कॉन्ट्रैक्ट वाली दुल्हन : एक अरबपति लड़की जिसका नाम नंदिनी सिंघानिया हैं । वह भरे मंडप से शादी छोड़कर आधी रात में ही क्यों भागी ?
क्या उस अमीर लड़की को वह दूल्हा पसंद नहीं था ?
या उसकी शादी जबरदस्ती उसके बिना पूछे ही करवा रहे थे । और फिर एक चाय वाले से नंदिनी ने एक साल के लिए शादी क्यों की ?
पढ़िए पूरी Mysterious & Shocking स्टोरी । कॉन्ट्रैक्ट वाली दुल्हन
मंडप से क्यों भागी अरबपति दुल्हन । Contract Bride Marriage Story
वह रात का अँधेरा बढ़ते ही जा रहा था, और पूरे शहर पर अपना कब्जा जम रहा था, लेकिन सिंघानिया महल में रात नही जैसे कोई त्यौहार उतर आया था।
हजारों रंग – बिरंगी लाइटें महल की दीवारों पर चमक रही थी ।
बाहर खड़ी महंगी महंगी गाड़ियों की लंबी कतार देखकर कोई भी समझ सकता था कि आज किसी बहुत बड़े घर की शादी है।
यह कोई साधारण लड़की की शादी नही थी, यह शादी अरबों की संपत्ति की इकलौती वारिस नंदिनी सिंघानिया की थी।
सभी मेहमान हंस रहे थे । जोर – शोर नाच रहे थे, गा रहे थे बधाईयां दे रहे थे, किसी को इस बात की खबर तक नहीं थी।
कि बहुत जल्द कुछ ऐसा होने जा रहा था, कि जो किसी की जान भी ले सकता है।
महल के सबसे ऊपरी हिस्से में बने एक भव्य कमरे में नंदिनी दुल्हन के जोड़े में बैठी थी, लाल रंग का लहंगा था ।
गले में हीरो के हार थे, हाथों में कंगन और माथे पर चमकता हुआ टीका ।
देखने वाला यही कहता कि लड़की दुनिया की सबसे खुशकिस्मत दुल्हन होगी। लेकिन उसकी सच्चाई बिल्कुल उसके उल्टी थी। नंदिनी की आँखों में खुशी नही डर था ।
वह बार – बार कमरे की खिड़की से बाहर देख रही थी। उसका दिल अजीब बेचैनी से भरा हुआ था।
पिछले कुछ महीनों से उसके जीवन में सब कुछ बहुत तेजी से बदलाव हो रहे थे।
और इसकी शुरुआत हुयी थी उसके पिता की मृत्यु से।
नंदिनी के पिता राजवीर सिंघानिया की आखिरी इच्छा
नंदिनी के पिता का नाम राजवीर सिंघानिया था। देश के सबसे बड़े उद्योगपतियो में से एक माने जाते थे ।
राजवीर सिंघानिया आपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे, नंदिनी उनकी इकलौट संतान थी।
जब नंदिनी सिर्फ पंद्रह साल की थी, तब एक दुर्घटना में उसकी माँ की मौत हो गई थी।
उस दिन के बाद राजवीर ने माँ और पिता दोनों का प्यार उसको अकेले दिया । लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था ।
तीन साल बाद राजवीर एक गंभीर बीमारी से ग्रसित हो गए। उनकी तबीयत दिन व दिन बिगड़ रही थी।
मौत से कुछ दिन पहले उन्होंने अपने छोटे भाई महावीर सिंघानिया को अपने कमरे मे बुलाया ।
महावीर उस समय दुनिया की नज़रों मे एक जिम्मेदार और ईमानदार भाई कहलाता था।
राजवीर ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, — महावीर अगर मुझे कुछ हो जाए तो, मेरी बेटी का हमेशा ध्यान रखना ।
मेरे बाद वही मेरी पूरी दुनिया है। महावीर ने झूठी नं आँखों से सिर हिला दिया।
उसी दिन राजवीर ने अपने जायदात की वसीयत भी तैयार करवाए। उसमे लिखा था उनकी सारी संपत्ति नंदिनी की होगी। लेकिन एक शर्त थी।
जब नंदिनी अठारह साल की हो जाएगी , तो उसकी शादी जिस भी लड़के के साथ होगी, वह लड़का भी इस वसीयत का आधा हकदार होगा। उस समय किसी को इस शर्त का महत्व समझ नही आया।
लेकिन महावीर के दिमाग में उसी समय लालच का बीज बोया जा चुका था। कुछ दिनों बाद राजवीर की मौत हो गई।
और नंदिनी की दुनिया हमेशा के लिए बदल गई।
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राजवीर सिंघानिया की मौत के बाद महावीर की खतरनाक साजिश
राजवीर की मौत के बाद महावीर उसका अभिभावक बन गया। शुरु मे उसने बहुत प्यार दिखाया ।
वह हर किसी के सामने ऐसे रहता मानो नंदिनी की कितनी प्रवाह करता है। लेकिन अंदर ही अंदर वह सिर्फ एक चीज चाहता था।
सिंघानीया साम्राज्य अरबों नही खरबों की संपत्ति। अगर यह सारी संपत्ति मुझे मिल जाए तो ?
