अरबपति का बेटा ड्राइवर क्यों बना ? ड्राइवर या अरबपति भाग 3 ? Mystery Of a Billionaires Son ।

अरबपति का बेटा ड्राइवर क्यों बना ? ड्राइवर या अरबपति भाग 3 ? Mystery Of a Billionaires Son । Hndirama.com

Driver Or Billionaires • ड्राइवर या अरबपति भाग 2 में आपने पढ़ा कि रिया कपूर जो काव्या के काम से बेहद चिड़ती थीं ।

कि कैसे काव्या नें इतनी बड़ी कंपनी को संभाल लिया । क्योंकि काव्या नें कुछ ही महीनों में कंपनी वालों का दिल जीत लिया था ।

दूसरी तरफ विराज जो काव्या की नजर में एक ड्राइवर था उसने उसे एक बड़े होटल में पार्टी दी । 

और क्यों डर गया विराज को देखकर होटल का मालिक ? कैसे बचाया विराज नें काव्या को रिया कपूर के जाल से ?

अब पढ़िए ड्राइवर या अरबपति भाग 3 और अंतिम भाग , Full Interesting Story जो आपके दिल को छु लेगी । 〈 Mystery Of a Billionaires Son 〉  

       क्या विराज की खुलेगी सच्चाई और मिलेगा दोनों का प्यार ? Mystery Of a Billionaires Son 

 खराब होती कंपनी का माहौल पहले से काफी बेहतर हो चुका था। काव्या अब मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज की सबसे जाने – माने अधिकारियों में गिनी जाने लगी।

 हरिशंकर त्रिपाठी भी उसकी मेहनत और ईमानदारी से बहुत  प्रभावित थे।

वहीं दूसरी तरफ रिया कपूर काव्या से अब भी उतनी ही नफरत कर रही थी। काव्या ने उसे उसकी गलती की माफी तो दे दी थी ।

लेकिन रिया को वह माफी नही अपनी हार लग रही थी ।

एक सुबह कंपनी की बड़ी मीटिंग बुलाई गई । हरिशंकर त्रिपाठी ने घोषणा की कि कंपनी का एक महत्वपूर्ण इंटरनेशनल प्रोजेक्ट दुबई में शुरू होने वाला है।

इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी काव्या को सौपी गई है।

यह सुनकर पूरा कॉन्फ्रेंस हॉल तालियों से गूंज उठा, काव्या के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी ।

यह उसके जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था । लेकिन मीटिंग खत्म होते ही विराज के चेहरे पर चिंता नजर आने लगी।

शाम को जब विराज काव्या को घर छोड़ने जा रहा था , तब काव्या ने मुसकुराते हुए कहा, तुम मेरे लिए खुश नही हो क्या ?

विराज ने हल्की मुस्कान दी। , लेकिन कुछ बोला नही । टब काव्या ने कहा, मुझे दुबई जाने से मत रोकना ।

मैं यह मौका खोना नही चाहती । विराज कुछ देर खामोश रहा फिर बोला ठीक है, लेकिन अपना ख्याल रखना।

काव्या ने हँसते हुए कहा, तुम भी चलो ना, विराज यह सुनकर चौक गया ।

उसी रात विराज ने हरिशंकर को फोन किया । उसने कहा की उसकी और काव्या की फ्लाइट अलग – अलग होनी चाहिए ।

और होटल भी अलग बुक होने चाहिए । हरिशंकर त्रिपाठी समझ गए विराज अभी भी अपनी असली पहचान छिपाना चाहते हैं।

उन्होंने तुरंत सारी व्यवस्था कर दी। काव्या को यह बात थोड़ी अजीब लगी, लेकिन उसने ज्यादा सवाल नही किया ।

रिया कपूर का दुबई में शुरू हुआ खेल 

कुछ दिनों बाद पूरी टीम दुबई पहुँच गई। कांच की ऊँची – ऊँची इमारतें , चमकती सड़कें और शानदार होटल देखकर काव्या बेहद खुश थी।

वह पहली बार विदेश आई थी।

कंपनी की मीटिंग बहुत अच्छी चल रही थी। हरिशंकर त्रिपाठी बार – बार उसकी तारीफ कर रहे थे । लेकिन रिया कपूर उससे बहुत नफरत कर रही थी।

