ड्राइवर या अरबपति? आज काव्या की माँ अस्पताल में हैं, और उसे आज किसी हाल में नौकरी चाहिए।
काव्या अब रोती-भागती नौकरी के लिए सड़क पर दौड़ रही हैं, मगर वह तो बहुत लेट हो चुकी हैं।
अचानक उसे मिलता एक लड़का जो एक ड्राइवर की वर्दी पहना वहाँ सड़क पर खड़ा था।
“विराज जो एक अरबपति लड़का था, लेकिन उसकी ऐसी क्या मजबुरी थीं, कि वह ड्राइवर का काम कर रहा था?”
“अब क्या होगा काव्या की नौकरी और अस्पताल में उसकी माँ का?” तो पढिए पूरी कहानी, “ड्राइवर या अरबपति”
विराज नें क्यों छुपाया कि वह एक अरबपति हैं । Mystery Of A Billionaires Son
मुंबई शहर की खूबसूसरत सुबह हमेशा की तरह भाग दौड़ से भरी हुई थी। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें थी और हर इंसान अपने काम में व्यस्त था। लेकिन उसी भीड़ में एक ऐसी भी लड़की भी थी,
जिसकी पूरी जिदंगी आज एक बड़ी कंपनी में इंटरव्यू पर निर्भर थी।
उस लड़की का नाम था काव्या।उसका पूरा नाम ” काव्या शर्मा ” वह हाथ में अपनी फाईल मजबूती से पकड़े बस स्टॉप पर खड़ी थी। उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी ।
उसकी माँ सरला पिछले दो हफ्तों से अस्पताल मे भर्ती थी और पिता गोपाल उम्र के उस पड़ाव पर पहुँच चुके थे जहाँ मेहनत करने की ताकत भी साठ छोड़ देती है।
काव्या बार – बार घड़ी पर समय देखे जा रही थी, इंटरव्यू होने में कुछ ही समय बाकी थे ।
यह इंटरव्यू किसी छोटी – मोटी कंपनी का नही है , बल्कि भारत की प्रसिद्ध कंपनी मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज का था।
तभी अचानक सड़क पर भारी ट्रैफिक लग गया । काव्या और ज्यादा घबराने लगी। बस आगे नहीं बढ़ रही थी। उसने मन ही मन में कहा,,,,,,, हे भगवान आज लेट हो गई तो मैं क्या करूंगी ….।
अनजान ड्राइवर की मदद मगर वह था एक अरबपति
तभी उसके समाने एक काली कार आकर रुकी, ड्राइविंग सीट पर बैठा युवक सामान्य कपड़ों में था , उसने खिड़की नीचे की और खोला …. बहुत परेशान हैं आपको कहीं जाना है ?
काव्या ने जल्द से जवाब दिया , मुझे मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज जाना है, इंटरव्यू के लिए ।
अगर देर हो गई तो नौकरी हाथ से निकल जाएगी। युवक मुस्कुराया और बोला,,, बैठ जाईए मैं छोड़ देता हूँ आपको।
काव्या कार में बैठ गई उसको जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि वह किसके साथ बैठी है , उसका नाम विराज था, अरबों का वारिस वह कोई साधारण व्यक्ति नही था।
रास्ते भर काव्या अपनी परेशानियाँ बताती आई।
उसने अपनी माँ की बीमारी , घर की हालत और नौकरी की जरूरत के बारे में सब कुछ बता दिया, व्रज चुपचाप सुनता रहा ।
उसके मन में पहली बार किसी अजनबी के लिए इतनी सहानुभूति पैदा हुई थी।
लेकिन ट्रैफिक बहुत ज्यादा था। जब तक वे कंपनी पहुंचे , इटंरव्यू शुरू हुए दस मिनट बीत चुके थे ।
काव्या भागती हुई अंदर चली गई। मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज की विशाल इमारत देखकर वह कुछ पल के लिए रुक गई।
शादी मके बाद भी पत्नी का बॉयफ्रेंड
इतनी बड़ी कंपनी में उसको जॉब मिलना किसी किस्मत से कम नही था , रिसेप्शन पर पहुंचते ही उसने कहा,,, मैम मेरा इंटरव्यू था ।
मैं बस दस मिनट लेट हुई हूँ। रिसेप्शनिस्ट ने कंप्यूटर देखा और सिर हिलाया ,,, माफ कीजिए इंटरव्यू पैनल हो चुका है।
प्लीस मैम , मुझे बसएक मौका दे दीजिए।
तभी वहाँ कंपनी के वरिष्ठ मैनेजर हरिशंकर त्रिपाठी आ पहुंचे, काव्या ने हाथ जोड़कर अपनी परेशानियाँ बताई लेकिन कंपनी के कुछ नियम होते हैं जिसे तोड़ना अच्छा नही होता।
हरिशंकर त्रिपाठी ने कहा, बेटी मैं तुम्हारी परेशानी समझ सकता हूँ, लेकिन नियम सबके लिए बराबर है ।
यह सुनते ही काव्या की आँखों मे आसू आ गए और बाहर निकलने लगे। बाहर विराज उसका इंतजार कर रहा था, उसने पुछा क्या हुआ ?
