बाल हनुमान ने सूर्य को क्यों निगल लिया? हनुमान जी की अद्भुत बाल लीला । Hanuman Swallow Sun

कैसे हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया ? - Hanuman Swallow Sun । Hanuman Ji Story In Hindi ।
Hindi Rama | पौराणिक कहानी

बाल हनुमान ने एक सुबह आकाश में चमकते सूर्य को लाल फल समझ लिया। उसे पाने के लिए वे आकाश में उड़ गए। इसके बाद ऐसी घटनाएँ हुईं, जिनसे देवता चिंतित हो उठे और संसार में हवा का बहना तक रुक गया।

माता अंजना के जाने पर बाल हनुमान को लगी भूख। Hanuman Swallow Sun

बाल हनुमान अपनी माता अंजना और पिता केसरी के पुत्र थे। बचपन से ही उनमें बहुत शक्ति थी। वे चंचल स्वभाव के थे और नई-नई चीजें देखकर उनके मन में उन्हें जानने की इच्छा जाग उठती थी।

माता अंजना अपने पुत्र से बहुत प्रेम करती थीं। वे हनुमान जी का ध्यान रखती थीं और उन्हें प्यार से समझाती थीं। लेकिन बाल हनुमान की शरारतें कभी-कभी ऐसी होती थीं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता था।

एक सुबह माता अंजना फल लाने के लिए जंगल में चली गईं। जाते समय उन्होंने अपने छोटे पुत्र को घर पर ही रहने दिया। कुछ समय बाद बाल हनुमान को भूख लगने लगी और वे खाने के लिए कुछ ढूँढ़ने लगे।

उन्होंने आसपास देखा, लेकिन उन्हें कोई फल दिखाई नहीं दिया। तभी उनकी नजर आकाश की ओर गई। वहाँ उगता हुआ सूर्य लाल रंग में चमक रहा था और उसकी किरणें चारों ओर फैल रही थीं।

सूर्य को देखकर बाल हनुमान के मन में उसे पाने की इच्छा जाग उठी। उन्हें लगा कि आकाश में कोई बहुत बड़ा और सुंदर लाल फल दिखाई दे रहा है। वे उसे खाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उसे पाने का निश्चय कर लिया।

सूर्य को फल समझकर आकाश में उड़ चले हनुमान जी

बाल हनुमान को यह पता नहीं था कि आकाश में दिखाई देने वाला वह लाल गोला सूर्य है। वे तो बस अपनी भूख मिटाने के लिए उस फल तक पहुँचना चाहते थे। उन्होंने बिना देर किए आकाश की ओर छलांग लगा दी।

वे तेजी से ऊपर उठने लगे। धरती धीरे-धीरे उनसे दूर होती गई और वे बादलों के बीच से आगे बढ़ने लगे। उनकी नजर लगातार सूर्य पर टिकी हुई थी, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उनका मनचाहा फल अब बहुत पास है।

हनुमान जी के पिता पवन देव भी अपने पुत्र के पीछे-पीछे चल पड़े। वे जानते थे कि उनका छोटा पुत्र सूर्य की ओर बढ़ रहा है। इसलिए वे अपनी ठंडी हवा से उसकी रक्षा करते हुए उसके साथ आगे बढ़ते रहे।

सूर्य की तेज रोशनी चारों ओर फैली हुई थी। फिर भी बाल हनुमान बिना डरे आगे बढ़ते रहे। उन्हें न तो अपनी यात्रा की कठिनाई का पता था और न ही यह समझ आ रहा था कि वे कितनी बड़ी चीज के पास जा रहे हैं।

उनकी इस अद्भुत उड़ान को देखकर देवता और दूसरे दिव्य जीव हैरान थे। एक छोटा बालक इतनी तेजी से सूर्य की ओर बढ़ रहा था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि बाल हनुमान उसे सचमुच फल समझकर पकड़ने पहुँच जाएँगे।