बल्कि बाकी लोगो के चेहरे पर मुस्कान थी ।

रिया ने मन ही मन ठान लिया कि काव्य को इस बार वह ऐसा नुकसान पहुंचाएगी , जिससे वह खुद को संभाल भी नही सकेगी।

उसने कुछ लोगो से संपर्क किया और खतरनाक योजना बनाई ।

योजना यह थी काव्या को एक नकली बिजनेस के सिलसिले में सुनसान जगह बुलाया जाए, अगले दिन शाम को रिया ने काव्या से कहा, एक बड़ा क्लाइंट तुमसे अकेले में मिलना चाहता है।

अगर वह डील फाइनल हो गई तो कंपनी को बड़ा फायदा होगा । काव्या ने बिना शक किये हामी भर दी । उसे नहीं  पता था कि वह एक जाल में फँसने जा रही है।

तय समय पर काव्या एक सुनसान इंद्रस्ट्रीयल इलाके में पहुंची। वहाँ एक पुरानी बिल्डिंग थी। जैसे ही वह एण्ड गई, पीछे का दरवाजा बंद हो गया।


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  अरबपति का बेटा ड्राइवर क्यों बना ? ड्राइवर या अरबपति ( भाग 1 ) । Mystery Of A Billionaires Son । Hindirama.com


चारों तरफ अँधेरा और सन्नाटा था। काव्या घबरा गई। तभी ऊपर से ताली बजने की आवाज आई। रिया कपूर सामने आई और उसके पीछे दो खतरनाक गुंडे खड़े थे।

तुम ? काव्या ने हैरानी से पुछा ।

रिया हंसने लगी । हाँ मैं । तुमने मेर जिंदगी बर्बाद कर दी। अब तुम्हारी बारी है।

काव्या समझ चुकी थी कि यह कोई साधारण मजाक नही था। उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई देने लगा।

अचानक विराज का तूफ़ानी आगमन 

उसी समय विराज को उसकी निजी सुरक्षा प्रणाली से अलर्ट मिला। काव्या का लोकेशन सिग्नल अचानक गायब हो गया, विराज का दिल जोर से धड़कने लगा ।

उसे तुरंत महसूस हो गया कि कुछ गलत हुआ है।

उसने बिना समय गवाये अपने सिक्योरिटी टीम को बोला जांच के लिये और खुद प्राइवेट जेट से दुबई निकल गया ।

कुछ घंटों बाद उसका विमान दुबई के एयरपोर्ट पर पहुँचा वहाँ से वह सीधे उस लोकेशन से वहाँ तक गया जहाँ आखिरी बार काव्या का लोकेशन मिल रहा था।

बिल्डिंग के बाहर पहुंचते ही उसे समझ आ गया कि मामला कुछ गंभीर है।

उसने अपनी सिक्योरिटी टीम को चारों तरफ रहने को बोला, और खुद अंदर चला गया। जैसे ही वह अंदर गया उसके सामने दो गुंडे आ गये।

उन्होंने विराज का रास्ता रोक लिया और एक गुंडे ने हमला कर दिया। लेकिन उसने गुंडे का हाथ पकड़कर मोड दिया और उसको जमीन पर गिरा दिया।

दूसरा गुंडा पीछे से आया उसको भी विराज ने मुक्का मारा तो, वह दूर जा गिरा।

कुछ घंटों तक वहाँ लड़ाई मार – पीट चलती रही , कांच टूटे , कुर्सियाँ बिखर गई और पूरे हॉल में सब कुछ फैल गया।

आखिरकर उसने उन गुंडों को इतना मारा कि वह उठने में भी असमर्थ थे। उन्होंने पूरे इलाके को घेर लिया।

रिया यह सब देखकर बहुत डर गयी उसने सोचा कि साधारण ड्राइवर के पास इतनी ताकत और इतनी बड़ी सिक्योरिटी टीम कहाँ से आई।

विराज नही विराज मल्होत्रा, अब सच आया समाने   

काव्या भी हैरान रह गई , उसने पहली बार विराज को इस रूप में देखा था । वह धीरे – धीरे उसके पास गयी और बोली — आखिर तुम हो कौन ?

पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया । वीराज ने लंबी सांस ली। अब सच छिपाने का कोई मतलब नहीं था ।

मैं व्रज मल्होत्रा हूँ । मल्होत्रा ग्लोबल इंडस्ट्रीज का मालिक !

यह सुनकर काव्या की आंखे खुली की खुली रह गई। उसे लगा समय रुक गया हो।

जिस इंसान को वह आज तक एक साधारण ड्राइवर समझती रही, वह इतने बड़े कंपनी का मालिक है। उसके मन में गुस्सा भी था, हैरान भी और कहीं न कहीं सकून भी था।

पुलिस को बुलाया गया और रिया की सारी सच्चाई सामने आई उसका रचा हुआ सारा खेल सबके सामने आया।

उसे गिरफ़्तार कर लिया गया बाद में कोर्ट में सबके सामने उसे जेल की सजा सुनाई गयी।

विराज और काव्या का मिला प्यार     

मुंबई लौटने के बाद काव्या और विराज के बीच बहुत दिन तक कम बात हुई। काव्या को सबसे बडा दुख यह था कि विराज ने उससे सच्चाई छिपाई ।

लेकिन दूसरी तरफ वह यह भी जानती थी कि उसकी माँ का इलाज और उसकी जॉब और उसकी हर मुश्किलों में साथ खड़ा रहने वाला वही था।

एक शाम विराज ने उसे समुद्र किनारे मिलने बुलाया। आसमान में डूबते सूरज की लालिमा फैली हुई थी। समुद्र की लहरे लगातार किनारे से टकरा रही थी ।

विराज और काव्या कुछ देर दोनों खामोश खड़े रहे । फिर विराज बोला , मैंने तुमसे झूठ नही बोला था, बस सच छिपाया था।

क्योंकि मैं जानना चाहता था कि कोई मुझे मेरे पैसों से मेरे पास ना आए , मेरे दिल से पहचाने। काव्या की आँखों में आँसू थे।

अगर मैं तुम्हें सिर्फ ड्राइवर समझ कर सम्मान दे सकती हूँ तो  क्या तुम्हें नही लगता कि , तुम्हारा सच जानने के बाद भी स्वीकार करती ?

यह सुनकर विराज की आंखे नम हो गई। उसने पहली बार काव्या का हाथ अपने हाथ में लिया और कहा, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ।

शायद उस दिन से जिस दिन तुम अपनी माँ के लिए रो रही थी। और खुद से ज्यादा उनकी चिंता कर रही थी।  


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काव्या मुस्कुराई उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, उसने धीरे से अपने सिर विराज के कंधे पर रख दिया,, यही उसका जवाब था ।

दूर खड़े राजेश मल्होत्रा यह सब कुछ देख रहे थे। उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे। उन्हे आखिर वह लड़की मिल गई जो उनके बेटे से प्यार करती थी ना कि उसके दौलत से।

कुछ महीनों बाद परिवार और कंपनी के कर्मचारियों के मौजूदगी में विराज और काव्या की सगाई हुई।

हरिशंकर त्रिपाठी की आँखों में गर्व था। काव्या की माँ की आखों में खुशी थी। और विराज के चेहरे पर वह सुकून था । 

जो सुकून उसे अपने अरबपति पिता के घर में भी नहीं मिली । 

अब विराज काव्या जैसी अच्छी और संस्कारी लड़की को पा चुका था । उसके जीवन में अब ठहराव और पूरा सुकून था । 

काव्या भी विराज को पाकर बहुत खुश थीं । क्योंकि विराज इतना अमीर होकर भी , बिल्कुल सरल जीवन जीता था । 

विराज बहुत अच्छा लड़का था । अब दोनों का प्यार मिल चुका था । आखिर विराज के पिता को भी एक अच्छी संस्कारी बहु मिल गई । 

और सबसे बड़ी बात उसका बेटा अब घर छोड़कर नहीं भागेगा क्योंकि काव्या जो उसकी जिंदगी में आ चुकी थी । उसे संभालने वाली । 

समाप्त  Mystery Of a Billionaires Son  

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