कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी : क्या अरबपति लड़की उस चाय वाले की झोपड़ी में रह पाएगी ? और एक साल के लिए कान्ट्रैक्ट पर क्यों उसने चाय वाले जीत से शादी करनें का प्रस्ताव रखा ?
नंदिनी के चालबाज चाचा महावीर को इस बारे में जब पता चलेगा , तो वह क्या करेंगे ?
क्या जीत 1 साल के लिए नंदिनी से शादी करेगा ? या कहानी में आएगा एक नया ट्विस्ट ? तो पढ़िए आगे की पूरी कहानी । कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी भाग 2
मुसीबत में करोड़पति नंदिनी पहुँची जीत के घर । Contract Bride Marriage Story
⇒ तुम कौन हो ? जीत का सवाल सुनकर नंदिनी कुछ पल चुप खड़ी थी। उसकी आँखों में आँसू थे , दिल बहुत तेज से धडक रहा था। मानो उसकी सांस किसी भी क्षण रुक जाए।
⇒ कुछ देर पहले वह करोड़ों अरबों की मालकिन थी। उसके चारों तरफ नौकर थे, गाड़ियां और सुरक्षा गार्ड हुआ करते थे।
⇒ लेकिन इस समय वह बेसहारा बन गयी थी एक सड़क पर खड़ी थी जहाँ उसका कोई नही।
⇒ अकेली,,,,, डरी हुई।
⇒ और बिल्कुल असहाय , उसने कांपती आवाज में कहा – मेरा नाम नंदिनी , नंदिनी सिंघानिया ,,,,, यह नाम सुनते जीत चुप रहा, उसने यह नाम कई बार अखबारों में पढ़ा था।
⇒ लेकिन उसने कभी नही सोचा था कि , कभी वह इसके सामने खड़ा होगा। एसे ….. सिंघानिया ? वही उद्योगपति परिवार? नंदिनी ने धीरे से सिर हिला दिया। फिर उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
⇒ जीत ने उसको बैठाया । और उसने बारे मे सब कुछ बताया ।
⇒ अपने पता राजवीर की आखिरी इच्छा , महावीर की साजिश । रौनक कपूर की लालच । खुशी द्वारा बताई गई सच्चाई। और मंडप से भागने तक का समय। सब कुछ जीत सुनता रहा ।
⇒ उसके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था। मतलब वो लोग तुमको मारना चाहते थे ? नंदिनी ने सिर हिलाया। हाँ। अगर मैं आज नही भागती तो शायद जिंदा नही बचती।
⇒ जीत ने गहरी सांस ली। उसे पहले बार महसूस हुआ कि यह मामला बहुत बड़ा है।
⇒ लेकिन उसके अंदर का इंसान उसे अकेला छोड़ने की अनुमति नही दे रहा था। उसने कहा — चलो मेरे साथ। कम से कम आज रात तुम सुरक्षित रहोगी। पता नही क्यों…..
⇒ उस एक अजनबी की आँखों में भरोसा दिखा उसको। और वह उसके साथ चल पड़ी।
⇒ लगभग आधे घंटे बाद दोनों एक पुरानी बस्ती में पहुंचे। संकरी गलियाँ…..। छोटे – छोटे मकान ,,,, कहीं बच्चे सो रहे थे।
⇒ कहीं मजदूरों के घरों में हल्की रोशनी जल रही थी। नंदिनी ने शायद पहली बार ऐसी दुनिया को इतने करीब से देखा था।
⇒ आखिरकर जीत एक छोटे से घर के सामने रुका। यही हैं, मेरा घर….।
⇒ नंदिनी ने घर देखा। वह छोटा सा था। लेकिन उसमे अपनापन दिखाई दे रहा था।
नंदिनी की हुई सावित्री और गुड़िया से मुलाकात
⇒ जीत ने दरवाजा खटखटाया। कुछ सेकेंड बाद दरवाजा खूला सामने सावित्री खड़ी थी। उनके चेहरे पर उम्र की लकीरें थी। लेकिन आँखों में ममता भरी हुई थी।
⇒ उनके पीछे गुडीया खड़ी थी। गुड़िया लगभग उन्नीस साल की थी।
⇒ चंचल …. मासूम…. और हमेशा मुस्कुराने वाली लड़की । जैसे ही दोनों ने दुल्हन के जोड़े में खड़ी नंदिनी को देखा,,,, हैरान रह गई। अरे बेटा यह कौन है ?
