन मजदूरी, रात पढाई       

एक दिन स्कूल में टीचर ने कहा , मोहन तुम बहुत होशियार हो । अगर ऐसे ही पढ़ते रहे तो एक दिन बहुत बड़े आदमी बनोगे । यह बात मोहन के दिन मे बैठ गई। उसी दिन उसने अपनी माँ मै बड़ा आदमी बनूँगा । आपको लोगों के घरों मे काम नही करने दूँगा । माँ यह सुनकर रो पड़ी।

⇒  अब मोहन पहले से ज्यादा करने लगा । सुबह 5 बजे उठता, पढ़ाई करता , फिर स्कूल जाता, फिर काम करता और रात में पढ़ाई भी करता ।

जब जिंदगी ने पहली ठोकर दी 

10 वीं का एग्जाम मोहन के जिंदगी का पहला बड़ा एग्जाम था। उसने दिन – रात मेहनत की । उसे पूरा विश्वास था कि वह पास हो जाएगा ।  लेकिन जब रिजल्ट आया, तो मेहनत फेल हो गया।  वह रिजल्ट देखकर सुन्न रह गया । उसे समझ नही आया कि अब वह क्या करेगा।

वह घर आया और चुपचाप बैठ गया । माँ ने पुछा तो वह रो पड़ा और बोला- माँ मै हार गयाा, …. मेरा सपना खत्म हो गया ….

हार नही मानूँगा  

उसकी माँ ने उसके आँसू पोंछे और कहा – बेटा याद रखना …। गरीब लोग अगर हार मान जाए ना ….. तो उनकी जिंदगी कभी नही बदलती । यह बात मोहन के दिल मे तीर की तरह लगी । उस रात मोहन ने खाना नही खाया ।

वह पूरी रात जागता और सोचता रहा – अगर मैं हार मान लूँगा, तो मेरी माँ पुरी जिंदगी लोगों के घरों में काम करेंगी । सुबह होते हि उसने फिर से किताब उठा ली और खुद से कहा – मै फिर से एग्जाम दूँगा, और इस बार पास होकर दिखाऊँगा ।

मोहन ने दोबारा 10 वीं की तैयारी शुरू कर दी इस बार वह पहले से ज्यादा मेहनत कर रहा था, दिन में काम , रात मे पढ़ाई – यही उसकी जिंदगी बन गई थी। कई बार उसे नींद आ जाती। लेकिन वह अपने चेहरे पर पानी मारकर फिर पढ़ने बैठ जाता ।

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उसकी माँ हर रोज प्रार्थना करती – हे, भगवान मेरे बेटे को उसके मेहनत का फल जरूर देना बेकार मत जाने देना । मोहन जब भी अपनी माँ को प्रार्थना करते देखता तो उसकी हिम्मत और बढ़ जाती। आखिर वह दिन आ गया जब 10  वीं का रिजल्ट आया ।

उस बार मोहन पास हो गया, और सिर्फ पास ही नही – अच्छे नंबरों से पास हुआ था। उस दिन उसकी मां ने उसे गले लगाकर बहुत रोई। वह खुशी के आँसू थे ।

पहली जीत , अभी लंबा रास्ता  

10 वीं पास करने के बाद मोहन ने शहर जाकर आगे पढ़ने का फैसला किया। लेकिन शहर  मे रहना आसान नही था वहाँ रहने के लिए पैसे चाहिए थे , खाने के लिए पैसे चाहिए थे, और पढ़ाई के लिए भी पैसे  चाहिए  थे । मोहन शहर गया और वहाँ  के एक छोटे  से कमरे में 4 लड़के भी साथ रहते ।

वह दिन में एक होटल में बर्तन धोने का काम करता और रात  मे पढ़ाई करता था। कई बार होटल का मालिक उसे डांटता , कभी – कभी मार भी देता, लेकिन मोहन सब कुछ सहता रहा । क्योंकि उसके पास सहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नही था।

संघर्ष का शहर  

शहर की जिंदगी बहुत कठिन थी। गाँव में कम से कम माँ साथ थी , लेकिन शहर मे मोहन बिल्कुल अकेला था। जब वह रात को कमरे में आता , तो उसे अपनी माँ की बहुत याद आती। कई बार उसके पास खाने के लिए पैसे नही होते थे ।

