क्या हो अगर रात 2:30 बजे तुम्हारे घर की दीवार के अंदर से कोई तुम्हारा नाम लेकर मदद मांगे?
क्या हो अगर दीवार के पीछे एक बंद कमरा हो, जहां वर्षों पहले मर चुकी लड़की आज भी किसी का इंतजार कर रही हो?
पुणे के एक पुराने फ्लैट में रहने आए समीर और नेहा ने कभी नहीं सोचा था कि उनका नया घर इतना भयानक राज छिपाएगा। लेकिन उस घर की सबसे डरावनी चीज दीवार नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी एक चीख थी।
दूसरी रात दीवार से पहले खरोंचने की आवाज आई, फिर दस्तक सुनाई दी और आखिर में एक औरत दर्द से चीखने लगी।
जब नेहा ने दीवार के पास जाकर सुना, तो अंदर से किसी ने उसका नाम लेकर कहा, “मुझे बाहर निकालो।”
“नेहा… मुझे बाहर निकालो… उसने मुझे जिंदा दीवार में चुनवा दिया था।”
उस आवाज के बाद जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि कुछ पुराने पाप दीवारों के पीछे दबकर कभी खत्म नहीं होते।
Diwaron Ke Andar Dabi Cheekh: पुराना फ्लैट और भयानक दीवार
पुणे के पुराने इलाके में चार मंजिला एक इमारत थी। उसकी तीसरी मंजिल पर बना एक फ्लैट पिछले दो साल से बंद पड़ा था।
फ्लैट का किराया आसपास की दूसरी जगहों से बहुत कम था, इसलिए समीर ने ज्यादा सवाल किए बिना उसे किराए पर ले लिया।
उसके साथ उसकी पत्नी नेहा भी थी। घर देखकर वह खुश हुई, लेकिन बेडरूम की एक दीवार को देखकर अचानक चुप हो गई।
दीवार का एक हिस्सा बाकी जगह से अलग था। उस पर नया प्लास्टर लगा हुआ था, जबकि आसपास की दीवार पुरानी और जगह-जगह से खराब थी।
ऐसा लगता था जैसे कभी वहां कोई दरवाजा या रास्ता रहा हो, जिसे बाद में जल्दी-जल्दी ईंटें लगाकर बंद कर दिया गया हो। उस दीवार को देखकर नेहा के मन में बिना किसी वजह के डर बैठ गया।
नेहा ने समीर से पूछा कि दीवार के पीछे क्या है, लेकिन उसने तुरंत बात बदल दी।
उसने कहा कि पुरानी इमारतों में ऐसी दीवारें मिलना सामान्य बात है और उसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
लेकिन नेहा ने उसी पल उसके चेहरे पर ऐसा डर देखा, जैसे वह दीवार उसे पहले से पहचानती हो। समीर ने भले ही कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आंखों में छिपी घबराहट नेहा से छिप नहीं सकी।
पहली सुबह दीवार तक जाते गीले पैरों के निशान
पहली रात दोनों थकान के कारण जल्दी सो गए। पूरी रात घर में कोई अजीब घटना नहीं हुई।
सुबह नेहा की नजर बेडरूम के फर्श पर पड़े गीले पैरों के निशानों पर पड़ी। वे निशान दरवाजे से शुरू होकर सीधे उसी दीवार तक जा रहे थे।
दीवार के पास पहुंचते ही निशान अचानक खत्म हो गए, जैसे कोई इंसान वहीं गायब हो गया हो। आखिरी निशान दीवार से कुछ इंच पहले था, लेकिन उसके आगे एक भी निशान नहीं था।
बाहर बारिश नहीं हुई थी और कमरे में पानी फैलने की कोई वजह भी नहीं थी। नेहा ने आसपास देखा, लेकिन उसे कहीं पानी का कोई स्रोत नहीं मिला।
उसने फर्श साफ कर दिया, लेकिन कुछ मिनट बाद उसी जगह पानी की बूंदें फिर दिखाई देने लगीं।
इस बार निशान दीवार के नीचे से बाहर की ओर आते दिखाई दे रहे थे। यह देखकर नेहा का डर और बढ़ गया।