⇒ सवित्री ने पुछा।
⇒ जीत ने कहा — माँ बहुत लंबी कहानी है , अंदर आने दो पहले इसको , सावित्री ने तुरंत दरवाजा खोल दिया। आओ बेटी। यह घर छोटा है , लेकिन अपना है।
⇒ यह सुनकर नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए। उसने वर्षों बाद किसी के शब्दों में अपनापन महसूस किया था।
⇒ घर के अंदर एक पुरानी मेज थी। दो कुर्सियाँ थी। कोने में भगवान की तस्वीर रखी हुई थी।
⇒ और वहीं एक पुराना पंखा घूम रहा था। नंदिनी को अचानक अपने महल की याद आने लगी। वहाँ सब कुछ तो था लेकिन कोई अपना नही था।
⇒ यहाँ कुछ नही है, लेकिन सब दिलों में जगह थी।
कान्ट्रैक्ट वाली दुल्हन भाग 1
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भागी हुई दुल्हन नें पुरी रात बताई रोते हुए अपनी आपबीती
⇒ सावित्री ने नंदिनी को पानी दिया। गुड़िया उसके पास बैठ गई। दीदी,,,,, डरिए मत। बस इतना सुनते ही नंदिनी रो पड़ी ।
⇒ वह रोती रही काफी देर तक । मानो उसके अंदर जमा वर्षों का दर्द बाहर निकल रहा हो।
⇒ सावित्री ने उसे अपने सीने से लगा लिया, और पहली नंदिनी को माँ जैसे ममता का एहसास हुआ। धीरे – धीरे उसने अपनी पुरी कहानी सुनानी शुरू कर दी।
⇒ उसने बताया कि उसके पिता कैसे उसको प्यार करते थे और उसकी माँ के मृत्यु के बाद उसको कभी किसी भी चीज की कमी नही होने दी।
⇒ उसे हमेशा संभाला। कैसे उन्होंने मरते समय महावीर पर भरोसा किया।
⇒ और कैसे उस भरोसे ने उसकी जिंदगी तहस – नहस कर दी। सावित्री सब सुनती रही। उनकी आँखों में आँसू थे।
⇒ बेटी…. कभी – कभी अपने ही सबसे बड़े दुश्मन बन जाते हैं।
⇒ नंदिनी चुप थी। उसकी आंखे नीचे थी। तभी गुड़िया बोली — दीदी अब आप अकेली नही हो। हम सब आपके साथ हैं ।
⇒ यह सुनकर नंदिनी मुस्कुराई। शायद कई घंटों बाद ।
⇒ दूसरी तरफ जीत कमरे के एक कोने मे बैठा हुआ था। वह कुछ बोल नही रहा था। लेकिन उसके मन में तूफान चल रहा था।
जीत के अंदर का भी एक अनकहा रहस्य
⇒ उस रात जब वो लोग बातें कर रही थी, जीत कई बार खो सा जाता था।
⇒ उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी। जैसे वह भी कोई बड़ा दर्द अपने अंदर छिपा कर बैठा हो। नंदिनी ने कई बार उसको देखा।
⇒ उसे लगा की यह साधारण जरूर है, पर इसकी कहानी साधारण नही है। जीत कम बोलता था।
⇒ लेकिन उसके चेहरे पर आत्मविश्वास दिखाई देता था। रात के लगभग तीन बज चुके थे। लेकिन किसी की आँखों में नींद नही थी।
⇒ बाहर सन्नाटा था। और अंदर चार लोग बैठे हुए थे। जिनकी किस्मत अब एक – दूसरे से जुडने वाली थी।
नंदिनी की उस झोपड़ी में सुबह की पहली किरण
⇒ धीरे – धीरे रात बीत गई। सुबह का सूरज निकलने लगा। पक्षियों की आवाजें सुनाई देने लगी। हमेशा की तरह जीत छत पर पहुँच गया।
⇒ उसने पुशअप्स । फिर दौड़ा। उसके शरीर से पसीना बह रहा था।
⇒ लेकिन उसके चेहरे पर थकान नही थी। नीचे खिड़की के पास खड़ी नंदिनी उसे देख रही थी। वह हैरान थी। इतना मेहनती लड़का उसने पहले कभी नही देखा था।
⇒ जीत किसी फिल्मी हीरो की तरह दिख रहा था ।
⇒ लेकिन उसमे घमंड नही था। नंदिन के दिल में उसके लिए सम्मान बढ़ता जा रहा था। शायद पहली बार उसे किसी लड़के की मौजूदगी में सुरक्षा महसूस हो रही थी।
ड्राइवर या अरबपति भाग 1
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जीत से किया कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी का प्रस्ताव
⇒ नाश्ते के बाद कमरे में सब शांत थे । नंदिनी कुछ सोच रह थी आखिरकार उसने फैसला कर लिया वह जीत के सामने जाकर खड़ी हो गई।
⇒ मुझे तुमसे एक बात कहनी है,,,, जीत ने उसकी तरफ देखा, कहो…… ।
⇒ नंदिनी ने गहरी साँस ली । क्या तुम मुझसे शादी करोगे ? कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया। गुड़िया की आंखे फैल गई। सावित्री भी हैरान रह गई।
⇒ जीत कुछ सेकंड तक नंदिनी को देखता रहा ।
⇒ जीत को यकीन नही हुआ कि उसने सही सुना है। क्या ?
