दिल्ली की मायरा और प्रयागराज के रोहित के बीच सात सौ किलोमीटर की दूरी थी, लेकिन उनके दिलों के बीच का रिश्ता हर दिन और गहरा होता जा रहा था। Long Distance Love Story हर रात 11:58 बजे आने वाली एक कॉल उनकी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत रस्म बन चुकी थी।
Hindi Rama | लव स्टोरी
सात सौ किलोमीटर के बीच खूबसूरत कहानी। Long Distance Love Story
रात के 11:58 बज रहे थे। दिल्ली की एक शांत सड़क के किनारे बने अपने कमरे की खिड़की के पास मायरा बैठी थी। बाहर शहर की रोशनी चमक रही थी, लेकिन उसका ध्यान बार-बार फोन की स्क्रीन पर जा रहा था।
वह किसी का इंतजार कर रही थी।
ठीक 11:58 पर फोन की स्क्रीन चमकी।
रोहित का कॉल था।
मायरा के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई। उसने कॉल उठाई और कुछ पल तक बिना कुछ बोले रोहित की आवाज सुनती रही।
दूसरी तरफ प्रयागराज में रोहित अपने कमरे की बालकनी में खड़ा था। दोनों के बीच लगभग सात सौ किलोमीटर की दूरी थी, लेकिन उस वक्त ऐसा लग रहा था जैसे दोनों एक ही जगह बैठे हों।
रोहित हर रात 11:59 बजे कहता, “आई लव यू।”
और जैसे ही घड़ी 12 बजाती, मायरा धीरे से कहती, “नए दिन का पहला आई लव यू भी तुम्हारे नाम।”
यह उनकी मोहब्बत की ऐसी आदत बन चुकी थी, जिसे दोनों किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते थे।
पहली मुलाकात और वह मुस्कान
रोहित और मायरा पहली बार एक दोस्त के जन्मदिन की पार्टी में मिले थे। मायरा दिल्ली से पार्टी में शामिल होने के लिए प्रयागराज आई थी।
पार्टी में काफी लोग थे। संगीत चल रहा था और हर तरफ हंसी-मजाक हो रहा था। उसी भीड़ में रोहित की नजर मायरा पर पड़ी।
मायरा किसी बात पर हंस रही थी। उसकी हंसी सुनकर रोहित कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा। उसे खुद समझ नहीं आया कि वह उस लड़की को इतनी देर से क्यों देख रहा है।
मायरा की नजर अचानक उस पर पड़ी। दोनों की आंखें मिलीं और मायरा ने हल्की-सी मुस्कान दे दी। रोहित ने भी मुस्कुराकर नजरें झुका लीं।
उस दिन दोनों ने ज्यादा बात नहीं की, लेकिन पार्टी खत्म होने के बाद एक दोस्त ने उन्हें ग्रुप चैट में जोड़ दिया। वहीं से बातचीत शुरू हुई।
पहले मैसेज हुए। फिर कॉल शुरू हुईं। और फिर दोनों को पता ही नहीं चला कि कब एक-दूसरे की आवाज उनके दिन का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई।
दोस्ती से प्यार तक का सफर
एक रात मायरा ऑफिस के किसी काम को लेकर बहुत परेशान थी। उसने रोहित को मैसेज किया, “आज मन बहुत खराब है।”
रोहित ने तुरंत कॉल कर दी।
उसने मायरा की पूरी बात सुनी और फिर कहा, “तुम हर चीज अपने दिल पर ले लेती हो। थोड़ा मुस्कुराया करो।”
मायरा ने नाराज होकर कहा, “मुझे इतनी परेशानी हो रही है और तुम्हें मजाक सूझ रहा है?”
रोहित हंसते हुए बोला, “मजाक नहीं कर रहा। बस तुम्हारी उदास आवाज मुझे अच्छी नहीं लगती।”
मायरा कुछ देर चुप रही। फिर उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
शायद उसी रात दोनों को पहली बार महसूस हुआ कि यह रिश्ता अब सिर्फ दोस्ती नहीं रहा था।
दूरी बढ़ी तो मोहब्बत भी गहरी होती गई
दोनों अलग-अलग शहरों में थे। सुबह की शुरुआत मैसेज से होती और रात का अंत कॉल से। रोहित हमेशा पूछता, “खाना खाया?”