उसने समीर को बुलाया। निशान देखकर उसने कहा कि शायद किसी पाइप में रिसाव होगा।
लेकिन इतना कहने के बाद वह दीवार की तरफ देखने लगा और कुछ देर चुप रहा। उसके चेहरे से लग रहा था, जैसे उसके मन में कोई पुरानी याद लौट आई हो।
रात 2:30 बजे दीवार के अंदर से पहली आवाज आई
दूसरी रात ठीक 2:30 बजे नेहा अचानक नींद से जाग गई। उसे लगा जैसे कमरे में कोई चल रहा हो।
कमरा अंधेरे में डूबा था। खिड़की बंद होने के बावजूद पर्दा बहुत धीरे-धीरे हिल रहा था। नेहा ने ध्यान से देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था।
तभी दीवार के भीतर से धीमी खर-खर की आवाज आने लगी, जैसे कोई नाखूनों से सीमेंट कुरेद रहा हो। आवाज उसी हिस्से से आ रही थी, जिसे देखकर नेहा पहले ही डर गई थी।
खर्र… खर्र… खर्र…
नेहा ने डरते हुए समीर को जगाया और पूछा कि क्या उसे भी आवाज सुनाई दे रही है।
समीर ने कुछ सेकंड तक दीवार को देखा और कहा कि शायद कोई चूहा अंदर फंस गया होगा।
लेकिन उसी पल आवाज अचानक बंद हो गई और कमरे में भयानक खामोशी छा गई।
फिर दीवार के अंदर से तीन साफ चोटें सुनाई दीं, जैसे कोई बाहर आने के लिए दरवाजा खटखटा रहा हो।
ठक…
ठक…
ठक…
इस बार समीर के चेहरे का रंग उड़ गया। वह जानता था कि यह किसी चूहे की आवाज नहीं थी। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई इंसान दीवार के दूसरी तरफ से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो।
दीवार के अंदर से किसी ने कहा बाहर निकालो
समीर धीरे-धीरे दीवार के पास पहुंचा और अपना कान उससे लगा दिया। दीवार बर्फ जैसी ठंडी थी।
दूसरी तरफ से भारी सांसों की आवाज आ रही थी, जैसे कोई बहुत देर तक रोने के बाद थक चुका हो।
फिर एक औरत की टूटी हुई आवाज सुनाई दी। उसे सुनते ही समीर पीछे हट गया।
“बाहर निकालो…”
नेहा ने पूछा कि आवाज किसकी थी, लेकिन समीर ने उसकी तरफ देखने से भी बचना शुरू कर दिया।
तभी वही आवाज पहले से ज्यादा साफ सुनाई दी। कमरे की हवा भी अचानक ठंडी हो गई।
“मुझे बहुत देर हो गई… सांस नहीं आ रही… बाहर निकालो…”
नेहा ने दीवार की तरफ देखा तो प्लास्टर के नीचे पांच उंगलियों के निशान उभरने लगे। ऐसा लग रहा था, जैसे कोई दूसरी तरफ से हाथ बाहर निकालने की कोशिश कर रहा हो।
निशान धीरे-धीरे बाहर की तरफ दबने लगे और दीवार पर एक लंबी खरोंच नीचे तक बन गई।
नेहा का पूरा शरीर कांपने लगा। अब उसे यकीन हो गया था कि दीवार के अंदर कोई मौजूद है। लेकिन वह इंसान था या कुछ और, यह अभी भी रहस्य था।
दीवार पर रेंगती उंगलियां नेहा के बिस्तर तक पहुंचीं
दीवार पर बने हाथ के निशान धीरे-धीरे नीचे आने लगे। वे फर्श तक पहुंचे और फिर आगे बढ़ने लगे।
निशान ऐसे आगे बढ़ रहे थे, जैसे कोई अदृश्य इंसान हाथों के सहारे कमरे में रेंग रहा हो।
वे धीरे-धीरे नेहा के बिस्तर तक पहुंचे और उसके पैरों के पास आकर रुक गए। नेहा ने नीचे देखा तो उसके पैरों के ठीक पास गीली उंगलियों के पांच निशान बने हुए थे।
वह डरकर समीर के पीछे छिप गई, लेकिन समीर दीवार से नजर नहीं हटा पा रहा था। उसकी आंखों में ऐसा डर था, जैसे वह उस चीज को पहचानता हो।