⇒ नंदिनी ने दोबारा कहा — एक साल के लिये , सिर्फ एक साल के लिए। मेरी जान बचाने के लिये , कॉन्ट्रैक्ट मैरिज । उसकी आँखों में आँसू थे। मेरे पास पैसा है। जायदाद है…..।
⇒ लेकिन भरोसा करने लायक इंसान नही है। और मुझे लगता है कि तुम अच्छे इंसान हो।
⇒ जीत चुप हो गया। उसके लिये यह फैसला आसान नही था। सामने बैठी लड़की अरबों की मालिक थी। और वह….. एक चाय बेचने वाला लड़का।
⇒ कम से कम दुनिया तो यही समझती थी।
⇒ कई मिनट तक कमरे में कोई आवाज नही हुई। आखिरकार सावित्री बोलीं — बेटा जिंदगी में हर दिन ऐसा मौका नही आता जब किसी की जिंदगी तुम्हारे फैसले पर टिकी हो।
⇒ जीत की बहन गुड़िया भी मुस्कुराकर बोली — भैया मुझे तो दीदी बहुत अच्छी लगती है। जीत ने धीरे – धीरे नंदिनी की तरफ देखा।
⇒ उसकी आँखों में उम्मीद थी। डर था। और भरोसा था। आखिरकार जीत बोला — ठीक है।
⇒ अगर इससे तुम्हारी जान बच सकती है…. तो मैं तैयार हूँ। यह सुनते ही नंदिनी रो पड़ी। लेकिन इस बार ये आँसू दर्द के नही थे । राहत के थे।
किया कोर्ट मैरिज दोनों नें और अब आने वाला हैं तूफान
⇒ उसी दिन दोपहर में दोनों कोर्ट पहुंचे। सावित्री और गुडीया उनके साथ थी। जरूरी दस्तावेज पूरे किये गए ।
⇒ हस्ताक्षर हुए। और कुछ मिनटों बाद….. नंदिनी सिंघानिया कानूनी रूप से जीत की पत्नी बन चुकी थी।
⇒ उसे लगा जैसे उसकी जिंदगी को एक नई शुरुआत मिल गई। लेकिन उसे नही पता था कि असली लड़ाई अब शुरू होने वाली है।
⇒ उसी समय सिंघानिया महल में महावीर गुस्से से पागल हो रहा था।
⇒ तभी उसका आदमी अंदर आया । सर…. नंदिनी मिल गई। महावीर की आँखों में चमक आ गई। कहाँ है ?
⇒ आदमी बोला — वह एक बस्ती में है। और उसने शादी कर ली है। एक चाय बेचने वाले लड़के से।
⇒ अगले ही पल महावीर ने सामने देखा गिलास दीवार पर दे मारा। रौनक कपूर भी गुस्से से कांपने लगा। उसे जिंदा मत छोड़ना । महावीर गुस्से में गरजा।
⇒ और उस गरीब लड़के को भी खत्म कर दो। कमरे में खामोशी छा गई।
⇒ लेकिन उन्हे नही पता था….. जिस लड़के को वे मामूली चाय वाला समझ रहे हैं। उसकी असली पहचान अभी दुनिया के सामने आनी बाकी थी। …….
अब आने वाला हैं असली तूफान , कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी भाग 3 में नंदिनी को होगा जीत पर शक कि वह असल में कौन हैं ?
और क्या करेंगे करोड़पति नंदिन के चालबाज चाचा महावीर ? क्या नादिनी के चाचा सारी जायदाद पर जबरदस्ती कब्जा कर पाएंगे ? और क्या खुल पाएगा जीत का रहस्य ?
जल्द आएगा आपके लिए । कॉन्ट्रैक्ट वाली शादी भाग 3
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