क्या किसी से इतना प्यार हो सकता है कि उसके दूर जाने के बाद भी दिल हर दिन उसी का इंतजार करे? उस लड़की का इंतजार रोहित और प्रिया की एक दर्दभरी प्रेम कहानी है, जहाँ दोस्ती का वादा प्यार के बीच दीवार बन जाता है। एक गलती दोनों को अलग कर देती है, लेकिन उनकी यादें और अधूरा प्यार खत्म नहीं होता।
Sad Love Story: एक वादे ने छीन लिया सच्चा प्यार
रोहित एक अमीर परिवार का लड़का था। उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन वह पैसों से ज्यादा अपनी दोस्ती को अहमियत देता था। उसे लगता था कि उसके दोस्त भी उसे उतना ही चाहते हैं, जितना वह उन्हें चाहता है।
रोहित को प्यार के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। वह दोस्तों की प्रेम कहानियाँ सुनकर हँस देता और अपनी जिंदगी में खुश रहता था। उसे नहीं मालूम था कि एक दिन प्यार ही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा।
एक दिन उसके कॉलेज में प्रिया नाम की खूबसूरत लड़की आई। उसे देखते ही कई लड़के उसकी तरफ आकर्षित हो गए। उनमें रोहित का दोस्त शंकर भी था, जिसे पहली नजर में प्रिया पसंद आ गई।
शंकर ने रोहित से कहा, “यार, मुझे प्रिया से प्यार हो गया है। लेकिन मैं उससे बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूँ। तू मेरी मदद कर दे।”
रोहित ने हँसकर कहा, “तू चिंता मत कर। मैं तुझे प्रिया से मिलवाने की कोशिश करूँगा। आखिर दोस्त किस दिन काम आएगा?”
शंकर ने प्रिया से बात की, लेकिन उसने साफ मना कर दिया। उसने कहा कि वह किसी लड़के पर आसानी से भरोसा नहीं कर सकती। शंकर उदास होकर लौट आया, मगर रोहित ने उसे उम्मीद नहीं छोड़ने की सलाह दी।
एक छोटी-सी मदद से शुरू हुई दिल की कहानी
प्रिया जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करती थी। रोहित को भी उससे खुलकर बात करने में लगभग तीन महीने लग गए। वह धीरे-धीरे उससे दोस्ती करने लगा और कभी भी उस पर अपनी बात मानने का दबाव नहीं डालता था।
एक दिन प्रिया के नोट्स पूरे नहीं थे। रोहित ने बिना कुछ कहे अपने नोट्स उसे दे दिए। उस छोटी-सी मदद से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गहरी होने लगी।
अब दोनों साथ बैठते, एक-दूसरे की परेशानियाँ सुनते और छुट्टी के बाद भी काफी देर तक बातें करते। जब प्रिया उदास होती, रोहित उसे हँसाने की कोशिश करता। जब रोहित चुप रहता, तो प्रिया उसकी उदासी पहचान लेती।
धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे की आदत बन गए। रोहित को अब दोस्तों के साथ घूमने से ज्यादा प्रिया के साथ समय बिताना अच्छा लगता था। उसकी एक मुस्कान रोहित का दिन बना देती और उसकी नाराजगी पूरे दिन उसे बेचैन रखती।
रोहित खुद भी नहीं समझ पा रहा था कि जिस लड़की को वह कभी केवल एक दोस्त मानता था, वह कब उसके दिल में इतनी खास जगह बना चुकी थी। अब प्रिया के बिना कॉलेज की हर खुशी अधूरी लगने लगी थी।
दिल में प्यार था, लेकिन जुबान पर एक झूठ
एक दिन शंकर ने रोहित से पूछा, “तू प्रिया को मुझसे मिलवाने वाला था, लेकिन अब हर समय उसी के साथ रहता है। सच बता, कहीं तुझे उससे प्यार तो नहीं हो गया?”
रोहित कुछ पल चुप रहा। फिर उसने नजरें चुराकर कहा, “नहीं यार, ऐसा कुछ नहीं है। प्रिया तेरी है। मैंने तुझसे वादा किया था और मैं अपना वादा नहीं भूलूँगा।”
लेकिन उसका दिल जानता था कि वह झूठ बोल रहा है। उस रात वह देर तक सो नहीं पाया। उसकी आँखों के सामने बार-बार प्रिया का चेहरा आता रहा। वह सोचता रहा कि अगर प्रिया उससे दूर चली गई, तो क्या वह कभी खुश रह पाएगा?
