आधी रात में खिड़की पर खड़ी थीं चुड़ैल ? कौन था मौत से भी भयानक ? Horror Story In Hindi ।

आधी रात में खिड़की पर खड़ी थीं चुड़ैल ? कौन था मौत से भी भयानक ? Horror Story In Hindi । Hindirama.com

डरावनी कहानी •  जंगल में गूँजती पायल : एक बहुत ही भयानक पिशाज और बहुत सारे प्रेतों की हैं । इस कहानी में देवा जो यमलोक का यमदूत था ।

उसे इस गाँव में इन सभी प्रेत व  पिशाजों  से गाँव वालों की रक्षा के लिए भेजा था । 

लेकिन देवा का एक दोस्त था जो अभी भी यमदूत था और वह देवा की मदद के लिए धरती पर आता था ।

जंगल में इतने ज्यादा भयानक और खतरनाक पिशाज रहते हैं जो हर अमावस्या को किसी ना किसी गाँव के इंसान को ले जाते और उसे मार देते थें ।

और एक भयानक पायल वाली आत्मा , जिसने सभी गाँव वालों को भय से भी खतरनाक मौत देती थीं । 

अब क्या देवा और वह यमदूत क्या गाँव वालों को बचा पाएंगे ? पढ़िए पूरी कहानी                   

आधी रात को खिड़की के बाहर कौन खड़ा था ? Horror Story In Hindi

कालीखोह गाँव के लोग रात होने से पहले ही अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे। सूरज ढलते ही पूरे गाँव में अजीब सा डर फैल जाता था।

कोई भी अकेले बाहर निकलने की हिम्मत नही करता था ।

गाँव के पास एक घना और पुराना जंगल था। उस जंगल के बारे में कहा जाता था की वहाँ रात में इंसान नही, बल्कि भटकी हुई आत्माएं घूमती हैं।

कई लोग जंगल में गए लेकिन कभी वापस नही लौटे ।

एक रात गाँव का एक आदमी अपनी खिड़की के पास बैठा था। अचानक उसे दूर जंगल की तरफ एक और दिखायी दी।

वह सफेद कपड़ों में खड़ी थी और बिल्कुल हिल नही रही थी।

आदमी ने ध्यान से देखा तो उसकी रूह कांप गई , उस औरत के पैरों में पायल थी। दूर से उसकी आवाज सुनाई दे रही थी।

छम – छम – छम। इतनी भयानक आवाज । छम छम की आवाज के बारे में उसने सिर्फ कहनियों में ही सुना था । 

मगर आज तो समाने ही भूतनी थीं ।  

अब अचानक वह औरत उसके तरफ धीरे – धीरे बढ़ने लगी। आदमी बहुत ज्यादा डर गया और उसने अपने घर की खिड़की बंद कर ली।

अगली सुबह वह आदमी अपने घर में नही मिला उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था।

लेकिन वह आदमी ना जाने कहाँ गायब हो गया था ?

बस बर्फ पर कीचड़ भरे पैरों के निशान दिखाई दे रहे थे । जो जंगल की ओर जाता है।,

पूरे कालीखोह गाँव में फैला मौत का डर 

उस घटना के बाद पुरे गाँव मे डर से भी ज्यादा भयानक डर वाला माहौल था । हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी।

कि लगता हैं , काली पायल वाली भूतनी वापस आ गई।

गाँव के कुछ बुजुर्ग बताते हैं कि कई साल पहले जंगल के किनारे बहुत आग लग गई थी। उस आग में कई घर जल गए थे।

कुछ लोग जिंदा ही जले थे।

चीख कई दिनों तक गाँव वालों के कानों में गूँजती रही।

लेकिन सबसे दर्दनाक मौत एक औरत की हुई थी

वह अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन खुद ही आग में फंस गई।

उसकी मौत के बाद से जंगल में पायल की आवाज सुनाई देती थी।

लोग उसको काली पायल वाली भूतनी कहने लगे ।

गाँव के देवा को आने लगे भयानक सपने  

उस गाँव में देवा नाम का एक लड़का रहता था।

देवा बाकी लोगो से अलग था , उसे बचपन से ही सपने आते थे।

 सपनों में वह एक बहुत बड़े काले दरवाजे को देखता हैं।

दरवाजे के सामने लंबा काला एक साया खड़ा रहता था।

वह साया हर बार एक ही बात कहता था, देवा समय आने वाला हैं।

लेकिन उसके बाद सपना टूट जाता  था । देवा को कभी समझ नही आया कि वह कौन है? और उससे क्या कहना चाहता हैं  ?

