Haunted Forest Story In Hindi
⇒ धुंधगाँव यह नाम सुनते ही आसपास के गाँवों के लोगो के चेहरे उतर जाते थें । कहा जाता था , कि इस गाँव से कई सालों से किसी अनदेखी शक्ति का साया था । यहाँ दिन धुआँ सा रहता था और रात में धुंध सी छायी रहती था । रात होते होते ही पूरा गाँव ऐसा लगता था जैसे अंधेरे नें उसे निगल लिया हों ।
⇒ धुंधगाँव चारों तरफ घना जंगल फैला हुआ था । इतना घना कि दोपहर में भी सूरज की रोशनी जमीन तक नहीं पहुँचती थीं । पेड़ों की टेड़ी – मेड़ी शाखाएं हवा चलनें पर ऐसे हिलती थीं जैसे कोई लंबी उँगलियाँ लोगों को पकड़ने के लिए आगे बढ़ रहीं हैं ।
⇒ गाँव के बूढ़े कहते थें कि उस जंगल में रात के समय इंसानो की नहीं — किसी और चीज की आवाज गूँजती हैं । कभी किसी औरत की रोने की आवाज , तो कभी बच्चे की चीख .। और कभी बैलों की धीमी खनखनाहट ।
⇒ धुंधगाँव से बाहर जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था । एक पुराना कीचड़ भरा रास्ता । जो सीधे जंगल के बीच से गुजरता था । बारिश के दिनों में वह रास्ता दलदल बन जाता था । कई बार बैलगाड़ी उसमे आधी धंस जाती थीं ।
⇒ लेकिन असली डर कीचड़ या अंधेरे का नहीं था । — डर था उस रास्ते पर रात में दिखाई देने वाली बैलगाड़ी का !
⇒ गाँव में कोई भी आदमी सूरज ढलने के बाद उस रास्ते पर अकेले जाने की हिम्मत बिल्कुल नहीं करता था । और जो कोई मजबूरी में गया वह शायद ही वापस लौटता था ।
नरभक्षी बैलगाड़ी वाला छाया सिंह
⇒ कई साल पहले की बात थीं — एक व्यापारी रात में शहर से लौट रहा था । तभी अचानक रास्ते में उसे एक बैलगाड़ी दिखाई दी । बैलगाड़ी वाला लंबा चौड़ा आदमी था । उसने धीमी आवाज में कहा ! बैठ जाओ मालिक , इतनी गहरी रात हैं और रात में यह जंगल सुरक्षित नहीं ।
⇒ व्यापारी बहुत ज्यादा डर गया था । इसलिए वह तुरंत बैलगाड़ी में बैठ गया था । लेकिन अगले दिन उसकी लाश जंगल के बीचों – बीच मिली ।
⇒ उस व्यापारी का शरीर आधा मिट्टी में दबा हुआ था । और आंखे पूरी तरह खुली हुई थीं । जैसे मरने से पहले उसने कुछ ऐसा भयानक देख लिया हों — जिसे शायद इंसान कभी सहन नहीं कर सकता ।
⇒ उस के बाद बैलगाड़ी वाले को गाँव वालों नें एक नाम दिया ! — ” नरभक्षी बैलगाड़ी वाला “
⇒ लोग कहते थें कि वह कोई इंसान नहीं ! बल्कि एक खतरनाक जिन्न था । एक ऐसा जिन्न जो रात में मुसाफिरों का शिकार करता था ।
⇒ धुंधगाँव में बारिश बहुत होती थीं । कई – कई दिनों तक आसमान से पानी बरसता रहता था । रात के समय जब बिजली चमकती — तो जंगल के पेड़ों के बीच कुछ परछाइयाँ भागती हुई दिखाई देती थीं ।
⇒ गाँव की औरते शाम होने से पहले अपने बच्चों को घरों के अंदर बंद कर लेती थीं । दरवाजों पर नींबू मिर्ची टाँगे जाते व मंत्र पढ़ें जाते थें । लेकिन फिर भी रात होते ही पूरे गाँव में डर फैल जाता था ।
⇒ सबसे ज्यादा डरावानी थीं — सर्दियों की रातें । ” उस समय जब धुंध इतनी घनी हो जाती थीं , कि इंसान अपने हाथ तक नहीं देख सकता था । उन्ही रातों में दूर कहीं बैलों की घंटियों की आवाज सुनाई देती ” ठनन….ठनन….ठनन ।
⇒ बैलों की आवाज धीरे – धीरे गाँव के करीब आती और सबको डराकर फिर अचानक बंद हों जाती ।
⇒ गाँव के बूढ़े कहते थें ! — जिस रात घंटियों की आवाज घर के सामने रुक जाए …. समझ लो मौत दरवाजे पर हइ खड़ी हैं ।