आखिर रोहित को एहसास हो गया कि वह प्रिया से प्यार करने लगा है। मगर अब उसके सामने दोस्ती का वादा था। वह प्रिया को सच बताना चाहता था, लेकिन उसे खोने के डर से हर बार चुप रह जाता।
उधर शंकर बार-बार उसे अपना वादा याद दिलाता। रोहित को लगने लगा था कि शंकर उसकी भावनाओं को समझना ही नहीं चाहता। फिर भी वह दोस्ती निभाने के चक्कर में अपने दिल की बात दबाता रहा। यही चुप्पी आगे चलकर उसके प्यार को उससे दूर ले जाने वाली थी।
पार्क में मिला प्यार, जिसे रोहित खोने वाला था
एक दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद रोहित और प्रिया पास के एक पार्क में गए। दोनों काफी देर तक बातें करते रहे। तभी प्रिया ने रोहित का हाथ पकड़कर पूछा, “आजकल तुम इतने परेशान क्यों रहते हो? क्या मुझसे कोई बात छिपा रहे हो?”
रोहित ने मुस्कुराने की कोशिश की। “ऐसी कोई बात नहीं है, प्रिया। बस कुछ उलझनें हैं।” वह सच बताना चाहता था, लेकिन शंकर का खयाल आते ही फिर चुप हो गया।
प्रिया उसके करीब आकर बैठ गई और अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। उसने धीरे से कहा, “तुम्हें पता है, जब तुम मेरे पास होते हो, तो मुझे किसी बात की चिंता नहीं रहती। तुम्हारे साथ मुझे बहुत सुकून मिलता है।”
कुछ देर बाद प्रिया प्यार से रोहित की गोद में बैठ गई। उसने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “पता नहीं कब हुआ, लेकिन अब तुम्हारे बिना मेरा दिन अधूरा लगता है। शायद मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ।”
रोहित की आँखें नम हो गईं। जिस बात को सुनने की उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी, आज वही प्रिया उसके सामने कह रही थी। उसने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और प्यार से उसके माथे पर चूम लिया।
प्रिया उसके सीने से लग गई। उस पल दोनों के बीच कोई वादा, कोई डर और कोई परेशानी नहीं थी। बस दो दिल थे, जो एक-दूसरे के करीब आ चुके थे। रोहित का मन हुआ कि समय यहीं ठहर जाए और प्रिया हमेशा उसके पास रहे।
कुछ देर बाद प्रिया ने उसका हाथ थामकर कहा, “रोहित, मुझसे कभी झूठ मत बोलना। मैं तुम्हारे ऊपर बहुत भरोसा करती हूँ। अगर कोई परेशानी हो, तो मुझे बता देना। मैं तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूँगी।”
रोहित ने उसकी आँखों में देखकर कहा, “मैं तुम्हें कभी दुख नहीं देना चाहता।” यह कहते हुए उसका दिल अंदर से काँप रहा था, क्योंकि वह जानता था कि उसने अब तक उससे एक बहुत जरूरी सच छिपाया है।
एक सच छिपाने की कीमत दोनों को चुकानी पड़ी
पार्क से लौटकर रोहित ने तय किया कि वह अगले दिन प्रिया को सब कुछ बता देगा। लेकिन जब वह उसके सामने पहुँचा, तो उसकी हिम्मत फिर जवाब दे गई। प्रिया ने उसकी उदासी देखी, मगर उस पर भरोसा करके ज्यादा सवाल नहीं किए।
कुछ दिन बाद शंकर ने फिर रोहित को घेर लिया। उसने कहा, “तूने मुझसे वादा किया था कि प्रिया से मेरी बात करवाएगा। अब और कितने दिन इंतजार करूँ?”
रोहित पहले से ही परेशान था। शंकर की बात सुनकर वह अपना गुस्सा रोक नहीं पाया। वह प्रिया के पास गया और अचानक कह दिया, “शंकर तुमसे प्यार करता है। मैंने उससे वादा किया था कि मैं तुम दोनों को मिलवाऊँगा।”
यह सुनते ही प्रिया की मुस्कान गायब हो गई। उसने रोहित को ऐसे देखा, जैसे सामने खड़ा इंसान अचानक अजनबी बन गया हो। उसकी आँखों में आँसू भर आए और काँपती आवाज में उसने पूछा, “तो क्या तुम इतने दिनों से मेरे साथ सिर्फ इसलिए थे, ताकि मुझे अपने दोस्त के पास भेज सको?”