बंद पड़ा मंदिर और हजारों साल पुरानी किसकी तस्वीर ?

एक दिन देवा बंसी और सिवा तीनों गाँव के एक पुराने मंदिर  में पहुंचे , सिया ने मंदिर के दीवार पर बनी एक तस्वीर देखी ।

तस्वीर देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई,

तस्वीर में बिल्कुल देवा जैसा एक युवक था।


नौकरानी की बेटी के साथ क्या हुआ ?    

यह कहानी भी पढ़ें .. 

अमावस्या की भयानक चुड़ैल । राजा नें नौकरानी की बेटी के साथ क्या किया ? The Haunted Mystery Of Yamini । Hindirama.com


वही चेहरा, वहीं आंखे, वही रूप।

लेकिन तस्वीर हजारों साल पुरानी लगरही थी।

देवा भी हैरान रह गया।

उसे समझ नही आया कि उसका चेहरा इतने पुराने मंदिर में कैसे हो सकता हैं।

गाँव के जंगल का जला हुआ कुआं     

मंदिर के पीछे एक पुराना कुआं था कुएं के चारों तरफ जले हुए पत्थर पड़े थे ।

गाँव वाले उस जगह को अभिशप्त मानते थे।

जैसे ही तीनों वहाँ  पहुंचे , कुएं के अंदर से किसी औरत के रोने की आवाज आने लगी।

आवाज इतनी दर्द भरी थी कि सिया की आँखों में आँसू आ गए।

तभी कुएं के अंदर से काला धुआँ निकलने लगा। धीरे – धीरे ने एक इंसान का रूप ले लिया ।

उसकी आंखे लाल थी। उसका मुहँ खून से भरा था।

वह था रत्ननेत्र पिशाच । उसे देखते ही बंसी डर के मारे पीछे गिर पड़ा।

यमदूत का देवा के लिए अधूरा संदेश 

उसी रात अचानक देवा के कमरे में ठंडी हवा भर गई। दीवारों पर काली परछाईयां घूमने लगी।

तभी कमरे के बीचोंबीच एक विशाल साया दिखाई दिया।

वह कालकेतु था। यमलोक का दूत।

और देवा का हजारों साल पुराना मित्र ।

कालकेतु ने देवा को देखते ही कहा, तुम्हें अपना अतीत याद करना होगा ।

देवा हैरान था। कालकेतु ने हाथ बढ़ाया।

अचानक देवा की आँखों के सामने अजीब दृश्य आने लगा।

उसे याद आने लगा कि वह कभी यमलोक में रहता था।

वह कोई साधारण इंसान नही था, वह यमराज का रक्षक था।

जंगल में केवल एक पिशाज नहीं बल्कि कई प्रेतों का झुंड हैं ? 

कालकेतु ने देवा को बताया कि जंगल में केवल एक भूतनी नही हैं।

वहाँ पूरी मौत की सेना छिपी हुई है। उस सेना का राजा था अग्नि पिशाच ।

उसके साथ कंकाल भैरव , धूमछाया , रुदन प्रेत, शवरक्षक और मृतछाया जैसे भयानक प्रेत थे।

लेकिन सबसे बड़ा रहस्य अभी बाकी था ।

कालकेतु ने बताया कि काली पायल वाली भूतनी असल में बुरी नही थी।

उसे भी अग्नि पिशाच ने अपने वश में कर रखा था।

वह खुद भी मुक्ति चाहती थी।

छम – छम करती मौत से भी खतरनाक क्या ?