⇒ कई लोगों ने दावा किया था , कि उन्होंने उस बैलगाड़ी वाले को देखा हैं । उसका चेहरा हमेशा धुंध में छिपा रहता था । सिर्फ उसकी लाल चमकती आंखे दिखाई देती थीं । कहते हैं — उसके बैल भी सामान्य नहीं थें । उनकी आंखे कोयले की तरह चमकती थीं और उनके पैरों की आवाज जमीन पर नहीं सुनाई देती थीं । वो तो जैसे हवा में चल रहें हों ।
⇒ एक बार चार लड़कों नें मिलकर सच जानने की कोशिश की — और वे रात में मशाल लेकर जंगल में गए । पूरी रात बीत गई , लेकिन सुबह सिर्फ उनकी टूटी हुई मशालें ही मिली । वे चार लड़के कभी वापस नहीं आए ।
⇒ अब गाँव के कई सुंदर लड़कियां भी गायब होने लगी ! — क्योंकि अब वह नरभक्षी बैलगाड़ी वाला सबको छोड़ लड़कियों को उस जंगल में अपने जादू से बुलाने लगा । और उनके साथ भगवान जाने क्या करने लगा । मगर वह लड़कियाँ आज तक वापस नहीं आयी ।
⇒ उस घटना के बाद लोगों ने शहर जाने वाला रास्ता ही छोड़ दिया । धीरे धीरे जंगल के दूसरी तरफ नया रास्ता बनाया गया ।
⇒ लेकिन डर आज भी खत्म नहीं हुआ था । क्योंकि रात होते हइ पुराना रास्ता फिर से जिंदा हो जाता ।
सुमन पर नरभक्षी जिन्न की गंदी नजर
⇒ धुंधगाँव के किनारे एक छोटा सा खेत था । वहाँ रामप्रसाद अपनी बेटी सुमन के साथ खुद के खेतों में काम करता था । कई बार काम ज्यादा होने के कारण उनदोनों को रात भर खेतों मे ह रहना पड़ता था ।
⇒ उनका खेत जंगल से बिल्कुल सटा हुआ था । — रामप्रसाद नें रात में अपने खेतों के पास कई बार किसी को खड़े देखा था । एक लंबी काली परछाई …. जो थोड़ी ही देर में धुंध में गायब हो जाती थीं ।
⇒ खेतों के पास घर के अंदर भी रामप्रसाद को कुत्तों की जोर – जोर से भोंकने की आवाजे आती । मगर जैसे हइ रामप्रसाद बाहर आता , तो चारों तरफ सिर्फ धुंध ही होती ।
⇒ एक रात बारिश बहुत तेज हो रही थीं । आसमान में बिजली चमक रहीं थीं । तभी रामप्रसाद को दूर रास्ते पर एक बैलगाड़ी दखाई दी ।
⇒ बैलगाड़ी धीरे – धीरे उसके खेत की तरफ हीं आ रही थीं । उसके बैलों की घंटियाँ बारिश के शोर में भी साफ सुनाई दे रही थीं । यह देखकर रामप्रसाद का गला सुख गया । क्योंकि पहली बार गाँव के अंदर बैलगाड़ी आयी थीं ।
⇒ तभी अचानक बिजली जोर से चमकी और एक पल के लिए बैलगाड़ी वाले का चेहरा बिल्कुल साफ दिखाई दिया ।
⇒ उसका चेहरा इंसान का नहीं था । — उस नरभक्षी की आंखे पूरी काली थीं । ” और होंटो के बीच लंबे नुकीले दाँत चमक रहे थें । कुल मिलाकर वह बैलगाड़ी वाला बहुत हीं भयंकर लग रहा था । वह रामप्रसाद को घूर कर देख रहा था । “
⇒ रामप्रसाद डर के मारे जमीन पर गिर पड़ा । जब उसने दोबारा नजरू उठाई …. वहाँ से बैलगाड़ी गायब थीं ।
⇒ अगले दिन उसने यह बात पूरे गाँव को बताई , लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए तैयार नहीं हुआ । क्योंकि धुंध गाँव के लोग जानते थें । — जिसे नरभक्षी बैलगाड़ी वाला देख लेता हैं उसका बचना बिल्कुल नामुमकिन होता हैं ।
⇒ उस रात के बाद रामप्रसाद की नींद पूरी तरह से उड़ गई थीं । हर शाम होते ही वह अपनी बेटी सुमन को घर के अंदर बंद कर देता । और दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटका देता ।
⇒ लेकिन उसकी बेटी सुमन को यह सब अंधविश्वास लगता था । उसे लगता था कि गाँव वाले डर के मारे कहनियाँ बनाते हैं ।
