कॉन्ट्रेक्ट वाली दुल्हन । चाय वाला निकला करोड़पति लड़की से भी अमीर – भाग 4 । contract Bride Marriage Story ।

करोड़पति नंदिनी से भी ज्यादा अमीर हैं जीत। “अब नंदिनी को पूरा शक हो चुका हैं कि जीत किसी अरबपति से कम नहीं”

अब 1 साल शादी का कॉन्ट्रेक्ट भी दोनों का खत्म होने वाला हैं।

“क्या नंदिनी पता लगा पाएगी कि जीत कोई साधारण लड़का नहीं हैं?” अब क्या जीत का खुलासा पूरी तरह हो पाएगा?

“इतना अमीर लड़का क्या नंदिनी को अपनाएगा, और अब कौनसी खतरनाक चाल चलेगा नंदिनी के चाचा?” 

क्या होगा अंत?  तो पढ़िए , कॉन्ट्रेक्ट वाली शादी अंतिम भाग 4।

चाय वाले जीत का खुला एक बड़ा राज । contract Bride Marriage Story

विदेश की उस रात नंदिनी की आँखों में नींद नहीं थी। पिछले कई दिनों से उसके मन में एक ही सवाल घूम रहा था। आखिर यह जीत है कौन?

एक साधारण लड़का वो भी चाय बेचने वाला एक इतने बड़े होटल में कैसे रुक सकता है? 

उसके पास वो सारे कार्ड्स कहाँ से आए जिसके जरिए वो इतने खर्चे कर रहा है। होटल के बड़े से बड़े मैनेजर उसे देखकर सम्मान क्यों देते हैं?

और सबसे बड़ी बात, वह कई बार कुछ इस तरह फोन पर बात करता था जैसे किसी बड़े कंपनी का मालिक हो ।

अगली सुबह जीत किसी काम से बाहर गया , तभी नंदिनी के फोन पर एक अनजान नंबर से फोन आया, क्या आप मिसेज जीत मल्होत्रा बोल रही हैं ?

यह नाम सुनते ही नंदिनी चौक गई , “मल्होत्रा?” 

उधर से आवाज आई —जी, विक्रम मल्होत्रा साहब आप दोनों से मिलना चाहते हैं। वह जीत सर के पिता हैं। नंदिनी के हाथ से फोन छूट गया।

उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। “पिता?” मतलब जीत कोई साधारण लड़का नही है ?

उसी शाम को जीत उसे लेकर एक बहुत बड़े बंगले के पास गया। बंगला नही…. जैसे कोई महल हो,,, सैकड़ों कर्मचारी । लंबी – लंबी गाड़ियां।

सुरक्षा गार्ड। और अंदर खड़ा एक अधेड़ आदमी।

जिसकी आँखों में वर्षों का इंतजार था…। जैसे ही जीत अंदर गया , वो दौड़ पड़े। और तुरंत जीत को गले से लगा लिया।

उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। बेटा…. मुझे माफ कर दे…. मैंने तुझे बहुत याद किया …।

नंदनी एकदम शांत खड़ी रही,  वह समझ नही पा रही थी की हो क्या रहा है, जीत कोई चाय वाला नही था।

वह अरबों – खरबों की मल्होत्रा इंडस्ट्रीज का इकलौता  वारिस था। चाय वाला जीत था एक अरबपति का बेटा

उस रात पूरा परिवार रो रहा था, जीत की माँ बार – बार देखकर रोए ही जा रही थी।

उन्होंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा। तो इतना बड़ा हो गया और मैं तुझे ढूंढ भी नही सकी।  जीत भी बहुत भावुक हो गया था।

उसके मन मे वर्षों पुराना दर्द धीरे – धीरे पिघलने लगा। विक्रम मल्होत्रा ने सबके सामने कहा मैंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की है।

शराब और गलत लोगो ने मुझे अंधा कर दिया था। लेकिन बेटे के जाने के बाद मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ।

मैंने सब छोड़ दिया। बस अपने बेटे का इंतजार करता रहा। जो हो गया वो बीत गया पापा। अब हम फिर से शुरुआत करेंगे। यह सुनकर विक्रम की आँखों में खुशी के आँसू आ गया।