राहु ने सूर्य के पास बाल हनुमान को देखा

उसी समय राहु भी सूर्य को ग्रहण लगाने के लिए उसकी ओर बढ़ रहा था। वह अपने काम के लिए सूर्य के पास पहुँचा, लेकिन वहाँ उसने एक बालक को पहले से ही सूर्य की ओर जाते हुए देखा।

राहु यह देखकर घबरा गया। बाल हनुमान उसे देखकर उसकी ओर भी बढ़ने लगे, क्योंकि उन्हें वह भी कोई दूसरी चीज दिखाई दे रही थी। राहु को लगा कि यह बालक उसे पकड़ लेगा, इसलिए वह तुरंत वहाँ से भाग निकला।

राहु सीधे इंद्र देव के पास पहुँचा। उसने उन्हें बताया कि सूर्य के पास एक शक्तिशाली बालक पहुँच गया है। वह सूर्य को फल समझकर पकड़ने की कोशिश कर रहा है और राहु को भी उसकी ओर बढ़ता देखकर डर लग रहा है।

राहु की बात सुनकर इंद्र देव ने उसकी परेशानी को समझा। वे जानना चाहते थे कि सूर्य के पास वास्तव में क्या हो रहा है। इसलिए वे अपने विशाल हाथी ऐरावत पर सवार हुए और राहु को साथ लेकर सूर्य की ओर चल पड़े।

बाल हनुमान ऐरावत की ओर बढ़े और इंद्र देव ने वज्र चलाया

उधर बाल हनुमान सूर्य के पास पहुँच चुके थे। उन्हें अब भी लग रहा था कि वह एक बड़ा लाल फल है। जब उन्होंने राहु को देखा, तो वे उसकी ओर बढ़े और राहु डरकर इंद्र देव के पास भाग गया।

कुछ ही समय बाद हनुमान जी की नजर इंद्र देव के विशाल हाथी ऐरावत पर पड़ी। हाथी का बड़ा शरीर देखकर उन्हें लगा कि यह भी कोई बड़ा फल हो सकता है। वे सूर्य की ओर जाने के बजाय ऐरावत की तरफ बढ़ने लगे।

इंद्र देव ने बाल हनुमान को अपनी ओर तेजी से आते देखा। उन्हें चिंता हुई कि यह बालक ऐरावत को पकड़ने की कोशिश करेगा। उन्होंने उसे रोकने के लिए अपने हाथ में वज्र उठाया और प्रहार कर दिया।

इंद्र देव का वज्र बाल हनुमान के जबड़े पर लगा। चोट लगने से वे आकाश से नीचे गिर पड़े और एक पर्वत पर जा गिरे। अचानक हुई इस घटना से उनके शरीर को चोट पहुँची और वे बेहोश हो गए।

अपने पुत्र को घायल देखकर पवन देव का हृदय दुख से भर गया। उन्हें अपने छोटे पुत्र की हालत देखकर बहुत क्रोध आया। वे हनुमान जी को उठाकर एक गुफा में ले गए, ताकि वे वहाँ सुरक्षित रह सकें।

पवन देव ने हवा रोक दी और संसार में संकट छा गया

पवन देव अपने घायल पुत्र को देखकर इतने दुखी हुए कि उन्होंने संसार में हवा का बहना रोक दिया। हवा रुकने से सभी जीवों की परेशानी बढ़ने लगी। मनुष्य, पशु और दूसरे प्राणी साँस लेने के लिए तड़पने लगे।

संसार में जीवन का चलना कठिन होने लगा। पेड़-पौधे और जीव-जंतु सभी हवा पर निर्भर थे। जब हवा का बहना रुक गया, तो देवताओं को भी समझ आ गया कि यह संकट अधिक देर तक रहा, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