तभी दीवार के भीतर से एक धीमी आवाज आई और कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
“राघव…”
नेहा ने तुरंत समीर की तरफ देखा। उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
तभी दीवार का एक छोटा टुकड़ा टूटकर नीचे गिरा। उसके पीछे दो काली आंखें दिखाई दीं।
वे आंखें बिना पलक झपकाए केवल समीर को देख रही थीं, जैसे वर्षों से उसी का इंतजार कर रही हों।
शीशे में दिखाई दी मीरा की डरावनी परछाईं
अगली दोपहर नेहा शीशे के सामने खड़ी होकर बाल बना रही थी। तभी उसे अपने पीछे किसी की परछाईं दिखाई दी।
उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा, लेकिन कमरे में कोई नहीं था। दरवाजा भी बंद था।
जब उसने दोबारा शीशे में देखा, तो एक औरत बिल्कुल उसके पीछे खड़ी दिखाई दी।
उसके लंबे बाल गीले थे और चेहरा इतना सफेद था कि अंधेरे कमरे में भी साफ दिखाई दे रहा था। लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि शीशे में दिख रही औरत कमरे में असल में मौजूद नहीं थी।
नेहा ने कांपते हाथों से शीशे को छुआ। तभी शीशे पर अंदर की तरफ से उंगलियां चलने लगीं और धीरे-धीरे एक नाम उभर आया।
मीरा
नेहा पीछे हट गई, लेकिन शीशे में मीरा अब भी उसके बिल्कुल पीछे खड़ी थी। वह बिना पलक झपकाए नेहा को देख रही थी।
मीरा ने अपना चेहरा नेहा के कान के पास लाकर बहुत धीमी आवाज में कहा, “जिस आदमी पर तुम भरोसा कर रही हो, वह तुम्हें भी यहीं छोड़ सकता है।”
नेहा कुछ समझ पाती, उससे पहले शीशा जोरदार आवाज के साथ टूट गया। वह डरकर पीछे गिर पड़ी।
शांता देवी ने बताया कि मीरा के साथ क्या हुआ था
डरी हुई नेहा उसी शाम नीचे रहने वाली बुजुर्ग महिला शांता देवी के पास पहुंची। उसने पुराने फ्लैट के बारे में पूछा और बताया कि वहां उसके साथ अजीब घटनाएं हो रही हैं।
फ्लैट का नाम सुनते ही शांता देवी कुछ देर चुप रहीं। फिर उन्होंने उस घर से जुड़ी एक पुरानी घटना बतानी शुरू की।
कई साल पहले उस घर में मीरा और उसका पति राघव रहते थे। दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे।
एक रात झगड़ा इतना बढ़ गया कि पूरी इमारत में मीरा की चीखें सुनाई देने लगीं। उस रात उसकी आवाज केवल मदद के लिए नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए उठ रही थी।
शांता देवी ने बताया कि उन्होंने दीवार के पीछे से मीरा को मदद के लिए चिल्लाते सुना था।
“राघव… दरवाजा खोलो… मुझे बाहर निकालो… मैं मर जाऊंगी…”
अगली सुबह राघव अकेला घर से बाहर निकला और सबको बताया कि मीरा घर छोड़कर चली गई है।
लेकिन उसके बाद कई रातों तक ठीक 2:30 बजे उसी दीवार से मीरा की आवाज सुनाई देती रही। लोग डरने लगे, मगर किसी ने दीवार के पीछे जाकर देखने की हिम्मत नहीं की।
कुछ समय बाद राघव भी गायब हो गया और वह फ्लैट लंबे समय के लिए बंद कर दिया गया। उसके बाद किसी ने उस घर के बारे में ज्यादा बात नहीं की।
समीर ने बताया कि वह असल में कौन था
घर लौटने पर नेहा ने देखा कि समीर उसी दीवार के सामने बैठा था। उसके हाथ में एक पुरानी चाबी थी।
