मृतकों की गीनती करनें वाली औरत । मौत की पर्ची । Haunted Village Story ।

मौत का हिसाब रखने वाली बूढ़ी औरत Haunted Village Story

⇒ एक पुराने गाँव में मौत कभी अचानक से नही आती थी। सब लोग कहते है कि यहाँ मौत पहले अपना नाम लिखवाती है , फिर अपने शिकार को लेने आती है। गाँव के बुजुर्ग दावा करते थे कि जिसने भी मरने से पहले कुछ दिन , उस बूढ़ी औरत को देख लिया उसकी जिंदगी की गिनती शुरू हो जाती थी।

⇒ गाँव के किनारे एक टूटा हुआ मकान था, जहाँ सविता नाम की बूढ़ी औरत अकेली रहती थी। दिन में वह शायद ही कभी दिखाई देती, लेकिन रात में उसके घर की खिड़की से पीली रोशनी और फुसफुसहटो की आवाज आती थी।

⇒ लोग कहते थे वह किसी इंसान से नही  बल्कि किसी ऐसी चीज से बात करती थी जो किसी को दिखाई नही देती थी, ।

⇒ और हर रात 2 बजे गाँव के पुराने मंदिर की घंटी बजती थी। सबसे डरवानी बात यह थी कि मंदीर पर भारी ताला लगा होता था। फिर भी घंटी बजती थी ।

भयानक आधी रात की फुसफुसाहट  

⇒ एक रात में राघव शर्मा सविता के घर के पीछे छुप गया । उसका इरादा था कि वह सच के बारे में जाने की आखिरकर सच है क्या ?

⇒ रात के लगभग डेढ़ बजे सविता की कांपती आवाज अंदर से सुनाई दे रही थी, – आज किसकी बारी है ? कुछ क्षण तक सन्नाटा था ।

⇒ फिर अचानक कमरे का तापमान इतना ठंडा हो गया कि राघव की साँसों से धुआं निकलने लगा। इसके बाद एक दूसरी आवाज सुनाई देती है, ।

⇒ वह आवाज किसी इंसान जैसे नही थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई सौकड़ों साल से पुरानी सुखी जीभ से आवाज  निकली हो,,,,, नाम लख दिया जाएगा……।

⇒ उसी पल घर के अंदर रखी सारी मोमबत्तियाँ अपने आप बुझ गई, राघव बहुत डर गया था। लेकिन असली डर अभी बाकी था।

⇒ खिड़की के शीशे पर अचानक किसी ने अंदर की तरफ से पाँच उँगलियाँ रख दी। जबकि कमरे में सविता के अलावा कोई और नही था ।

आधी रात को बंद मंदिर के भीतर कौन था ?   

⇒ ठीक 2 बजे मंदिर की घंटी बजने लगी और राघव वहाँ पहुँच गया । उसने देखा की सविता मंदिर के सामने खड़ी है मंदिर बंद था । ताला अपनी जगह पर था।

⇒ लेकिन अगले ही पल सविता का शरीर धूएं की तरह कांपा और वह दरवाजे के आर – पार निकल गयी। घंटी और तेज बजने लगी।

⇒ तभी राघव को लगा कि को उसके पीछे खड़ा है । उसने धीरे – धीरे गर्दन घुमाई। वहाँ एक औरत खड़ी थी। उसके बाल इतने बड़े थे कि जमीन तक लटक रहे थे ।

⇒ चेहरा पुरी तरह काला था लेकिन सबसे भयानक बात यह थी कि उसकी आंखे नही थी। आँखों की जगह दो जगह दो गहरे काले गड्ढे थे जिनमे कुछ हिलता हुआ दिखाई दे रहा था।

⇒ राघव चीखने ही वाला था कि वह आकृति हवा में घुलकर गायब हो गई।

भावना की पर्ची मिल गई  

⇒ अगले दिन राघव सविता के घर में घुस गया । अंदर की बदबू जैसे किसी बंद कब्र को अभी – अभी खोला गया हो। दीवारों पर हजारों नाम लिखे थे।

⇒ कुछ इतने पुराने थे कि उनके शव्द भी मिट चुके थे। कमरे के कोने में लोहे का एक सन्दूक रखा हुआ था। जैसे ही राघव ने उसे खोला, उसके हाथ कांपने लगे।

⇒ सन्दूक में सैकड़ों पर्चियाँ भरी पड़ी थी। हर पर्ची पर किसी मृत व्यक्ति का नाम लिखा था । तभी उसे एक नई पर्ची मिलती है जो सबसे ऊपर रखी हुई थी ।

⇒ उस पर ताजे लाल अक्षरों में लिखा था – भावना ,,,,,, राघव की साँस अटक सी गई ।

⇒ तभी उसके पीछे किसी ने बहुत धीमी आवाज में कहा – उसे बचा नही पाओगे। राघव तुरंत पलटा ।

⇒ वहाँ कोई नही था….। लेकिन जब उसने दोबारा पर्ची की तरफ देखा तो, उस पर एक नई लाल रेखा खिच गई थी। कमरे में वह अकेला था ।