रोहित घबरा गया। “नहीं, प्रिया! मेरी बात सुनो। मैं तुमसे सच में प्यार करता हूँ। मैं तुम्हें सब समझाना चाहता था, लेकिन…”
प्रिया ने रोते हुए उसे थप्पड़ मार दिया। “बस करो, रोहित! मैंने तुम पर भरोसा किया था। तुम्हारे साथ अपने दिल की बातें बाँटी थीं। तुमने एक बार भी नहीं सोचा कि यह सब जानकर मुझ पर क्या बीतेगी?”
उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे। उसने कहा, “अगर तुम मुझे सच बता देते, तो शायद मैं तुम्हारी बात सुन लेती। लेकिन तुमने मुझे अँधेरे में रखा। अब मैं तुम्हारी किसी बात पर भरोसा नहीं कर सकती।”
रोहित ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की, मगर प्रिया ने अपना हाथ छुड़ा लिया। वह रोते हुए वहाँ से चली गई। रोहित उसे पुकारता रहा, लेकिन उसने पलटकर नहीं देखा। उस दिन पहली बार उसे समझ आया कि किसी को खोने का डर और सच में उसे खो देने का दर्द कितना अलग होता है।
शंकर ने भी रोहित की तकलीफ समझने के बजाय उसे अपना वादा याद दिलाया। रोहित को एहसास हुआ कि जिस दोस्त के लिए उसने अपने प्यार को छिपाया, उसने कभी उसके टूटते दिल की परवाह ही नहीं की। मगर अब पछताने से क्या होता? उसकी अपनी चुप्पी ने प्रिया का भरोसा तोड़ दिया था।
प्रिया की तस्वीर और रोहित के आँसू
उस घटना के बाद प्रिया कई दिनों तक कॉलेज नहीं आई। रोहित रोज उसकी खाली सीट देखता और सोचता कि शायद आज वह लौट आएगी। हर गुजरते दिन के साथ उसकी उम्मीद कम होती गई, लेकिन उसका इंतजार खत्म नहीं हुआ।
आखिर वह प्रिया के घर पहुँचा, मगर वहाँ ताला लगा था। आसपास के लोगों से पूछने पर पता चला कि प्रिया अपने माता-पिता के साथ गाँव चली गई है। किसी को उसके नए पते की जानकारी नहीं थी और उसका फोन भी बंद आ रहा था।
उधर प्रिया भी अपने दर्द से लड़ रही थी। दिन में वह सामान्य रहने की कोशिश करती, लेकिन रात होते ही उसकी आँखें भर आतीं। उसके पास रोहित की एक तस्वीर थी, जिसे वह अपने साथ गाँव ले गई थी।
एक रात उसने वह तस्वीर हाथ में ली और उसे सीने से लगा लिया। उसकी आँखों से आँसू तस्वीर पर गिरने लगे। वह रोते हुए बुदबुदाई, “रोहित, अगर तुम्हें मुझसे प्यार नहीं था, तो तुमने मुझे अपने इतने करीब क्यों आने दिया? मैंने तो तुम्हें अपना सब कुछ मान लिया था।”
वह तस्वीर फेंकना चाहती थी, मगर उसका हाथ नहीं उठा। तस्वीर में रोहित मुस्कुरा रहा था और उस मुस्कान में उसे अपने साथ बिताए सारे पल दिखाई दे रहे थे। वह उससे नाराज थी, लेकिन दिल में बसा प्यार एक दिन में मिटा नहीं सकती थी।
अगले दिन प्रिया ने अपना फोन नंबर बदल लिया। वह रोहित से दूर रहकर अपनी जिंदगी शुरू करना चाहती थी। उसने किसी को भी अपना नया नंबर देने से मना कर दिया, क्योंकि उसे डर था कि रोहित की आवाज सुनते ही वह फिर टूट जाएगी।
फिर भी कई रातें ऐसी थीं, जब वह रोहित की तस्वीर देखकर चुपचाप रोती रहती। उसने उससे बात करना छोड़ दिया था, लेकिन उसकी यादों से दूर नहीं जा पा रही थी। जिस इंसान ने उसे सबसे ज्यादा खुशी दी थी, उसी की याद अब उसके लिए सबसे बड़ा दर्द बन चुकी थी।
रोहित हर दिन उसी रास्ते पर लौटता रहा
रोहित ने प्रिया को कई बार फोन किया, लेकिन हर बार उसका नंबर बंद मिला। वह उसके घर भी गया, मगर वहाँ अब कोई नहीं रहता था। धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि प्रिया सचमुच उसकी जिंदगी से दूर जा चुकी है।
वह सोचता, “काश, मैंने उसे अकेले में सब कुछ बता दिया होता। काश, मैं उसे समझने का एक मौका देता। शायद वह नाराज होती, शायद मुझसे सवाल करती, लेकिन कम से कम मेरी बात तो सुनती।”