मायरा हंसकर कहती, “तुम बॉयफ्रेंड हो या मेरी मां?”
रोहित जवाब देता, “जो भी हूं, तुम्हें भूखा नहीं रहने दूंगा।”
रविवार को दोनों वीडियो कॉल पर साथ खाना खाते। कभी मायरा उसकी प्लेट देखकर हंसती तो कभी रोहित उसके खाने की तारीफ करता।
कभी नेटवर्क अचानक चला जाता और कॉल कट जाती। मायरा बेचैन होकर फोन देखती रहती। कुछ ही सेकंड बाद रोहित फिर कॉल कर देता।
रोहित कहता, “मैं इतनी आसानी से गायब नहीं होने वाला।”
मायरा मुस्कुराकर कहती, “देख लेना, एक दिन तुम्हें पकड़कर अपने पास बैठा लूंगी।”
एक लव लेटर जिसने दोनों को रुला दिया
एक दिन रोहित को मायरा के कमरे में रखा एक पुराना लिफाफा मिला, जिसे उसने एक मुलाकात के दौरान उसके बैग में चुपके से रख दिया था। उसमें मायरा के लिए एक छोटा-सा लव लेटर था।
उसमें लिखा था, “मायरा, मुझे नहीं पता कि सात सौ किलोमीटर की दूरी कितनी लंबी है, लेकिन इतना जानता हूं कि हर दिन तुम्हें याद करने में यह दूरी और छोटी लगने लगती है। तुमसे दूर रहकर मैंने जाना है कि किसी को चाहना सिर्फ उसके पास रहना नहीं, बल्कि उसकी गैरमौजूदगी में भी उसे महसूस करना है।”
मायरा ने वह पत्र पढ़ा तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने रोहित को वीडियो कॉल किया।
रोहित ने पूछा, “रो क्यों रही हो?”
मायरा ने कहा, “क्योंकि तुम इतने दूर होकर भी मेरे इतने पास क्यों हो?”
रोहित कुछ नहीं बोला। दोनों कुछ देर चुपचाप स्क्रीन पर एक-दूसरे को देखते रहे।
मुलाकात छोटी थी, लेकिन प्यार बहुत गहरा था
कुछ समय बाद दोनों फिर मिले। इस बार एक छोटे-से कैफे में। मायरा सामने बैठी थी और रोहित बस उसे देख रहा था।
मायरा ने हंसकर पूछा, “क्या देख रहे हो?”
रोहित बोला, “यकीन कर रहा हूं कि तुम सच में सामने बैठी हो।”
मायरा ने उसका हाथ पकड़ लिया। दोनों कुछ देर चुप रहे। फिर मायरा की आंखों में आंसू आ गए।
रोहित ने धीरे से उसका आंसू पोंछा और उसके माथे पर प्यार से किस कर दिया।
मायरा ने उसे गले लगा लिया। कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे को वैसे ही पकड़े रहे, जैसे डर हो कि छोड़ते ही फिर सात सौ किलोमीटर की दूरी सामने आ जाएगी।
जब जाने का समय आया तो मायरा ने रोहित का हाथ कसकर पकड़ लिया।
“जल्दी वापस आना।”
रोहित ने मुस्कुराकर कहा, “तुम बुलाओगी तो मैं रास्ता नहीं देखूंगा, बस तुम्हारे पास आ जाऊंगा।”
फिर शुरू हुआ इंतजार और तड़प
मुलाकात के बाद दोनों की तड़प और बढ़ गई। अब मायरा को रोहित की कमी पहले से ज्यादा महसूस होने लगी थी।
कभी वह उसकी पुरानी तस्वीरें देखती। कभी वह उसका लव लेटर पढ़ती। कभी फोन की गैलरी में दोनों की मुलाकात वाली तस्वीर खोलकर देर तक बैठी रहती।
उधर रोहित भी रात को मायरा की आवाज सुनने के बाद फोन को सीने के पास रखकर सो जाता। वह खुद से कहता, “काश यह सात सौ किलोमीटर की दूरी खत्म हो जाती।”
दोनों एक-दूसरे को याद करते थे, लेकिन सामने आने की बेचैनी धीरे-धीरे और बढ़ती जा रही थी।
कुछ प्यार पास रहकर नहीं, इंतजार और तड़प के बीच और गहरे हो जाते हैं।
फिर एक दिन मायरा की तबीयत बिगड़ गई
एक सुबह मायरा ने रोहित को मैसेज किया, “आज बहुत कमजोरी लग रही है।”
रोहित ने तुरंत कॉल की। मायरा की आवाज सुनकर उसे समझ आ गया कि बात सामान्य नहीं है।
उसने पूछा, “डॉक्टर को दिखाया?”