महावीर जानता था कि अगर नंदिनी की शादी उसके किसी भरोसेमंद व्यक्ति से हो जाए तो संपत्ति पर सिर्फ उसका नियंत्रण होगा।
इसी बीच उसकी मुलाकात हुई रौनक कपूर से । रौनक दिखने में स्मार्ट था, लेकिन अंदर से बहुत ज़्याद लालची लड़का था।
दोनों ने मिलकर ऐसी योजना बनाई, जो सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। पहले नंदिनी की शादी रौनक से करवाई जाएगी।
शादी के बाद आधा हिस्सा रौनक के नाम होगा, और फिर नंदिनी को रास्ते से हटा दिया जाएगा।
ताकि पुरी दौलत पर उनका कब्जा बन सके । यह योजना महीनों तक के लिए छुपा के रखी गई।
नंदिनी को इस बारे में कुछ भी नहीं पता था। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
महावीर की बेटी खुशी ने सुन ली सच्चाई
शादी के एक दिन पहले की बात थी, महल के हिस्से में महावीर और रौनक बंद कमरे में बात कर रहे थे।
उन्हे बिल्कुल भी अंदाजा नही था की कमरे के बाहर कोई खड़ा है । वह थी महावीर की अपनी बेटी खुशी ।
खुशी पानी लेने जा रही थी, जब उसने अपने पिता और रौनक की आवाज सुनी। पहले तो वह आगे बढ़ गई।
लेकिन फिर एक एसे वाक्य थे जो उसके कदम रोक दिये।
शादी के बाद लड़की ज्यादा तक नही बचनी चाहिए। खुशी का दिल धडक उठा।
उसने धीरे से दरवाजे के पास जाकर सुनना शुरु किया। जो कुछ उसने सुना, उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसके पिता किसी और के नही बल्कि नंदिनी के मौत की साजिश कर रहे थे ।
खुशी पुरी रात सो नही पाई। और आखिरी में उसने फैसला कर लिया। चाहे कुछ भी हो जाये वह नंदिनी को बचाएगी।
खुशी नें सब बताया नंदिनी को । और फिर भाग गई नंदिनी
शादी वाले दिन पूरा महल उत्सव मे डूबा हुआ था। बारात आ चुकी थी ढोल – नगाड़े की आवाज आसमान तक गूंज रही थी।
नीचे सब लोग खुश थे, ऊपर नंदिनी की जिंदगी बिखर रही थी।
खुशी दौड़ती हुई उसके कमरे तक आयी, और नंदिनी को उसने सारी सच्चायी बता दी। नंदिनी का चेहरा सफेद पड़ गया।
उसे विश्वास नही हुआ, कि उसके चाचा उसके साथ ऐसा करेंगे।
लेकिन खुशी झूठ तो नही बोल सकती। अब फैसला करने का समय आ गया था, और उसने अंत मे फैसला कर ही लिया था।
वह भागेगी। कुछ समय नंदिनी को जैसे ही मौका मिला वह महल के पीछे वाले रास्ते से भाग गई।
किसी ने उसे देखा नही, ना ही रोका । लेकिन उसको पता नही था की उसके जीवन सबसे खतरनाक पड़ाव अब शूरु हुआ है।
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अंधेरी सड़क और चारों तरफ मौत डर
नंदिनी लगातार भागती जा रह थी, उसके पैरों मे दर्द होने लगा। भारी लहंगा उसकी रफ्तार कम कर रहा था। लेकिन वह रुकने की हिम्मत नही कर पा रह थी।
उसके कानों में बार – बार खुशी की आवाज गूंज रही थी अगर नहीं भागी तो ये लोग मार देंगे तुमको।
धीरे – धीरे शहर का भीड़ – भाड़ वाला इलाका पीछे छूट चुका था। सामने सुनसान सड़के थी। अँधेरा बहुत ज्यादा था। सन्नाटा चारों ओर था। और डर था।