तीनों लोकों में परेशानी फैलने लगी। देवता सोचने लगे कि पवन देव को किस तरह शांत किया जाए। वे जानते थे कि अपने पुत्र को घायल देखकर उनका दुख बढ़ गया है और जब तक उनका दुख दूर नहीं होगा, हवा फिर से नहीं बहेगी।

अंत में सभी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुँचे। उन्होंने उन्हें पूरी घटना बताई और संसार को इस संकट से बचाने की विनती की। ब्रह्मा जी ने उनकी बात सुनी और सभी को साथ लेकर उस गुफा की ओर चल पड़े, जहाँ पवन देव बैठे थे।

ब्रह्मा जी ने बाल हनुमान को होश में लाया

गुफा में पहुँचकर ब्रह्मा जी ने पवन देव को अपने घायल पुत्र के पास बैठे देखा। हनुमान जी बेहोश थे और पवन देव उन्हें अपनी गोद में लिए हुए थे। अपने पुत्र की ऐसी हालत देखकर उनका दुख अब भी कम नहीं हुआ था।

ब्रह्मा जी ने बाल हनुमान के शरीर को स्पर्श किया। उनके स्पर्श से हनुमान जी को होश आने लगा। जब उन्होंने धीरे-धीरे आँखें खोलीं, तो पवन देव को अपने पुत्र के जीवित और सुरक्षित होने की आशा से राहत मिली।

ब्रह्मा जी और दूसरे देवता समझ गए कि बाल हनुमान कोई साधारण बालक नहीं हैं। उनमें बहुत बड़ी शक्ति है और आगे चलकर वे अनेक महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं। इसलिए देवताओं ने उन्हें प्रसन्न करने और पवन देव को शांत करने का प्रयास किया।

देवताओं ने हनुमान जी को दिए विशेष वरदान

ब्रह्मा जी और दूसरे देवताओं ने बाल हनुमान को अनेक वरदान दिए। इन वरदानों का उद्देश्य उन्हें सुरक्षित रखना और उनकी विशेष शक्तियों को पहचानना था। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में इन वरदानों के विवरण कुछ अलग मिलते हैं।

इंद्र देव ने भी हनुमान जी को वरदान दिया कि उनका वज्र आगे से उन्हें चोट नहीं पहुँचा सकेगा। इस तरह जिस वज्र की चोट से बाल हनुमान घायल हुए थे, उससे भविष्य में उनकी रक्षा होने का वरदान मिला।

अग्नि देव ने उन्हें आग से सुरक्षित रहने का वरदान दिया। दूसरे देवताओं ने भी अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार उन्हें वरदान दिए। इन वरदानों से बाल हनुमान को विशेष सुरक्षा मिली और देवताओं ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अपने पुत्र को सुरक्षित देखकर पवन देव का क्रोध धीरे-धीरे शांत होने लगा। देवताओं ने भी उन्हें समझाया कि अब बाल हनुमान सुरक्षित हैं। इसके बाद पवन देव ने संसार में हवा का बहना फिर से शुरू कर दिया।

संसार में लौटी हवा और पूरी हुई बाल हनुमान की लीला

हवा फिर से बहने लगी, तो संसार के जीवों को राहत मिली। मनुष्य और पशु दोबारा आसानी से साँस लेने लगे। तीनों लोकों में फैला संकट धीरे-धीरे दूर होने लगा और देवताओं ने चैन की साँस ली।

बाल हनुमान की यह घटना उनकी अद्भुत शक्ति और बाल स्वभाव को दिखाती है। उन्होंने सूर्य को फल समझकर पाने की कोशिश की थी, लेकिन इस छोटी-सी इच्छा के कारण देवताओं और पूरे संसार को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इस घटना के बाद देवताओं ने हनुमान जी की शक्ति को पहचाना और उन्हें विशेष वरदान दिए। इस तरह सूर्य को फल समझकर आकाश में उड़ने वाले बाल हनुमान की यह लीला पूरी हुई।

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