मायरा ने कहा, “दवा ले ली है। तुम परेशान मत हो।”
लेकिन रोहित परेशान हो चुका था। फोन पर उसकी आवाज सुनना अब उसे काफी नहीं लग रहा था। उसका मन बार-बार कह रहा था कि उसे मायरा के पास होना चाहिए।
रात में मायरा सो गई, लेकिन रोहित पूरी रात नहीं सोया। वह कभी फोन देखता, कभी मायरा का पुराना लव लेटर पढ़ता।
रोहित ने रातों-रात एक फैसला कर लिया
रात करीब दस बजे रोहित ने अचानक बैग उठाया। उसने कुछ कपड़े रखे, जरूरी दवा ली और मायरा की पसंदीदा जलेबी पैक करवाई।
उसने मायरा को कुछ नहीं बताया।
रात की बस में बैठते समय उसके दिल में एक ही सवाल था—मायरा सुबह कैसी होगी?
बस आगे बढ़ती रही। बाहर अंधेरा था। रोहित खिड़की से बाहर देखता रहा और मायरा को याद करता रहा।
कभी उसे उनकी पहली मुलाकात याद आती। कभी कैफे में मायरा का रोना याद आता। कभी वह लव लेटर याद आता, जिसे लिखते समय उसने सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसी प्यार के कारण रात में सात सौ किलोमीटर का सफर करना पड़ेगा।
सुबह छह बजे दरवाजा खुला
सुबह करीब छह बजे मायरा के घर की घंटी बजी।
वह अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी। धीरे-धीरे उठकर उसने दरवाजा खोला।
दरवाजे के बाहर रोहित खड़ा था।
एक हाथ में दवा और दूसरे हाथ में जलेबी का पैकेट था।
मायरा कुछ सेकंड तक उसे देखती रही। उसे यकीन नहीं हुआ कि वह सच में सामने खड़ा है।
उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
“रोहित… तुम यहां?”
रोहित ने बस इतना कहा, “तुम्हें फोन पर सुनकर मेरा दिल नहीं माना।”
मायरा आगे बढ़ी और उसे कसकर गले लगा लिया। रोहित ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया। दोनों की आंखों में आंसू थे।
कुछ देर तक दोनों कुछ नहीं बोले। उस एक हग में कई रातों का इंतजार, कई फोन कॉल और सात सौ किलोमीटर की सारी तड़प जैसे खत्म हो गई थी।
उस सुबह प्यार ने दूरी को हरा दिया
रोहित ने मायरा के माथे पर हाथ रखा और पूछा, “अब कैसी हो?”
मायरा ने आंसू पोंछते हुए कहा, “अब ठीक हूं।”
रोहित ने उसके माथे पर एक बार फिर प्यार से किस किया और कहा, “अब मुझे डराना मत।”
मायरा हंसते हुए रो पड़ी। “तुम भी ना… बिना बताए इतनी दूर से चले आए।”
रोहित ने जलेबी का पैकेट आगे करते हुए कहा, “तुम्हें पसंद है। सोचा बीमारी में भी तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान आनी चाहिए।”
मायरा ने जलेबी ली और हंसते हुए कहा, “तुम सच में पागल हो।”
रोहित बोला, “तुम्हारे प्यार में।”
एक सुबह, दो कप चाय और बहुत सारा प्यार
कुछ देर बाद मायरा ने दोनों के लिए चाय बनाई। दोनों बालकनी में बैठे थे। सुबह की धूप हल्की थी और हवा में एक अजीब-सी शांति थी।
मायरा रोहित के कंधे पर सिर रखकर बैठी थी। रोहित उसके बालों को धीरे-धीरे सहला रहा था।
मायरा ने पूछा, “तुम्हें मेरी इतनी याद आती है?”
रोहित ने कहा, “तुम्हें क्या लगता है? रात की बस में कौन मजे करने आया था?”