वह सिर्फ पानी पीकर सो जाता था । लेकिन उसने कभी पढ़ाई नही छोड़ी। मोहन अब 12 वीं की तैयारी कर रहा था । उसे पता था कि अगर उसे बड़ा अफसर बनना है तो उसे बहुत बड़ी परीक्षा पास करनी होगी।

भूख , अकेलापन और किताबें 

12 वीं का एग्जाम पास करने के बाद मोहन ने एक बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी । यह परीक्षा बहुत कठिन थी। लोग सालों – साल तैयारी करते थे , तब भी पास नही होते थे । मोहन दिन मे काम करता और रात मे 5 – 6 घंटे पढाई करता।

कई बार वह इतना थक जाता था कि वह अपनी किताबों पर ही पढ़ते – पढ़ते सो जाता था । एक दिन उसकी माँ का फोन आया और माँ ने कहा – बेटा , अगर बहुत मुश्किल है तो वापस आ जा । मोहन रो पड़ा और बोला – माँ बस  थोड़ा सा और फिर हमारी जिंदगी बदल जाएगी।

माँ का सपना , मेरी जिंदगी   

अब मोहन ने पुरइ ताकत से पढ़ाई शुरू कर दी । उसने अपने दोस्तों से पुरानी कितबे ली । लायब्रेरी मे जाकर पढ़ाई की, और मोबाइल भी इस्तेमाल नही करता था ताकि उसका ध्यान ना भटके । उसने खुद से वादा किया – जब तक सफल नही हो जाऊँगा  तब तक हार नही मानूँगा ।

यही वादा उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी । सालों की मेहनत के बाद आखिर वह दिन आ ही गया , जब उसने वह बड़ी परीक्षा दे दी। अब उसे रिजल्ट का इंतजार था।

जिंदगी का सबसे बड़ा इम्तिहान  

रिजल्ट वाले दिन मोहन के हाथ कांप रहे थे । उसने जैसे ही रिजल्ट देखा, उसकी आँखों मे आसू आ गए वह परिक्षा  पास कर चुका था लेकिन अभी इंटरव्यू बाकी था इंटरव्यू के लिए उसके पास अच्छे कपड़े तक नही थे । उसने अपने दोस्त से कपड़े उधार मांगे और इंटरव्यू देने चला गया।

इंटरव्यू मे उससे पुछा गया कि – तुम अफसर क्यों बनना चाहते हो ? मोहन ने जवाब दिया – ताकि मेरी माँ को फिर कभी लोगो के घरों में काम ना करना पड़े ।

मेहनत – जो किस्मत बदल दे 

कुछ महीनों बाद इंटरव्यू का रिजल्ट आया । मोहन का  चयन हो गया था। उस दिन  उसे विश्वास नहइ हो रहा था, कि एक मजदूर का बेटा अब अफसर बन चुका है। उसने  सबसे पहले अपनी माँ को फोन किया और कहा – माँ अब आपको काम करने की जरूरत नही है ,,,, आपका बेटा अफसर बन गया ।

फोन के उस तरफ  सिर्फ रोने की आवाज आ रही थी मोहन जब अफसर बनकर अपने गाँव पहुँचा , तो पूरा गाँव उसे देखने आया। वही लोग जो कभी कहते थे यह कुछ नही कर सकता , आज कह रहे थे , हमे तुम पर गर्व है।

सपना सच हो गया       

मोहन सबसे पहले अपने पुराने टूटे घर के सामने गया और कुछ देर चुपचाप खड़ा रहा। उसकी आँखों के सामने उसका पूरा बचपन घूम रहा था , भूख , गरीबी , माँ की मेहनत , लोगों के ताने , स्ट्रीट लाईट की पढ़ाई।

उसने नया घर बनवाया , लेकिन अपने पुराने घर की दीवार वैसी ही रहने दी । ताकि वह कभी अपनी गरीबी और संघर्ष को न भूले । मोहन ने अपने गाँव के गरीब बच्चों को पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई। वह कहता था – अगर मुझे किसी ने सहारा न दिया होता, तो मै यहाँ तक नही पहुँच पाता।

कहानी से सीख   

गरीब होना पाप नही है ,मेहनत करने वाला कभी हारता नही, असफलता हमे मजबूत बनाती है , माँ – बाप का सपना पूरा करना सबसे बड़ी सफलता है , अगर इंसान ठान ले , तो गरीब का सपना भी सच हो  सकता है     

 

 

 

Author: Hindi Rama

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