⇒ सिर्फ रवि हइ था जो रामप्रसाद की बातें गंभीरता से सुनता था ।— ” रवि गाँव का सबसे बहादुर लड़का था । लंबा ताकतवर और निडर ” वह बचपन से हइ सुमन से प्यार करता था ।
⇒ एक शाम हल्की बारिश हो रही थीं । — सुमन और रवि खेत के पास घाँस के ढेर पर बैठे बातें कर रहें थें । चारों तरफ धुंध फैली हुई थीं । और दूर जंगल से अजीब सी आवाजे आ रहीं थीं । तभी अचानक रवि की नजर जंगल की तरफ गई । धुंध के बीच कोई खड़ा था । ” एक लंबा काला साया ” जिसकी दो लाल आंखे अंधेरे में जल रही थीं
⇒ रवि तुरंत खड़ा हो गया । ” लेकिन अगले हीं पल बिजली चमकी …. और वह साया गायब हो गया “
⇒ उसी रात पहली बार सुमन नें अपने घर के बाहर बैलों की घंटियों की आवाज सुनी । — ठन.. ठन.. ठन आवाज धीरे – धीरे उनके दरवाजे तक आयी और फिर अचानक रुक गई ।
⇒ अब रामप्रसाद और सुमन बहुत घबरा गए । क्योंकि गाँव वालों नें कहा था कि — ” जिस रात बैलों की घंटियाँ जिसके दरवाजे पर रुक जाए …. समझ लो नरभक्षी जिन्न ने तुम्हें चुन लिया हैं ” यह सोच सोचकर रामप्रसाद और उसकी बेटी गले लगकर चुपचाप खूब रोने लगे । वह धीरे – धीरे इसलिए रो रहे थें क्योंकि , शायद उनके दरवाजे पर वह नरभक्षी खड़ा था ।
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⇒ अगले दिन से ही अजीब – अजीब घटनाए होना शुरू हो गई । रात में घर की खिड़कियों पर किसी के नाखून रगड़ने की आवाज आती , — कभी खेतों में बैलगाड़ी के पहियों के निशान दिखाई देते । एक तो रामप्रसाद का खेत जंगल के पास हइ था । और घर खेतों से थोड़ा हइ दूर था ।
⇒ मतलब रामप्रसाद का घर और खेत जंगल के पास ही था और गाँव से दूर ।
जंगल में मौत का सामना और आधी जली बैलगाड़ी
⇒ एक रात सुमन ने अपनी खिड़की से बाहर देखा तो उसका खून ही जम गया । — जंगल के किनारे बैलगाड़ी खड़ी थीं । ” उस पर बैठा था वह नरभक्षी छाया सिंह और वह सुमन को ही घूर रहा था । उसकी लाल आंखे सीधे सुमन पर हइ टिकी हुई थीं । और उसके होंटों पर एक भयानक मुस्कान थीं । “
⇒ सुमन चीख पड़ी । नरभक्षी खिड़की तोड़कर सुमन को उठाकर ले गया । जब तक रामप्रसाद भागकर आया तब तक बैलगाड़ी गायब हो चुकी थीं ।
⇒ तभी रामप्रसाद ने रवि को बुलाया और उसे सारी बात बताई । — अब रवि समझ चुका था । छाया सिंह सिर्फ लोगों को ही नही मार रहा था , बल्कि उसकी नजर सुमन पर थीं ।
⇒ शायद वह नरभक्षी सुमन को अपने साथ ले जाना चाहता था । क्योंकि पहले भी वह कई गाँव की सुंदर लड़कियों को ले जा चुका था । और सुमन को रवि किसी भी हालत में खो नहीं सकता था । ” चाहे उसे उस नरभक्षी से ही क्यों ना लड़ना पड़े ।
⇒ उस रात रवि नें फैसला किया ! — कि वह इस डर का अंत करेगा ।
⇒ वह कुल्हड़ी और मशाल लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा । राम प्रसाद भी उसके साथ गया । जंगल के अंदर जाते ही, हवा अचानक बिल्कुल ठंडी हो गई । सारे पेड़ ऐसे हिल रहे थे जैसे उनपर कोई बैठा हों ।
⇒ तभी दूर धुंध में बैलगाड़ी दखाई दी । उसके पास सुमन खड़ी थीं जैसे उसे किसी नें अपने वश में किया हों ।
⇒ सुमन…. सुमन …. वापस आओ ! — रामप्रसाद जोर से चिल्लाया ।