अचानक उसको यह लगा की कोई उसका पीछा कर रहा जब उसने पीछे मूड कर देखा, तो तीन परछाईयां उसके पीछे आ रही थी।
नंदिनी का दिल बैठ गया। उसने दौड़ने की कोशिश की लेकिन थकी हुई टांगों से वह दौड़ ना सकी।
कुछ ही सेकेंड में तीनों उसके सामने आ गए। उनकी आँखों में ऐसी नियत थी जिसे देखकर कोई भी डर जाए।
एक आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया । दूसरे ने उसका लहंगा खीचा तीसरा हंसने लगा।
नंदिनी बहुत डर गयी थी। उसने पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन वे तीन थे और वह अकेली कैसे करती खुद की सुरक्षा।
उसने बहुत आवाज लगाई बचाओ बचाओ बचाओ। मगर किसी ने उसकी आवाज नही सुनी ।
उसकी आवाज सुनसान सड़क पर गूंज रही थी। उसे लगा की शायद अब कोई आ जाएगा। लेकिन कोई नही आया ।
शायद अब उसकी कहानी यहीं खत्म हो जाएगी । तभी अंधेरे में किसी के आने की आवाज आई ।
पहले धीमी फिर तेज अचानक से एक गुस्से वाली आवाज गूंज उठी।
उसे छोड़ दो। तीनों आदमी चौंककर पीछे देखने लगे। और वही खड़ा था एक नौजवान साधारण कपड़ों में । साधारण चेहरा । लेकिन आँखों में आग।
उसका नाम था जीत। जीत पास की चाय की दुकान बंद कर रहा था, तभी उसकी कानों में नंदिनी की आवाज आयी।
उसने बिना कुछ सोचे -समझे भागा वहाँ से और नंदिनी के पास आया। तीनों आदमी हंस रहे थे ।
लेकिन जीत के चेहरे पर डर नही था। अगले कुछ मिनटों में वहाँ कुछ अलग हुआ । जो उन गुंडो ने सोचा भी नही होगा।
जीत उन पर टूट पड़ा । एक के बाद एक वार । एक के बाद एक घूंसे।
आखिरकर उन्होंने नंदिनी को छोड़ दिया। वहाँ से भाग निकले । नंदिनी बहुत डर गई थी।
उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी एकदम सहम उठी थी। उसने उसके कपड़े उठा कर दिए । कुछ पल तक वह नंदिनी को देखता रहा।
फिर शांत आवाज में बोला डरिए मत अब । अब आप एकदम सुरक्षित हैं। नंदिनी ने पहली बार किसी अजनबी को गौर से देखा।
उसे नही पता था कि यह कौन है ? लेकिन उसकी आँखों में एक भरोसा था।
और फिर जीत ने एक सवाल पुछा — जिसने कहानी की दिशा बदल दी। तुम कौन हो? और इस हालत में यहाँ क्या कर रही हो ?
भाग 2 में जानिए क्या होगा ?
नंदिनी रोती हुई बताएगी अपनी पुरी सच्चाई । और जीत पहली बार सुनेगा सिंघानिया साम्राज्य का नाम। सावित्री और गुड़िया की एंट्री। नंदिनी पहुंचेगी जीत के छोटे से घर में।
अरबपति लड़की का पहली बार झोपड़ी नुमा घर में कदम , कहाँ वह महल में रहने वाली राजकुमारी और अब चाय वाले के घर में सिर्फ एक आम जिंदगी।
नंदिनी बोलेगी एक साल की कॉन्ट्रैक्ट शादी का प्रस्ताव , जीत को । कोर्ट मैरिज का फैसला। और महावीर सिंघानिया को मिल जाएगी नंदिनी की पहली खबर।
नंदिनी की शादी की खबर सुनते ही , नंदिनी के चाचा , बहुत ही ज्यादा गुस्से में आ जाते हैं ।
अब क्या होगा आगे स कहानी में। इंतजार करिए हमारी अगली कहानी कॉन्ट्रेक्ट वाली शादी भाग 2 का जो जल्द आएगा ।
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