अब उसे अपनी गलती साफ दिखाई देती थी। उसने दोस्ती का वादा निभाने की कोशिश में उस लड़की का भरोसा तोड़ दिया, जो उससे सच्चा प्यार करने लगी थी। उसे यह भी समझ आया कि शंकर ने उसकी भावनाओं की परवाह नहीं की, लेकिन प्रिया को सच बताने की जिम्मेदारी उसकी अपनी थी।
रोहित अक्सर उसी पार्क में जाकर बैठता, जहाँ प्रिया ने पहली बार अपने प्यार का इजहार किया था। वह उसी जगह को देखता, जहाँ प्रिया उसकी गोद में बैठी थी और उसने उसके माथे पर प्यार से चूम लिया था। अब वही यादें उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के बजाय आँखें नम कर देती थीं।
वह कभी-कभी उस खाली बेंच पर बैठकर धीमे से कहता, “प्रिया, मैं आज भी तुमसे प्यार करता हूँ। काश, तुम एक बार मेरी बात सुन लेती। मैं तुम्हें कभी दुख नहीं देना चाहता था।”
लेकिन वहाँ कोई जवाब देने वाला नहीं था। हवा चलती रहती और रोहित देर तक अकेला बैठा रहता। उसे अब किसी से शिकायत नहीं थी। बस एक पछतावा था कि जिस प्यार को वह बचा सकता था, उसे उसने अपनी चुप्पी से खो दिया।
एक अनजान कॉल ने फिर जगा दी उम्मीद
कई दिन बीत गए। रोहित की जिंदगी बाहर से पहले जैसी हो गई थी, लेकिन अंदर से वह अब भी उसी जगह रुका हुआ था। उसके दोस्त आगे बढ़ रहे थे, मगर वह हर दिन फोन की स्क्रीन देखता और मन ही मन उम्मीद करता कि शायद प्रिया का फोन आ जाए।
एक शाम वह अपने कमरे में अकेला बैठा था। अचानक उसके फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। उसने फोन उठाकर कहा, “हेलो?” दूसरी तरफ कुछ पल खामोशी रही। फिर एक लड़की की धीमी आवाज सुनाई दी, “तुम कैसे हो?”
रोहित का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह आवाज बिल्कुल प्रिया जैसी थी। वह कुछ बोल पाता, उससे पहले ही फोन कट गया। रोहित फोन को देखता रह गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए और दिल में एक छोटी-सी उम्मीद फिर से जाग उठी।
उसने तुरंत उसी नंबर पर वापस कॉल किया, लेकिन फोन किसी दूसरे व्यक्ति ने उठाया। रोहित को पता चला कि वह नंबर उस व्यक्ति का था, जिसके फोन से शायद किसी ने उसे कॉल किया था। वह समझ नहीं पाया कि उस आवाज के पीछे सचमुच प्रिया थी या नहीं।
असल में प्रिया ने गाँव में किसी दूसरे के फोन से रोहित को कॉल किया था। उसके पास अब भी रोहित का नंबर याद था। वह उससे दूर जरूर चली गई थी, लेकिन उसकी यादों से रोहित का नंबर मिटा नहीं पाई थी। दूसरी तरफ रोहित ने भी अपना नंबर कभी नहीं बदला था। शायद वह आज भी किसी अनजान कॉल में प्रिया की आवाज तलाश रहा था।
अब रोहित के मन में कई सवाल थे। क्या प्रिया ने सिर्फ उसका हाल जानने के लिए फोन किया था? क्या वह भी उसकी तरह उसे याद करके रोती थी? और अगर वह सचमुच प्रिया थी, तो उसने कुछ कहने से पहले फोन क्यों काट दिया?
रोहित उस नंबर के बारे में पता लगाना चाहता था, लेकिन उसे डर था कि कहीं उसकी कोशिश से प्रिया फिर उससे दूर न हो जाए। उसके पास अब भी प्रिया की यादें थीं, उसकी पुरानी तस्वीरों की याद थी और उस छोटी-सी कॉल में सुनाई दी आवाज थी। मगर प्रिया कहाँ थी, यह उसे नहीं मालूम था।
यही थी उस लड़की का इंतजार, जिसमें प्यार खत्म नहीं हुआ था, लेकिन भरोसा टूटने के बाद दो दिल दूर हो गए थे। क्या रोहित उस अनजान नंबर के जरिए प्रिया तक पहुँच पाएगा? क्या प्रिया कभी लौटकर उसकी बात सुनेगी? या फिर यह Sad Love Story हमेशा एक अधूरी प्रेम कहानी बनकर रह जाएगी?