⇒ लेकिन, सुमन उन्हे देख जरूर रही थीं । मगर वह खुद के ही वश में नहीं थीं । उसकी आंखे खाली थीं । वह धीरे – धीरे बैलगाड़ी के पीछे – पीछे चल रही थीं । — तभी नरभक्षी छाया सिंह हँस पड़ा । ” उसकी आवाज इंसान की बिल्कुल नहीं थीं । ऐसा लग रहा था , जैसे सौ लोग एक साथ चीख रहें हों । “
⇒ तभी अचानक उसके शरीर से काला धुआँ निकलने लगा ! — और उसका चेहरा लंबा हो गया । दो दाँत बाहर निकल आए । और उसकी आंखे आग की तरह जलने लगी ।
⇒ रामप्रसाद डर के मारे पीछे हट गया , — लेकिन रवि कुल्हाड़ी लेकर सीधे उसकी तरफ दौड़ा । जैसे ही रवि नें वार किया । नरभक्षी हवा में गायब हो गया ।
⇒ अगले हइ पल रवि की चीख जंगल में गूंज उठी । ” रामप्रसाद नें पीछे मुड़कर देखा , तो रवि हवा में लटका हुआ था । कोई अदृश्य शक्ति उसका गला दबा रही थीं ” रवि की चीख से थोड़ा सुमन को भी होश आ गया था । सुमन जोर – जोर से रोने लगी थीं ।
⇒ तभी रामप्रसाद नें हनुमान चालीसा पढ़ते हुए , मशाल उठाई और बैलगाड़ी पर फैक दी । अचानक बैलगाड़ी आग में जल उठी छाया सिंह दर्द से चीखने लगा ।
⇒ उसकी चीख इतनी भयानक थी , कि पूरा जंगल कांप उठा । पेड़ों पर बैठे सारे पक्षी एक साथ उड़ गए ।
⇒ उसी मौके का फायदा उठाकर रामप्रसाद अपनी बेटी सुमन का हाथ पकड़कर जोर से वहाँ भागा । — दोनों ही बिना पीछे देखे जंगल से बाहर भागते रहें ।
⇒ मगर रवि ने हिम्मत नही हारी , ” तभी रवि नें नीचे गिरी हुई मशाल उठाई और पूरी ताकत से छाया सिंह नरभक्षी की बैलगाड़ी के अंदर फैक दी “
⇒ देखते ही देखते सुखी लकड़ी की बैलगाड़ी आग पकड़ने लगी । आग की लपटे अचानक तेज होने लगी । और छाया सिंह के काले कपड़ों तक पहुँच गई । नरभक्षी दर्द से ऐसी चीख मारने लगा , कि मनो धरती भी फट जाएगी ।
⇒ उसकी लाल आंखे और भी खतरनाक हो गई । उसके चेहरे का आधा हिस्सा जल चुका था । और काले धुएं के साथ उसकी चमड़ी पिघलती हुई दिखाई दे रही थीं ।
⇒ तभी उसके दोनों बैल डरकर जोर – जोर से चिल्लाने लगें । और पागलों की तरह जंगलों कइ तरफ भागने लगे । जलती हुई बैलगाड़ी कीचड़ भरे रास्ते पर, तेजी से दूर जाने लगे ।
⇒ जाते – जाते नरभक्षी छाया सिंह नें पीछे मुड़कर रवि को घूरा , — और बोला ! मैं वापस आऊँगा …. तुम सबको अपने साथ ले जाने ।
⇒ अगले ही पल बैलगाड़ी घनी धुंध के अंदर गायब हो गई । ” सिर्फ बैलों की घंटियों की आवाज दूर तक सुनाई दे रही थीं ” ठन – ठन – ठन
⇒ रवि घायल था , लेकिन जिंदा बच गया था । रामप्रसाद ने रवि को जिंदा देखते ही गले से लगा लिया । — रामप्रसाद व उसकी बेटी सुमन डर से अभी भ कांप रहे थें । क्योंकि वे जानते थें , कि वह नरभक्षी छाया सिंह अभी मरा नहीं था ।
⇒ उस घटना के बाद धुंधगाँव के लोगों नें हमेशा के लिए जंगल वाला रास्ता बिल्कुल बंद कर दिया था ।
⇒ लेकिन आज भी बरसात और धुंध वाली रात में लोग कहते हैं , ” कि दूर जंगल में एक आधी जली बैलगाड़ी दिखाई देती हैं ।
⇒ और उसमे बैठा दो लाल आँखों वाला अब भी अपने अगले शिकार का इंतजार कर रहा हैं
⇒ अब गाँव में डर का माहौल और भी ज्यादा हो चुका था । क्योंकि किसी को भी नहीं पता था , कि कब वह नरभक्षी छाया सिंह कब किसको अपना शिकार बनएगा ।
? कहानी से जुड़े कुछ रहस्यमयी सवाल
1. क्या छाया सिंह आज भी जिंदा हैं ?
हाँ , वह नरभक्षी जिन छाया सिंह आज भी जिंदा हैं ।
2. क्या रवि और सुमन बच गए थें ?
हाँ रवि और सुमन आखिर में उस जिन से बच गए थें ।