कॉलेज से शुरू हुई मीरा और साहिल की प्रेम कहानी, और घमंड में डूबी मीरा ने साहिल को क्यों ठुकराया? कैसे बदलते समय ने मीरा को रिश्तों की असली कीमत समझाई।
एक गरीब लड़के का संघर्ष, सपनों की उड़ान और सच्चे प्यार का इंतजार इस कहानी को खास बनाता है।
पाँच साल बाद जब दोनों फिर मिले, तो पुरानी यादों ने दिल को भावनाओं से भर दिया।
साहिल ने बदला नहीं लिया, बल्कि मीरा के पिता की जान बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की।
तो आपको इस “Sad Love Story In Hindi” की कहानी में सच्चा प्यार, घमंड, पछतावा, विश्वास, और झगड़ा यह सब पढ़ने को मिलेगा।
जब घमंड ने सच्चे दिल को पहचानने से इंकार कर दिया। Sad Love Story In Hindi
सुबह की हल्की धूप पूरे शहर पर फैल रही थी। सड़कें लोगों की आवाजाही से भर चुकी थीं और हर तरफ़ नई शुरुआत की खुशबू महसूस हो रही थी।
शहर के सबसे बड़े सरस्वती मेडिकल कॉलेज में आज नए सत्र का पहला दिन था। कैंपस छात्रों की हँसी और उत्साह से गूंज रहा था।
कोई नए दोस्तों से मिल रहा था, कोई अपने विभाग की तलाश कर रहा था और कोई कॉलेज की सुंदर इमारतों की तस्वीरें ले रहा था।
इसी भीड़ के बीच एक सफेद कार कॉलेज के मुख्य गेट पर आकर रुकी। जैसे ही कार का दरवाज़ा खुला, कई नज़रें उसी तरफ़ घूम गईं।
कार से उतरी एक बेहद खूबसूरत लड़की। लंबे काले बाल, हल्की मुस्कान, महंगे कपड़े और चेहरे पर अलग ही आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था।
उसका नाम मीरा कपूर था। पूरा कॉलेज उसके आने की चर्चा पहले ही सुन चुका था। कई छात्र उसे देखने के लिए वहीं रुक गए।
मीरा जितनी सुंदर थी, उससे कहीं ज़्यादा उसे अपने अमीर होने का घमंड था। उसे लगता था कि दुनिया में पैसों से बढ़कर कुछ नहीं।
उसके पिता महेंद्र कपूर शहर के बड़े कारोबारी थे। उनके पास दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन अच्छी सीख देने का समय कभी नहीं था।
महेंद्र अक्सर मीरा से कहते, “बेटा, हमेशा अमीर लोगों के साथ रहना। गरीब लोग केवल मदद माँगना जानते हैं।”
बचपन से यही बातें सुनते-सुनते मीरा के मन में भी अमीरी और गरीबी की दीवार खड़ी हो चुकी थी।
उसी कॉलेज में एक और छात्र पढ़ता था। उसका नाम साहिल वर्मा था। उसके कपड़े साधारण थे, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे।
साहिल के पिता एक छोटी-सी नौकरी करते थे और माँ घरों में सिलाई करके परिवार की मदद करती थीं।
घर की हालत अच्छी नहीं थी। कई बार फीस भरने के लिए पूरे परिवार को महीनों तक खर्च कम करना पड़ता था।
लेकिन साहिल ने कभी अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मेहनत थी।
वह पढ़ाई में पूरे कॉलेज का सबसे होशियार छात्र माना जाता था। हर शिक्षक उसकी तारीफ़ करते नहीं थकता था।
साहिल का चेहरा भी बहुत आकर्षक था। लंबा कद, शांत स्वभाव और हमेशा मुस्कुराता चेहरा उसे सबसे अलग बनाता था।
कॉलेज की कई लड़कियाँ उससे दोस्ती करना चाहती थीं, लेकिन साहिल की नज़र हमेशा सिर्फ़ एक चेहरे को ढूँढती थी।
वह चेहरा था मीरा का।
पहले दिन से ही साहिल को मीरा अच्छी लगने लगी थी। उसे मीरा की सुंदरता से ज़्यादा उसकी मुस्कान पसंद थी।
उसे नहीं पता था कि जिस लड़की को वह दिल से चाहता है, वही लड़की उसे सबसे कम समझेगी।
जिस दोस्ती में केवल एक दिल सच्चा था

कुछ ही दिनों में पूरी कक्षा एक-दूसरे को पहचानने लगी। धीरे-धीरे सभी छात्रों के अपने-अपने दोस्त बन गए।
मीरा हमेशा अमीर घरों से आए छात्रों के साथ बैठती थी। उसकी टोली में हमेशा हँसी और दिखावा ज़्यादा होता था।
साहिल हमेशा पहली बेंच पर बैठता। उसकी कॉपी, किताबें और नोट्स पूरे कॉलेज में सबसे अच्छे माने जाते थे।
एक दिन परीक्षा की घोषणा हुई। पूरी कक्षा में हलचल मच गई। कई छात्रों को पढ़ाई की चिंता होने लगी।
मीरा भी परेशान दिखाई दे रही थी। उसने पूरे महीने ठीक से पढ़ाई ही नहीं की थी।
उसकी सहेली रिया ने मुस्कुराकर कहा, “चिंता क्यों करती हो? साहिल है ना, उससे नोट्स ले लेना।”
मीरा बिना कुछ सोचे साहिल की सीट के पास पहुँची। उसने पहली बार उससे ढंग से बात की।
“साहिल, तुम्हारे नोट्स सबसे अच्छे होते हैं। मेरे लिए भी बना दोगे?”