कुछ दिनों बाद वह रात आ गई जिसका गाँव वालों को वर्षों से डर था।

आसमान पूरी तरह काला था। हवा में सड़न की बदबू फैली हुई थी।

अचानक पूरे गाँव में पायल की आवाज गूंजने लगी। छम- छम- छम।

इस बार आवाज एक नहीं, सैकड़ों पायलों की थी ।

गाँव वालों ने खिड़कियों से झांक कर देखा तो उनकी रूह कांप उठी।

गाँव की गलियों में जले हुए लोगो के जुलूस निकल रहे थे।

उनकी आँखों में लाल चमक थी। उनकी शरीर से धुआँ निकल रहे थे।

और सबसे आगे काली पायल वाली भूतनी चल रही थी।

देवा को कैसे मिली यमलोक की शक्ति    

कलकेतु ने देवा को उसकी खोई हुई शक्ति लौटा दी। अचानक उसके शरीर के चारों तरफ तेज रोशनी फैल गई।

अब वह आत्माओ को साफ देख सकता था।


कैसे गया एक बकरी वाला रहस्यमयी दुनियाँ में ? 

यह कहानी भी पढ़ें..  

जंगल में मिला एक रहस्यमयी दरवाजा । दूसरी दुनिया - भाग 1 । Mystery Door In The Jungle ।


उनकी आवाज सुन सकता था। और उनसे लड भी सकता था।

देवा समझ गया कि अब अंतिम समय आ चुका है।

जलती राख का भयानक दैत्य   

अचानक जंगल की जमीन फटने लगी। चारों तरफ आग फैल गई। धरती के अंदर से एक विशाल काला दैत्य बाहर निकला, ।

उसकी आंखे आग की तरह जल रही थी। उसका शरीर जलती हुई राख से बना था।

वही था अग्नि पिशाच । वही इस सारे आतंक का असली कारण था। उसकी एक गर्जना से पूरे गाँव की धरती कांप उठी।

गाँव वालों के लिए अंतिम युद्ध और देवा का बलिदान     

देवा अकेला अग्नि पिशाच के सामने खड़ा था। बंसी और सिया भी उसके साथ थे।

लेकिन यह लड़ाई साधारण नही थी।

यह अच्छाई और बुराई की अंतिम लड़ाई थी। कई घंटों तक भयानक संघर्ष चलता रहा।

आखिर में देवा समझ गया कि इस बुराई को खत्म करने के लिए उसे अपनी सारी शक्ति देनी होगी।

उसने अपनी शक्ति एक चमकते हुए प्रकाश में बदल दी ।

पूरा जंगल रोशनी से भर गया। अग्नि पिशाच दर्द से चीख उठा।

कंकाल भैरव , धूमछाया , शवभक्षक और बाकी सभी प्रेत राख बनकर बिखर गए।

काली पायल वाली भूतनी की आँखों से आँसू बहने लगे। वर्षों बाद उसे मुक्ति मिल  गई।

लेकिन उसी पल देवा जमीन पर गिर पड़ा।

उसकी साँसे रुक चुकी थी ।

फिर यमलोक का खोया हुआ रक्षक देवा वापस लौटा  

बंसी और सिया रोने लगे। पूरा गाँव रो रहा था।

तभी आसमान में तेज प्रकाश दिखाई पड़ा। उस प्रकाश के बीच कालकेतु खड़ा था।

उसके साथ देवा भी था। लेकिन अब वह इंसान नही था।

वह फिर से यमलोक का रक्षक बन चुका था। देवा ने मुस्कुराकर कहा

मैं गया नही हूँ, जब भी अँधेरा बढ़ेगा ,जब भी किसी को मदद की जरुरत होगी मैं फिर लौटूँगा।

इतना कहकर देवा और कालकेतु आकाश की ओर बढ़ने लगे।

कुछ क्षणों बाद दोनों चमकती रोशनी में गायब हो गए। उस रात के बाद कालीखोह गाँव में कभी पायल की छम- छम नही सुनाई दी ।

लेकिन आज भी कुछ लोग दावा करते हैं कि घने जंगल के ऊपर कभी – कभी दो चमकते हुए साये दिखाई देते हैं।

गाँव वाले मानते हैं कि वे देवा और कालकेतु हैं।

जो आज भी लोगो के लिए अंधेरे से लड़ रहे हैं । यह डरावनी कहानी यहीं पर समाप्त होती हैं । 

ऐसी ही भयानक कहानी पढ़ने के लिए हमारी website …. Hindirama.com को फॉलो जरूर करें ।    

Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top