गरुड़ पुराण : क्या आप जानते हैं ? कि ” तुलसी पौधा आत्मा की सहायता करती हैं ? ” तुलसी की पूजा रामदास नें इतनी श्रद्धा से की और अपना पूरा जीवन कैसे उसकी पूजा में लगाया ?
और फिर कैसे रामदास के मरने के बाद तुलसी नें यमलोक में रामदास की पूरी सहायता की ? तो पढ़िए पूरी कहानी ।
तुलसी नें यमलोक में रामदास की सहायता कैसे की ? Tulsi Mystery In Garuda Purana
⇒ बहुत पुरानी बात हैं । एक छोटे से एक गाँव में रामदास नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह हमेशा भगवान में बहुत विश्वास रखता था।
⇒ और बहुत ही सरल जीवन जीता था । उसके घर में एक सुंदर तुलसी का पौधा था, वह हर सुबह उठकर तुलसी को जल चढ़ाता ,दीपक जलाता और उसकी पूजा करता था।
⇒ रामदास का मानना था कि तुलसी केवल एक पौधा नही हैं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद है। इसलिए वह हमेशा उसकी देखभाल करता था। गाँव के लोग भी उसकी श्रद्धा देखकर प्रसन्न होते थे।
⇒ समय बीतता गया। रामदास बूढ़ा हो गया, लेकिन उसने तुलसी की सेवा कभी नही छोड़ी। चाहे गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश, वह रोज तुलसी के पास जाता और प्रार्थना करता था।
तुलसी के प्रति रामदास का अटूट विश्वास
⇒ एक दिन गाँव में एक साधु आए। उन्होंने रामदास के घर के आँगन में लगी तुलसी को देखा और बहुत प्रसन्न हुए।
⇒ साधु ने कहा, बेटा तुम बड़े भाग्यशाली हो। जो व्यक्ति श्रद्धा से तुलसी की सेवा करता है, उसे भगवान का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
⇒ रामदास ने विनम्रता से पूछा, महाराज क्या तुलसी वास्तव में इतनी महान है ?
⇒साधु मुस्कुराए और बोले , धार्मिक मान्यताओ के अनुसार तुलसी का पौधा घर में सुख, शांति और पवित्रता लाता है।
⇒ कहा जाता है कि मृत्यु के समय भी तुलसी का स्मरण आत्मा को सहायता देता है।
⇒यह बात सुनकर रामदास की श्रद्धा और बढ़ गयी। अब वह पहले से भी अधिक प्रेम से तुलसी की सेवा करने लगा।
⇒ कई वर्ष बीत गए। रामदास ने अपने जीवन में कभी किसी का बुरा नही किया। व गरीबों की मदद करता , भूखों को भोजन देता और हमेशा सच बोलता था।
अब रामदास का मृत्यु का समय आया
⇒ एक दिन रामदास बहुत बीमार पड़ गया। गाँव के लोग और उसके परिवार वाले उसकी सेवा करने लगे।
⇒ रामदास समझ गया था कि अब उसके जीवन का समय पूरा होने वाला है। उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा, मुझे आँगन में लगी तुलसी के पास ले चलो।
⇒ परिवार वालों ने उसे तुलसी के पास बैठा दिया। रामदास ने प्रेम से तुलसी को देखा और भगवान का नाम लेने लगा।
⇒ कुछ देर बाद उसने शांत मन में अपनी अंतिम सांस ली। पूरे गाँव में शोक का माहौल था। सभी लोग कहने लगे कि रामदास बहुत अच्छा इंसान था।
⇒ लेकिन रामदास की आत्मा की यात्रा अब शुरू हुई थी। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार जब उसकी आत्मा आगे बढ़ी तो उसे एक अलग दुनिया का अनुभव हुआ। वहाँ उसे अपने जीवन के सभी अच्छे कार्य याद आने लगे।
⇒ उसे याद आया कि उसने कितने लोगो की सहायता की थी, कितनों को भोजन कराया था और कितनों के दुख दूर किये थे।
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मरने के बाद रामदास को कैसे मिला तुलसी का आशीर्वाद ?
⇒ यात्रा के दौरान रामदास को एक सुंदर प्रकाश दिखाई दिया। वह प्रकाश उसके साथ – साथ चल रहा था। रामदास ने आश्चर्य से पुछा , यह प्रकाश कौन है ?
⇒ तभी उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई दिव्य शक्ति उसे सुरक्षा दे रही है।
⇒ धार्मिक मान्यताओ के अनुसार तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय मानी जाती है। इसलिए कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से तुलसी की सेवा करता है, उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
⇒ रामदास को अपने जीवन की हर सुबह याद आने लगी, जब वह तुलसी को जल चढ़ाता था। उसे महसूस हुआ कि भगवान की कृपा उसके साथ है और उसकी यात्रा को आसान बना रही है।
⇒ उसके मन का डर धीरे – धीरे समाप्त हो गया । अब उसके अंदर शांति थी। उसे समझ में आ गया कि जीवन में किया गया हर अच्छा कार्य और भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नही जाती।
रामदास से गाँव वालों को मिली एक बड़ी सीख
⇒ रामदास के जाने के बाद भी उसके घर का तुलसी का पौधा हरा – भरा खड़ा रहा । गाँव के लोग जब भी उस पौधे को देखते , उन्हे रामदास की याद आ जाती। उसके बेटे ने भी तुलसी की सेवा जारी रखी।
⇒ उसने अपने बच्चों को बताया कि यह केवल एक पौधा नही हैं, बल्कि श्रद्धा और अच्छे संस्कारों का प्रतीक है।
⇒ धीरे – धीरे गाँव के और लोगो ने भी अपने घरों में तुलसी लगानी शुरू कर दी । वे रोज उसकी पूजा करते और अपने बच्चों को अच्छे कर्म करने की शिक्षा देते।
⇒ सभी लोग समझ चुके थे कि केवल पूजा करना ही पर्याप्त नही है । अच्छे कर्म करना भी उतना ही जरूरी है। रामदास का जीवन गाँव वालों के लिए एक उदाहरण बन गया ।
तुलसी की कथा और रामदास से मिलने वाली सीख
⇒ तुलसी का पौधा बहुत पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ तुलसी की सेवा करता है, उसे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
⇒ और यह बात धार्मिक ग्रंथों में भी बताया गया हैं ।
⇒ तुलसी केवल एक पौधा नही, बल्कि विश्वास , भक्ति और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती है। इस कथा से हमे यह सीख मिलती है ।
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⇒ कि जीवन में अच्छे कर्म करना, दान – धर्म , भगवान का स्मरण करना और दूसरों की सहायता जरूर करनी चाहिए ।
⇒ धन और संपत्ति ही जीवन का सब कुछ नहीं होता । सबसे बड़े दौलत अच्छे संस्कार , सच्ची भक्ति और नेक कर्म है।
⇒ मरने के बाद भी इंसान के गुण, सेव , दान – धर्म मृत्यु, के बाद भी आत्मा के लिए सबसे बड़े सहारा बनते हैं।
⇒ इसीलिए दोस्तों : हमे अपने जीवन में प्रेम , दया, सेवा और और भक्ति को अपनाना चाहिए।
⇒ जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है और साथ ही अच्छे कर्म करता है, उसका जीवन हमेशा सुखी रहता है ।
⇒ और उसके मन को पूर्ण शांति भी प्राप्त होती है।
⇒ यह कथा आपको कैसी लगी ?ऐसी ही कहानी और पाने के लिए हमारी Website । Hindirama.com को फॉलो जरूर करें ।