साहिल ने बिना एक पल सोचे मुस्कुराकर कहा, “ज़रूर, कल सुबह मिल जाएँगे।”
उस रात साहिल देर तक पढ़ता रहा। फिर उसने अपनी पढ़ाई छोड़कर मीरा के लिए अलग से सुंदर नोट्स लिखने शुरू किए।
वह हर पन्ना साफ़ लिखता, ज़रूरी बातों को अलग रंग से दिखाता और कठिन सवालों के आसान उत्तर भी जोड़ देता।
रात के दो बज चुके थे। उसकी माँ कमरे में आईं और बोलीं, “बेटा, अब सो भी जाओ।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “बस पाँच मिनट और माँ। किसी की पढ़ाई आसान हो जाएगी।”
माँ ने नोट्स देखे और पूछा, “ये किसके लिए बना रहे हो?”
साहिल हल्का मुस्कुराया और बोला, “एक दोस्त के लिए।”
अगली सुबह मीरा कॉलेज पहुँची। साहिल ने मुस्कुराते हुए नोट्स उसकी तरफ़ बढ़ा दिए।
मीरा ने नोट्स देखे और हैरान रह गई। हर पन्ना इतना सुंदर था कि जैसे किसी किताब से निकाला गया हो।
उसने बस इतना कहा, “अच्छे हैं।”
इतना बोलकर वह अपनी सहेलियों के पास चली गई। उसने धन्यवाद तक नहीं कहा।
साहिल उसे जाते हुए देखता रहा। उसके चेहरे पर फिर भी मुस्कान थी।
साहिल का दोस्त अमन पास आकर बोला, “यार, वह तुम्हारा इस्तेमाल करती है।”
साहिल हँसते हुए बोला, “अगर मेरी मेहनत से उसकी पढ़ाई आसान हो जाती है, तो मुझे खुशी मिलती है।”
अमन ने सिर हिलाया और कहा, “तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है। लेकिन हर कोई उसकी कीमत नहीं समझेगा।”
दिन बीतते गए। हर परीक्षा से पहले मीरा साहिल के पास आ जाती।
“साहिल… नोट्स तैयार हैं?”
और हर बार साहिल मुस्कुराकर कहता, “हाँ, तुम्हारे लिए हमेशा तैयार हैं।”
कई बार साहिल अपनी ज़रूरी पढ़ाई छोड़ देता, लेकिन मीरा के नोट्स कभी अधूरे नहीं रहने देता।
एक बार उसे तेज़ बुखार था। फिर भी वह पूरी रात जागकर मीरा के लिए नोट्स तैयार करता रहा।
अगले दिन उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन नोट्स पूरे थे।
मीरा ने नोट्स लिए और बोली, “अच्छा हुआ समय पर दे दिए।” साहिल बस मुस्कुराया। उसने अपनी तबीयत का ज़िक्र तक नहीं किया।
उधर मीरा अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में हँस रही थी। उसे यह भी नहीं पता था कि कोई उसके लिए रातभर जागा था।
धीरे-धीरे साहिल का प्यार और गहरा होता गया।
वह कभी मीरा से अपने दिल की बात नहीं कहता था। उसे डर था कि कहीं दोस्ती भी न टूट जाए।
उसे बस इतना अच्छा लगता था कि दिन में एक बार मीरा उससे बात कर ले।
उधर मीरा के लिए साहिल सिर्फ़ एक अच्छा छात्र था, जिससे ज़रूरत पड़ने पर मदद ली जा सकती थी।
उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसकी एक मुस्कान के लिए अपनी पूरी रातें जागकर गुज़ार देता है।
इसी बीच कॉलेज में एक बड़ी घोषणा हुई।
अगले महीने पूरे विभाग की तीन दिन की पहाड़ी पिकनिक रखी गई थी।
पूरी कक्षा खुशी से झूम उठी। हर कोई उस सफ़र की बातें करने लगा।
मीरा अपनी सहेलियों के साथ घूमने की योजना बनाने लगी।
दूसरी तरफ़ साहिल पहली बार मन ही मन मुस्कुराया।
उसे लगा, शायद इस सफ़र में उसे मीरा के साथ कुछ अच्छे पल बिताने का मौका मिल जाए।
उसे बिल्कुल नहीं पता था कि यही पिकनिक उसकी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद भी बनेगी और सबसे बड़ा दर्द भी।
पिकनिक की सुबह और एक अनकही खुशी

पिकनिक का दिन आखिर आ ही गया। सुबह से ही पूरे कॉलेज में अलग तरह का उत्साह दिखाई दे रहा था।
कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर तीन बड़ी बसें खड़ी थीं। हर छात्र के चेहरे पर मुस्कान और आँखों में घूमने की खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।
कोई अपने बैग की ज़िप बंद कर रहा था, कोई मोबाइल से तस्वीरें ले रहा था और कोई दोस्तों को आवाज़ देकर बुला रहा था।
अध्यापक बार-बार छात्रों के नाम पुकार रहे थे। सभी को समय पर बस में बैठने की सलाह दी जा रही थी।
साहिल सबसे पहले कॉलेज पहुँच गया था। उसके कंधे पर पुराना बैग था और हाथ में पानी की छोटी बोतल थी।
वह बार-बार कॉलेज के गेट की तरफ़ देख रहा था। शायद उसे किसी खास का इंतज़ार था।
कुछ ही मिनट बाद एक चमचमाती कार कॉलेज के सामने आकर रुकी। कार का दरवाज़ा खुला और मीरा बाहर उतरी।
आज उसने हल्के गुलाबी रंग की ड्रेस पहन रखी थी। खुले बाल हवा के साथ लहरा रहे थे।
पूरा कॉलेज कुछ पल के लिए उसे देखता ही रह गया। कई लड़के उसकी तस्वीरें लेने लगे।
साहिल भी उसे देख रहा था, लेकिन उसकी नज़रों में लालच नहीं, केवल सच्चा अपनापन था।
मीरा अपनी सहेलियों रिया, पूजा और कृतिका के साथ हँसते हुए बस की तरफ़ बढ़ गई।
उसी समय करण, युवराज और विवेक भी वहाँ पहुँचे। तीनों की नज़रें लगातार मीरा पर ही टिकी हुई थीं।
साहिल ने उन तीनों को देखा तो उसके मन में हल्की-सी बेचैनी होने लगी।
उसे उनकी आदतों के बारे में पहले से पता था। इसलिए वह मन ही मन सतर्क हो गया।
कुछ देर बाद सभी छात्र अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए। बस धीरे-धीरे कॉलेज से निकल पड़ी।
बस का सफ़र और साहिल की खामोश मोहब्बत
बस के अंदर हँसी और शोर का अलग ही माहौल था। कोई गाना गा रहा था, कोई मज़ाक कर रहा था।
अध्यापक ने मुस्कुराकर कहा, “आज पढ़ाई की नहीं, केवल खुश रहने की इजाज़त है।”
बस में बैठे सभी छात्र ज़ोर-ज़ोर से तालियाँ बजाने लगे। पूरा माहौल खुशियों से भर गया।
कुछ ही देर में अंताक्षरी शुरू हो गई। दोनों तरफ़ की टीम एक-दूसरे को हराने की कोशिश कर रही थी।
रिया ने ज़िद करके मीरा को गाना गाने के लिए खड़ा कर दिया।
पहले तो मीरा मुस्कुराकर मना करती रही, लेकिन फिर उसने धीरे-धीरे गाना शुरू किया।
उसकी मीठी आवाज़ सुनकर पूरी बस तालियों से गूँज उठी। अध्यापक भी मुस्कुराने लगे।
साहिल पूरे समय चुपचाप उसे देख रहा था। उसके चेहरे पर सच्ची खुशी दिखाई दे रही थी।
अमन ने धीरे से साहिल के कान में कहा, “यार, तू भी गा दे। तेरी आवाज़ भी अच्छी है।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “आज उसे खुश देखकर ही मेरा दिन बन गया है।”
अमन हँस पड़ा। वह जानता था कि साहिल की दुनिया बस मीरा तक ही सीमित थी।
रास्ते में बस एक सुंदर ढाबे पर रुकी। सभी छात्र नाश्ता करने के लिए नीचे उतर गए।
कोई चाय पी रहा था, कोई समोसे खा रहा था और कोई तस्वीरें खिंचवा रहा था।
मीरा अपने दोस्तों के साथ हँसते हुए बातें कर रही थी। उसे साहिल की तरफ़ देखने की भी फुर्सत नहीं थी।
साहिल ने दूर से देखा कि मीरा अपनी पानी की बोतल बस में ही भूल गई है।
वह बिना कुछ कहे बस में गया, बोतल उठाई और धीरे से मीरा के पास पहुँचा।
“शायद यह तुम्हारी है।” मीरा ने बोतल ली और बस इतना कहा, “ओह… ठीक है।”
वह फिर अपने दोस्तों की बातों में व्यस्त हो गई। साहिल मुस्कुराकर वापस चला गया।
अमन यह सब देख रहा था। उसने फिर पूछा, “तुझे बुरा नहीं लगता?”