नेहा ने पूछा कि वह चाबी किसकी है, लेकिन तभी दीवार के भीतर से आवाज आई।
“तुम फिर आ गए…”
नेहा ने कांपते हुए समीर से पूछा कि दीवार उसे राघव क्यों बुला रही है। समीर कुछ नहीं बोला।
कुछ देर बाद उसने सिर झुका लिया और आखिरकार अपना सबसे बड़ा रहस्य नेहा के सामने खोल दिया।
उसने बताया कि उसका असली नाम राघव था और मीरा उसकी पत्नी थी।
उस रात गुस्से में उसने मीरा को दीवार के पीछे बने एक बंद कमरे में कैद कर दिया था। मीरा लगातार दरवाजा पीटती रही और बाहर निकालने के लिए चिल्लाती रही, लेकिन राघव ने उसकी आवाज अनसुनी कर दी।
उसने दीवार हमेशा के लिए बंद करवा दी। मीरा अंदर ही रह गई और धीरे-धीरे उसकी आवाज बंद हो गई। राघव जानता था कि उसने क्या किया है, लेकिन उसने किसी को सच नहीं बताया।
इसके बाद उसने अपनी पहचान बदल ली और वर्षों बाद उसी जगह वापस आकर समीर बन गया। उसे लगा था कि नाम बदलने और नई जिंदगी शुरू करने से उसका पुराना अपराध पीछे छूट जाएगा। लेकिन मीरा ने उसे कभी नहीं भुलाया था।
दीवार फटी और मीरा का लंबा हाथ बाहर निकल आया
समीर का सच सामने आते ही कमरे की हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई और सभी लाइटें बुझ गईं।
दीवार के अंदर से धीमी हंसी सुनाई दी। फिर नाखूनों से सीमेंट कुरेदने की तेज आवाज आने लगी।
कrrrr… कrrrr… कrrrr…
दीवार के बीचोंबीच अचानक एक लंबी दरार बन गई। उसके भीतर से एक काली उंगली बाहर निकली।
फिर दूसरी उंगली निकली और देखते ही देखते पूरा हाथ दीवार के बाहर आ गया। वह हाथ इंसानी हाथ जैसा था, लेकिन उसकी लंबाई देखकर नेहा की चीख निकल गई।
हाथ असामान्य रूप से लंबा था। उसकी उंगलियों पर काली धूल और पुराने सीमेंट के निशान लगे थे।
वह हाथ धीरे-धीरे आगे बढ़ा और अचानक समीर के कंधे पर कसकर जम गया।
समीर ने उसे हटाने की कोशिश की, लेकिन हाथ उसकी गर्दन तक पहुंच गया और उसे पीछे खींचने लगा।
तभी दीवार के भीतर से मीरा का चेहरा बाहर दिखाई दिया। उसकी काली आंखें सीधे समीर पर टिकी थीं।
मीरा ने बहुत धीमी आवाज में कहा कि जिस अंधेरे में उसने उसे छोड़ा था, वही अंधेरा अब उसका इंतजार कर रहा है।
“तुमने मुझे इस दीवार में चुनवा दिया था, राघव… अब यही दीवार तुम्हारी आखिरी जगह है।”
समीर ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन मीरा ने उसे अंदर खींच लिया
समीर ने हाथ छुड़ाने के लिए पूरी ताकत लगाई और दीवार पर लगातार मुक्के मारने लगा।
वह नेहा को बचाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बचाने के लिए मदद मांग रहा था। उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
कमरे में अचानक मीरा की पुरानी चीखें गूंजने लगीं। हर आवाज पहले से ज्यादा डरावनी सुनाई दे रही थी।
समीर पीछे हटता गया, लेकिन वह लंबा हाथ उसकी कमर तक पहुंच चुका था और उसे दीवार की तरफ खींच रहा था। जितना वह खुद को पीछे खींचता, उतनी ही ताकत से वह हाथ उसे अंधेरे की तरफ खींचता जाता।
उसने फर्श पकड़ लिया और नाखूनों से जमीन खुरचते हुए नेहा को जोर-जोर से पुकारा।
“नेहा! मुझे बचाओ… मुझे बाहर निकालो!”