काव्या ने रोते हुए बताया, मुझे नौकरी नही मिली…. मैं सिर्फ दस मिनट लेट थी। वह फुटपाथ पर बैठकर रोने लगी।
विराज का दिल पसीज गया। उसने धीरे से कहा, अगर मैं तुम्हारी नौकरी लगवा दूँ तो ?
काव्या ने उसकी तरफ देखा और बोली क्या,,,, तुम ? हाँ मैं ही इस कंपनी में मेरा एक जानकार इंसान है।
काव्या की आँखों में उम्मीद लौट आई। कुछ देर बाद दोनों लोग अस्पताल में पहुंचे वहाँ डॉक्टर ने बताया कि उसकी माँ के इलाज में लगभग 5 लाख का खर्च आएगा।
यह सुनते ही काव्या और उसके पिता के चेहरे का रंग उड़ गया। सरला ने रोते हुए कहा, बेटी मेरा इलाज मत करवा।
मैं नही चाहती कि मेरी वजह से तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो….। यह सुनकर विराज की आंखे भी नम हो गई ।
वह चुपचाप बाहर निकला और अस्पताल के वरिष्ठ से बात करके सारा खर्चा अपने ऊपर ले लिया ।
लेकिन उसने डॉक्टर से साफ बोल दिया कि , काव्या को इस बारे में कुछ पता नही चलना चाहिए।
जब इलाज शुरू हुआ तो काव्या हैरान रह गई। तुमने डॉक्टर से क्या कहा ? विराज मुस्कुराया ।
बस इतना कि मेरी दोस्त की माँ का इलाज पहले होना चाहिए। उस दिन पहलइ बार काव्या के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
काव्या की बड़ी कंपनी में नौकरी की खुशखबरी
उसी रात विराज ने अपने मोबाईल का एक नंबर मिलाया। दूसरी तरफ हरिशंकर त्रिपाठी थे।
नमस्ते विराज बाबू! त्रिपाठी जी ,,, जो कल लड़की आई थी काव्या उसके बारे में बात करनी थी,,, जी पहचान गया, बहुत विनम्र लड़की थी।
उसकी फाइल दुबारा देखिए उसके योग्यता अनुसार उसको नौकरी दीजिए, हरिशंकर त्रिपाठी कुछ देर चुप रहे फिर बोले,,, अगर आपकी नजर मे वह योग्य है तो, मुझे कोई परेशानी नही है। और एक बात …. जी ?
उसे ऐसी पोस्ट दीजिएगा जहाँ उसकी मेहनत दिखे और वह अपनी जंदगी में आगे बढ़ सके। जैसा आप कहे विराज बाबू। अगली सुबह काव्या की फोन की घंटी बजी ।
उसने फोन उठाया तो दूसरी तरफ मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज का एचआर विभाग था। काव्या जी आपको कंपनी में नियुक्त किया जाता है ।
आज दोपहर तक जॉइन कर लीजिए । कुछ सेकंड तक काव्या को विश्वास तक नहीं हुआ।
कॉन्टेक्ट वाली दुल्हन भाग 2
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सच मे मेरी नौकरी लग गई,,, जी हाँ। फोन कटते ही उसकी आँखों में आसू थे जो की खुशी के।
वह सबसे पहले अस्पताल पहुंची और सबसे पहले यह खुशखबरी अपनी माँ को दी। सरला और गोपल की आँखों में भी खुशी छलक उठी।
थोड़ी देर बाद वह दौड़ती हुई बाहर गई, जहाँ विराज कार के पास खड़ा था।
विराज मेरी नौकरी लग गई। खुशी के मारे उसने बिना सोचे – समझे उसका हाथ पकड़ लिया । विराज मुस्कुरा उठा। मैंने कहा था ना कि , सब ठीक हो जाएगा।
काव्या ने भावुक होकर बोला, अगर तुम मेरी जिंदगी में ना होते तो शायद मैं सब कुछ हार जाती।
विराज ने मजाक करते हुए कहा, तो अब अपने वादे के हिसाब से मुझे हमेशा अपना ड्राइवर रखोगी ना ?
पहली बार काव्य खुलकर हंस पड़ी। हाँ बिल्कुल रखूँगी। विराज कुछ क्षण उसे देखता रहा।
उसके चेहरे पर वो खुशी देखकर ऐसा लगा जैसे उसने दुनिया की सबसे बड़ी खुशी हासिल कर ली है।
फिर उसने मुसकुराते हुए कहा, आज तुम्हारी नौकर लगने की खुशी में हम कहीं अच्छी जगह खाने पर चलते हैं।
काव्या हैरानी से बोली, कहाँ ? विराज ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, सरप्राइज है।
काव्या हंस पड़ी। उसे नही पता था यह छोटा सा सरप्राइज उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य खोलने वाला है।
भाग 1 : समाप्त
अगले भाग में : तेज बारिश , फाइव स्टार होटल , वहाँ होने वाली बेइज्जती , होटल मालिक का विराज को पहचानना , काव्या को विराज पर शक होना और रिया कपूर की नई साजिश ।