नंदिनी के पिता राजवीर सिंघानिया का पुराना सच

बातचीत के दौरान विक्रम ने एक पुरानी फाइल निकलवाई। नंदिनी हैरान रह गई। विक्रम बोले – तुम्हारे पिता मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे।

उन्हे महावीर पर कभी पूरा भरोसा नही था। उन्होंने कुछ दस्तावेज मेरे पास भी सुरक्षित रखे थे ।

फाइल में ऐसे सबूत थे जो साबित करते थे कि महावीर वर्षों से कंपनी में गड़बड़ियाँ कर रहा था। नंदिनी की आँखों मे गुस्सा भर गया।

अब उसे समझ आ चुका था, कि उसके पिता कि चिंता बेवजह नही थी।


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नंदिनी के चाचा महावीर की आखिरी खतरनाक चाल

दूसरी तरफ महावीर बहुत ज्यादा गुस्से में था। उसे समझ आ गया कि जीत कोई ऐसा वैसा लड़का नही है। 

“और सबसे बड़ा आश्चर्य उसको तब हुआ, जब उसे मल्होत्रा परिवार का नाम पता चला।”

अगर ये दोनों मिल गए तो सब कुछ खत्म हो जाएगा । उसने आखिरी दांव खेलने का फैसला किया।

उसने अपने आदमियों को बोला, — नंदिनी को जल्द से जल्द यहाँ लेकर आओ। इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए ।

गुंडों ने किया नंदिनी को किडनेप

एक दिन शाम को जब नंदिनी मंदिर से वापस लौट रह थी घर के लिये , तभी अचानक उसके सामने एक काली गाड़ी आ खड़ी हुई।

कुछ नकाब लगाए हुए आदमी निकले , सब कुछ इतना जल्दी से हुआ की उसे क्या किसी को कुछ समझ नही आया।

कुछ ही समय में नंदिनी को गाड़ी में डाल दिया। जब जीत को यह बात पता चली तो उसके आँखों में आग उठ गई। 

उसने तुरंत ही अपने दोस्तों को फोन किया सोनू, अमन और राकेश। और अपने पिता के सुरक्षा अधिकारियों को। पुरी टीम हरकत में आ गई।

नंदिनी मिली एक मौत की बंद फैक्ट्री में 

कुछ घंटों की तलाश के बाद पता चला कि नंदिनी को एक पुरानी बंद फैक्ट्री शहर से दूर सुनसान इलाके में थी।

वहाँ महावीर और रौनक दोनों मौजूद थे। नंदिनी को कुर्सी से बांधा गया था।

रौनक हंस रहा था, तो किसी की भी नही होगी। तभी….. फैक्ट्री का बड़ा दरवाजा जोर से खुला, धड़ाम ! सबक नजरें उधर घूम गई।

वहाँ जीत खड़ा था। उसके साथ उसके दोस्त और सुरक्षा अधिकारी भी थे।

उसकी आँखों में ऐसा गुस्सा था जिसे देखकर गुंडे भी घबरा गए।

जीत ने बना दिया एक बड़ी को फैक्ट्री को रणभूमि

अगली ही पल में पुरी फैक्ट्री रणभूमि बन गई। चारों तरफ मारपीट शुरू हो गयी।

जीत बिजली की तरह दुश्मनों पर टूट पड़ा। एक -एक करके सब नीचे गिर गए। रौनक ने हमला किया। लेकिन जीत ने उसका वार रोक लिया।

फिर एक जोर दार का घूंसा …… और रौनक दूर जाकर गिर पड़ा। दूसरी तरफ महावीर भागने की कोशिश कर रहा था।

लेकिन विक्रम मल्होत्रा के लोगो ने उसे घेर लिया । घबराहट में महावीर चिल्लाने लगा।

और गुस्से में उसने खुद ही अपने सारे अपराध स्वीकार कर लिया।

उसने बताया कि वह पैसों के लिये और राजवीर की बेटी की शादी करवाके उसको मारना चाहता था।

और सालों से अपने भाई को धोखे में रखा । उसे यह पता नही था, कि उसकी सारी बातें रिकॉर्ड की जा रही है।


शादी के बाद भी पत्नी का बॉयफ्रेंड

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चालबाज़ महावीर और रौनक की साजिश का हुआ अब अंत

कुछ समय बाद पुलिस वहाँ पहुंची और दोनों को उन्होंने गिरफ्तार किया रिकार्डिंग और दस्तावेज को देखते हुए।