नेहा उसकी तरफ बढ़ी, लेकिन उसी समय दीवार से दूसरा लंबा हाथ बाहर निकला और उसके सामने आकर रुक गया।
नेहा डरकर पीछे गिर गई। उसी पल पहला हाथ समीर को दीवार की तरफ तेजी से खींचने लगा।
दीवार की दरार चौड़ी होती गई और उसके पीछे एक अंधेरा कमरा दिखाई देने लगा। ऐसा लग रहा था, जैसे वर्षों से बंद वह कमरा अब फिर से खुल रहा हो।
समीर ने आखिरी बार नेहा की तरफ हाथ बढ़ाया, लेकिन उसकी उंगलियां हवा में ही रह गईं।
मीरा का लंबा हाथ समीर को पूरी ताकत से दीवार के अंदर खींच ले गया।
समीर की चीख कुछ सेकंड तक सुनाई देती रही और फिर अचानक बिल्कुल बंद हो गई।
दीवार फिर बंद हो गई, लेकिन इस बार उसके अंदर मीरा नहीं, बल्कि उसका कातिल कैद था।
यह दृश्य देखकर नेहा की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और वह वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी।
सुबह पुलिस आई और दीवार के पीछे छिपा कमरा खुला
सुबह होश में आने के बाद नेहा ने तुरंत पुलिस को फोन किया। उसने पूरी घटना कांपती आवाज में बताई।
पुलिस घर पहुंची तो समीर कहीं नहीं था, जबकि दीवार बिल्कुल सामान्य दिखाई दे रही थी। उसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि रात में वहां कुछ हुआ था।
पुलिस अधिकारी ने दीवार पर हथौड़ा मारा तो अंदर से खोखली आवाज सुनाई दी। इसके बाद उन्होंने दीवार की जांच शुरू कर दी।
दीवार तोड़ते समय पहली ईंट हटते ही अंदर से बर्फ जैसी ठंडी हवा बाहर आई। ऐसा लगा जैसे वर्षों से बंद वह कमरा पहली बार फिर सांस ले रहा हो।
जैसे-जैसे ईंटें हटती गईं, अंदर एक पुराना कमरा दिखाई देने लगा, जिसे वर्षों से किसी ने नहीं खोला था।
कमरे के बीचोंबीच लकड़ी की एक कुर्सी थी और उस पर एक लड़की का कंकाल बैठा था।
कंकाल का एक हाथ सामने रखी मेज पर था। उसी मेज पर एक पुरानी डायरी भी पड़ी थी।
कमरे में इतनी घुटन थी कि पुलिस अधिकारी भी कुछ क्षण वहां खड़े नहीं रह पाए। वर्षों से बंद उस जगह की हालत देखकर सभी हैरान थे।
पुरानी डायरी और राघव की सच्ची तस्वीर
पुलिस अधिकारी ने मेज पर रखी डायरी उठाई और उसका पहला पन्ना सावधानी से खोला।
पहले पन्ने पर सिर्फ एक नाम लिखा था। उसे देखकर नेहा की सांस रुक गई।
मीरा
डायरी में मीरा की जिंदगी, राघव के साथ उसके रिश्ते और उस भयानक रात का पूरा विवरण लिखा था।
हर पन्ने पर उसकी मदद की पुकार, दरवाजा पीटने की आवाज और राघव से बाहर निकालने की विनती दर्ज थी।
एक जगह लिखा था कि अगर राघव कभी लौटेगा, तो मीरा उसे पहचान लेगी।
“नाम बदल सकता है, चेहरा बदल सकता है, लेकिन उसका पाप उसे खुद पहचान लेगा।”
डायरी के बीच एक पुरानी तस्वीर रखी थी। उसमें एक युवक खड़ा था और तस्वीर के नीचे राघव का नाम लिखा था।
तस्वीर समय के साथ खराब हो चुकी थी, लेकिन उसमें चेहरा साफ पहचान में आ रहा था।
वह चेहरा बिल्कुल समीर का था।
अब कोई शक नहीं बचा था कि समीर और राघव एक ही व्यक्ति थे। नेहा को समझ आ गया कि वह इतने दिनों तक एक ऐसे इंसान के साथ रह रही थी, जिसने अपने ही हाथों से अपनी पत्नी की जान ले ली थी।
मीरा की आत्मा ने पुलिस और नेहा के सामने आखिरी बात कही
पुलिस अधिकारी डायरी पढ़ ही रहे थे कि कमरे का तापमान अचानक बहुत नीचे गिर गया।
कंकाल के पीछे एक धुंधली आकृति दिखाई दी। कुछ ही क्षणों में वह एक औरत का रूप लेने लगी।
वह मीरा की आत्मा थी, जिसे पहली बार पुलिस और नेहा दोनों ने साफ देखा।
मीरा ने अपने कंकाल की तरफ देखा और फिर नेहा की ओर शांत नजरों से देखने लगी।