चुड़ैल और आत्मा का सदियों पुराना श्राप 

⇒ गाँव के सबसे बुजुर्ग आदमी ने राघव को एक ऐसा सच बताया कि जिससे उसकी नींद उड़ गयी । सविता चुड़ैल थी लेकिन वह अपनी मर्जी से चुड़ैल नहीं बनी थी।

⇒ कई दशक पहले एक भटकती आत्मा ने उसे अपना श्राप सौंप दिया था। वह आत्मा कभी इस गाँव की पहली आत्मा हुआ करती थी।

⇒ मौत के बाद भी उसे मोक्ष नही मिला , तब से वह हर पीढ़ी में एक नई चुड़ैल चुनती थी। दोनों मिलकर मौत के आने वाले नाम लिखती थी।

⇒ लेकिन असली सच्चाई यह थी कि वे किसी को मार नही रही थी। वे केवल मौत की सूची लिखने में मजबूर थी। वह खुद भी इस श्राप की कैदी थी।

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भावना के कमरे में क्यों आई वह चीज ?

⇒ उसी रात भावना के कमरे मे कुछ आया । पहले खिड़की पर खरोंचों की आवाज आई । खर्ररर…. खर्ररर……।

⇒ फिर अलमारी अपने आप खुल गई । फिर कमरे के कोने में रखी गुड़िया ने अपना सिर हिलाया । भावना बहुत ज्यादा ही डर गई।

⇒ तभी उसने बिस्तर के नीचे से किसी के रेंगने की आवाज सुनी। धीरे – धीरे एक काला हाथ बाहर आया। फिर दूसरा ।

⇒ फिर सफेद बालों वाला एक चेहरा अंधेरे से बाहर आया वह वही बिना आँखों वाली औरत थी। उसने मुस्कुराकर कहा – सातवीं रात को मैं तुम्हें लेने आऊँगी …. और अगले ही पल गायब  हो गई ।

सातवीं रात का भयानक आतंक 

⇒ सातवीं रात पूरे गाँव मे कुत्ते लगातार रो रहे थे , आसमान मे बादल थे लेकिन बजली केवल मंदिर के ऊपर चमक रही थी। भावना नींद में उठी और मंदिर की ओर चलने लगी।

⇒ उसकी आंखे खुली थी लेकिन वह होश में नही थी। राघव उसके पीछे दौड़ा ।

⇒ मंदिर के नीचे बने पुराने तहखाने में  पहुंचते ही उसने यह दृश्य देखा ,,, जो वह जिंदगी भर नही भूल सकता था। सैकड़ों धुंधली आकृतियाँ अंधेरे में खड़ी थी।

⇒ वह सभी आत्माएं थी जिनके नाम उन पर्चियों पर लिखे थे । उनकी फुसफुसाहट पूरे तहखाने में गूंज रही थी।

⇒ ऐसा लग रहा था जैसे हजारों मरे हुए लोग , एक साथ कुछ बोल रहे हों।

मोक्ष की घंटी 

⇒ तहखाने के बीचों बीच सविता और वह पुरनी आत्मा एक साथ खड़ी थी । पहली बार दोनों के चेहरे पर डर नही बल्कि थकान थी ।

⇒ आत्मा बोली – हमने सदियों तक इंतजार क्या है…. सविता की आँखों से आँसू बह निकले । उसने कहा – हमे इस श्राप से मुक्त कर दो।

⇒ तभी चारों ओर से भयानक चीखे उठने लगी। दीवारों से काला धुआँ निकलने लगा। जमीन फटने लगी । भावना बेहोश होकर गिर गई ।

⇒ राघव दौड़कर उस प्राचीन घंटी तक पहुँचा और अपनी पुरी ताकत से वह घंटी बजाने लगा टनन……. !

⇒ इतनी भयानक आवाज गूंजी की पूरा तहखाना कांप उठा । काला धुआँ आग की तरह जलने लगा। सदियों पुरानी आत्माये मुस्कुराने लगी।

⇒ सविता ने पहलइ बार चैन की साँस ली , दोनों के शरीर प्रकाश में बदलने लगे । जाते – जाते आत्मा ने कहा – धन्यवाद अब हमारी गिनती खत्म हुई।

⇒ और अगले ही क्षण में दोनों हमेशा के लिए गायब हो गई।

अंतिम अध्याय : आखिरी पर्ची 

⇒ गाँव में सब कुछ पहले जैसा हो गया । मौतों का सिलसिला रुक गया । रात दो बजे घंटी बजना भी बंद हो गया लोगों ने समझा कि कहानी खत्म हो चुकी है ।

⇒ लेकिन एक महीने के बाद मंदिर के सफाई के वक्त एक बंद दीवार के पीछे एक छोटा कमरे मिला । वहाँ केवल एक पर्ची रखी हुई थी।

⇒ वह बाकी सब पर्चियों से अलग थी उस पर कोई नही लिखा था बस एक वाक्य लिखा था कि जब लोग हमे भूल जाएंगे गिनती फिर शुरू होगी,।

⇒ उसी रात गाँव के बच्चे ने दावा किया कि मंदिर के अंदर एक बूढ़ी औरत बैठी देखा है। लेकिन जब वहाँ लोग पहुंचे तो मंदिर खाली था । केवल घंटी धीरे – धीरे  हिल रही  थी।

⇒ टन … टन …… टन ……। जबकि उसे छूने वाला वहाँ कोई नही था ।

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