रौनक का चेहरा उतर गया था। महावीर की सारी अकड़ खत्म हो चुकी थी। उसी समय खुशी भी वहाँ पहुंची।

उसने भी अपने पिता के खिलाफ गवाही दी, और अंत में उसको कड़ी से कड़ी सजा मिली। और वर्षों पुरानी साजिश खत्म ।

नंदिनी और जीत की शादी के कॉन्ट्रैक्ट का आज आखिरी दिन

कुछ महीनों बाद जिंदगी पहले जैसे होने लगी। सिंघानिया साम्राज्य पुरी तरह नंदिनी ने अकेले संभाल लिया, जीत भी अपने परिवार के साथ जुड़ चुका था।

नंदिनी और जीत की शादी का 1 साल का कॉन्ट्रेक्ट आज खत्म   

जिस दिन उनका एक साल का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने वाला था। नंदिनी पूरे दिन उदास रही। जीत भी चुप था।

शाम को दोनों उसी जगह बैठे जहाँ पहली बार खुलकर बात की थी। जीत ने धीमी आवाज में कहा, “नंदिनी” 

कि नंदिनी हमारा कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका है। अगर तुम चाहो तो अब तुम आजाद हो। यह सुनते ही नंदिनी की आँखों में आँसू आ गए।

उसे लगा जैसे उसकी जान ही निकल जाएगी ।  उसने मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन आँसू निकल गए उसके तुम सच में इतने भोले हो?

जीत चौंक गया । नंदिनी ने उसका हाथ पकड़ा , कॉन्ट्रैक्ट एक साल का था…. लेकिन मेरा प्यार जिंदगी भर का है।

कुछ पल के लिये जीत उसे देखते ही रहा। फिर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई , और उस समय उसने कहा कि “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।“

1 साल का कॉन्ट्रैक्ट बना पूरे जीवन का बँधन । दोनों की हुई धूमधाम से शादी

कुछ समय बाद एक भव्य विवाह का इंतजाम किया गया।  

और हजारों मेहमान आए उनकी शादी में इस बार कोई दिखावा वाली शादी नहीं बल्कि सात फेरो से होने वाली सात जन्मों के लिए था।चारों तरफ खुशियां ही थी।

और जीत ने अपनी पुरानी बस्ती के लोगो को भी वहाँ बुलाया उन्हे सम्मान के साथ वहाँ बैठाया गया।

और सावित्री और गुड़िया को सबके सामने सम्मान दिया की यह मेरे सबसे बड़े दुख का साथी रही हैं।

और मैं हमेशा इनके साथ रहने का वादा करता हूँ, क्योंकि यह मेरी माँ – सावित्री , और यह मेरी बहन – गुड़िया दोनों को सबके सामने रिश्ते का नाम दियाऔर मंडप में तालियों की आवाज गूंज उठी।

कुछ साल बाद जीत और नंदिनी ने पूरा कारोबार संभाला । जीत और नंदिनी अपने घर की बालकनी में खड़े डूबते सूरज को देख रहे थे।

नंदिनी मुस्कुराई और बोली – की अगर उस दँ मैं मंडप से भागी नही होती तो, कभी खुश नही रहती।

जीत हंस पड़ा। और अगर मैं उस रात चाय की दुकान बंद ना कर रहा होता, दोनों मुस्कुराये। और दूर आसमान में डूबता सूरज उनकी नई जिंदगी की कहानी लिखता चला गया।

निष्कर्ष

करोड़पति लड़की नंदिनी की शादी एक चाय वाले से नहीं बल्कि उसे मिला एक अरबपति लड़का जीत । लेकिन जीत हमेशा एक सरल इंसान की तरह ही रहता था।

उसे कभी भी अपनी अमीरी पर घमंड नहीं था। वह गरीबों से बहुत प्यार करता था। और ऐसे अच्छे लड़के जीत से नंदिनी को भगवान नें मिलवाया।          

दोस्तों सब नसीबों से होता। किसी का प्यार भी मिलता हैं तो सिर्फ नसीब से। और इस कहानी में गद्दारों का भी अंत हुआ।

जिन लोगो पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता । और कहानी आपको कैसी लगी ? कॉमेंट मे जरूर बताना। कॉन्ट्रेक्ट वाली दुल्हन कहानी समाप्त।  


 

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