उसने कहा कि उसका बदला पूरा हो चुका है और अब उसे इस दुनिया में रुकने की जरूरत नहीं है। उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था, बल्कि ऐसा सुकून था, जैसे वर्षों से अधूरी रही कोई बात आखिर पूरी हो गई हो।
“इसने मुझे बहुत धोखा दिया था। इसने मुझे दीवार में चुनवा दिया था। आज मेरा बदला पूरा हो गया।”
मीरा ने दीवार की तरफ देखा और कहा कि राघव अब हमेशा उसी कमरे में रहेगा, जहां उसने उसे मरने के लिए छोड़ दिया था।
फिर उसने नेहा से कहा कि अब वह जा रही है और उसे इस घर में कभी वापस नहीं आना चाहिए।
इतना कहते ही मीरा की आकृति धीरे-धीरे धुंधली होने लगी। कुछ ही क्षणों में वह पूरी तरह गायब हो गई।
दीवार पर चेतावनी लिखी और कमरा हमेशा के लिए बंद हो गया
मीरा के गायब होते ही कमरे में अचानक तेज तूफान शुरू हो गया। वहां रखी चीजें हवा में उड़ने लगीं।
पुलिस अधिकारी और नेहा खुद को संभाल नहीं पाए। तेज हवा उन्हें टूटे हुए रास्ते से बाहर की ओर ले गई।
अगले ही पल अंदर जोरदार धमाका हुआ और टूटी दीवार की ईंटें अपने आप वापस जुड़ने लगीं।
कुछ ही सेकंड में दीवार फिर पहले जैसी बन गई और कमरे का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। ऐसा लगा, जैसे किसी अदृश्य ताकत ने उस कमरे को दोबारा दुनिया से अलग कर दिया हो।
दीवार पर अचानक काले अक्षरों में एक चेतावनी दिखाई दी। उसे देखकर पुलिस अधिकारी भी चुप रह गए।
“जो इस दीवार को तोड़ेगा और अंदर जाएगा, वह अंदर ही फंसकर रह जाएगा।”
उसके बाद उस कमरे और पूरे घर को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लोगों को वहां जाने से रोक दिया गया।
लेकिन डर यहीं खत्म नहीं हुआ
नेहा उस घर से दूर चली गई, लेकिन कुछ दिनों बाद उसे हर रात एक ही डरावना सपना आने लगा।
सपने में वह उसी पुराने घर के सामने खड़ी होती और बंद दीवार के पीछे से आवाज सुनती।
पहले तीन दस्तकें होतीं, फिर दीवार पर नाखून घिसने की आवाज आने लगती।
ठक…
ठक…
ठक…
फिर अंधेरे के भीतर से समीर की आवाज आती और वह नेहा को बाहर निकालने के लिए पुकारता।
“नेहा…”
“मुझे बाहर निकालो…”
“मैं अभी भी यहीं हूं…”
हर बार नेहा डरकर नींद से उठ जाती और अपने कमरे की दीवार को देखने लगती।
लेकिन एक रात सपना खत्म होने के बाद भी उसके कमरे की दीवार से वही खर-खर की आवाज आने लगी। इस बार वह आवाज सपने में नहीं, बल्कि उसकी अपनी दीवार के अंदर से आ रही थी।
नेहा ने कांपते हुए दीवार की तरफ देखा। वहां गीली उंगलियों के निशान धीरे-धीरे उभर रहे थे।
फिर उन निशानों के बीच एक नाम दिखाई दिया।
समीर
उस नाम के नीचे सिर्फ एक वाक्य लिखा था। उसे देखकर नेहा की चीख निकल गई।
“नेहा… मुझे बाहर निकालो…”
तभी कमरे के अंधेरे कोने से मीरा की बहुत धीमी आवाज आई। वह नेहा को रोक रही थी।
“उसे बाहर मत निकालना…”
नेहा समझ गई कि समीर की कहानी खत्म नहीं हुई थी, क्योंकि उसकी आवाज अब भी किसी दीवार के भीतर कैद थी।
कभी-कभी दीवारें सिर्फ ईंटों से नहीं बनतीं। उनमें दबे हुए पाप और अधूरी चीखें भी कैद रहती हैं।
और अगर रात 2:30 बजे तुम्हारी दीवार के अंदर से कोई तुम्हारा नाम लेकर पुकारे, तो जवाब देने से पहले एक बार जरूर सोचना।
क्योंकि हो सकता है कि दीवार के पीछे कोई मदद के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें अपने अंधेरे में बुलाने के लिए इंतजार कर रहा हो।
सबसे खतरनाक बात यह है कि कुछ आवाजें दीवार के अंदर बंद होने के बाद भी बाहर तक पहुंचती रहती हैं।
कहानी यहीं खत्म होती है, लेकिन रात 2:30 बजे दीवार से आती किसी अनजान आवाज को कभी हल्के में मत लेना।