मायरा हंस पड़ी और उसे फिर से गले लगा लिया।
“मैंने तुम्हें बहुत याद किया,” उसने धीमे से कहा।
रोहित ने उसके माथे को चूमा और कहा, “मैंने भी।”
फिर वही बिछड़ने का दर्द
लेकिन शाम होते-होते रोहित को वापस प्रयागराज लौटना था। दोनों जानते थे कि प्यार के बावजूद दूरी अभी खत्म नहीं हुई थी।
दरवाजे पर खड़े होकर मायरा की आंखों में फिर आंसू आ गए। रोहित ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अब रोना मत,” उसने कहा।
मायरा बोली, “तुम चले जाओगे तो फिर वही सात सौ किलोमीटर बीच में आ जाएंगे।”
रोहित ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “दूरी आएगी, लेकिन मैं नहीं जाऊंगा। तुम्हारे दिल से नहीं।”
मायरा ने उसकी शर्ट पकड़ ली। कुछ पल दोनों वैसे ही खड़े रहे। फिर रोहित ने उसके माथे पर हल्का-सा किस किया।
“11:58 वाली कॉल नहीं छूटनी चाहिए,” मायरा ने आंसुओं के बीच कहा।
रोहित मुस्कुराया। “कभी नहीं।”
11:58 वाली मोहब्बत फिर लौट आई
उस रात रोहित प्रयागराज पहुंच चुका था। मायरा दिल्ली में अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी थी। दोनों थके हुए थे, लेकिन दोनों की आंखों में एक ही इंतजार था।
11:58 बजे फोन बजा।
मायरा ने कॉल उठाई।
कुछ सेकंड तक दोनों चुप रहे। फिर रोहित ने कहा, “आज बहुत याद आई।”
मायरा ने कहा, “मुझे भी। बहुत ज्यादा।”
रोहित मुस्कुराया। “सात सौ किलोमीटर फिर भी कम लग रहे हैं।”
मायरा ने आंखें बंद कर लीं। “क्योंकि प्यार रास्ता ढूंढ लेता है।”
घड़ी ने 11:59 बजाए।
रोहित ने कहा, “आई लव यू।”
घड़ी ने 12 बजाए।
मायरा मुस्कुराई और बोली, “नए दिन का पहला आई लव यू भी तुम्हारे नाम।”
सात सौ किलोमीटर वाला प्यार
उनके बीच दूरी थी, लेकिन उस दूरी में इंतजार भी था, तड़प भी थी, आंसू भी थे और ऐसी मोहब्बत भी थी, जो हर बिछड़ने के बाद और मजबूत हो जाती थी।
रोहित और मायरा ने सीखा था कि प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है। प्यार उस इंसान को याद करने का नाम भी है, जिसके बिना दिन अधूरा लगे।
प्यार उस लव लेटर में था, जिसे मायरा बार-बार पढ़ती थी। प्यार उन वीडियो कॉल में था, जिनमें दोनों अलग-अलग शहरों में बैठकर साथ खाना खाते थे। प्यार उन आंसुओं में था, जो हर मुलाकात के बाद बिछड़ते समय निकल आते थे।
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और प्यार उस रात की बस में भी था, जिसमें रोहित सिर्फ इसलिए सात सौ किलोमीटर चल पड़ा था क्योंकि मायरा ने कहा था, “आज बहुत कमजोरी लग रही है।”
मायरा ने एक रात रोहित से कहा, “हमारे बीच सात सौ किलोमीटर हैं, लेकिन हमारा प्यार आज भी एक ही जगह रहता है।”
रोहित ने पूछा, “कहां?”
मायरा मुस्कुराई और बोली, “हमारे दिल में।”
सच्चे प्यार के लिए दूरी सिर्फ रास्ते में होती है, दिलों के बीच नहीं।
अगर आप भी किसी लॉन्ग डिस्टेंस रिश्ते में हैं, किसी को दूर रहकर प्यार करते हैं या किसी ऐसे इंसान का इंतजार कर रहे हैं, जिसे देखकर आपका दिल आज भी धड़कने लगता है, तो यह कहानी शायद आपको अपनी लगे।
अगर आपके जीवन में भी कोई ऐसा इंसान है, जिससे आप दूर रहकर प्यार करते हैं, तो इस कहानी को अपने प्यार के साथ जरूर शेयर करें। क्योंकि कभी-कभी एक कहानी वह बात कह देती है, जिसे हम अपने प्यार से कह नहीं पाते। Long Distance Love Story
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