साहिल ने धीरे से जवाब दिया, “जिससे सच्चा प्यार हो, उसकी छोटी-सी मुस्कान भी बहुत बड़ी खुशी होती है।”
करीब चार घंटे का सफ़र पूरा होने के बाद बसें पहाड़ों के बीच बने सुंदर पर्यटन स्थल पर पहुँच गईं।
चारों तरफ़ ऊँचे पहाड़, हरे पेड़ और ठंडी हवा हर किसी का मन मोह रही थी।
दूर बहती नदी की आवाज़ पूरे माहौल को और भी सुंदर बना रही थी।
सभी छात्र बस से उतरते ही खुशी से इधर-उधर दौड़ने लगे। हर कोई इस पल को अपने कैमरे में कैद करना चाहता था।
पिकनिक की मस्ती, तस्वीरें और आने वाला तूफ़ान
अध्यापकों ने सभी छात्रों को एक साथ बुलाया और कहा, “कोई भी अकेले कहीं नहीं जाएगा।”
सबने एक साथ “जी सर” कहा और घूमने निकल पड़े।
पहले सभी ने मिलकर ग्रुप फोटो खिंचवाई। फिर दोस्तों ने अलग-अलग तस्वीरें लेना शुरू कर दिया।
रिया ने मीरा का हाथ पकड़कर कहा, “चल, नदी के पास तस्वीर लेते हैं।”
मीरा मुस्कुराते हुए वहाँ चली गई। उसकी तस्वीरें देखकर सभी उसकी तारीफ़ करने लगे।
साहिल दूर खड़ा बस उसे खुश होते हुए देख रहा था।
कुछ देर बाद कॉलेज की तरफ़ से कई मज़ेदार खेल शुरू हुए।
रस्साकशी, दौड़ और छोटे-छोटे खेलों में सभी छात्र हिस्सा लेने लगे।
साहिल ने कई प्रतियोगिताएँ जीत लीं। अध्यापक उसकी मेहनत की तारीफ़ कर रहे थे।
मीरा भी यह सब देख रही थी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
दोपहर में सभी ने साथ बैठकर खाना खाया। हँसी-मज़ाक का माहौल पहले से भी अच्छा हो गया।
खाना खत्म होने के बाद अध्यापक कुछ देर आराम करने चले गए।
उधर करण, युवराज और विवेक चुपके से जंगल की तरफ़ निकल गए।
कुछ देर बाद तीनों वापस लौटे। उनके हाथों में ठंडे पेय की बोतलें थीं, लेकिन उनमें शराब मिली हुई थी।
धीरे-धीरे तीनों की बातें बदलने लगीं। उनकी नज़र बार-बार मीरा पर जाकर रुक रही थी।
साहिल ने यह सब दूर से देख लिया। उसके मन की बेचैनी अब और बढ़ने लगी।
उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। वह बिना किसी को बताए चुपचाप मीरा के आसपास ही रहने लगा।
उधर मीरा और उसकी सहेलियाँ नदी के दूसरी तरफ़ बने फूलों के बगीचे की ओर बढ़ रही थीं।
उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कुछ ही देर बाद उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना पल आने वाला है।
पिकनिक पर लड़कों ने मीरा को छेड़ा

नदी के किनारे बना फूलों का बगीचा बहुत सुंदर था। चारों तरफ़ रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा मन को छू रही थी।
मीरा, रिया, पूजा और कृतिका हँसते हुए तस्वीरें खिंचवा रही थीं। हर कोई उस पल को यादगार बनाना चाहता था।
थोड़ी देर बाद रिया ने कहा, “मैं पानी की बोतल लेकर आती हूँ, तुम लोग यहीं रुकना।”
पूजा और कृतिका भी पास की दुकान की तरफ़ चली गईं। कुछ ही पलों में मीरा वहाँ अकेली रह गई।
मीरा अपने मोबाइल से फूलों की तस्वीरें लेने लगी। उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसे दूर से देख रहा है।
दूसरी तरफ़ करण, युवराज और विवेक शराब के नशे में उसी तरफ़ बढ़ रहे थे। उनके चेहरे पर बुरी नीयत साफ़ दिखाई दे रही थी।
साहिल दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसके मन की बेचैनी अब डर में बदल चुकी थी।
वह तेज़ कदमों से उसी दिशा में चल पड़ा, लेकिन तब तक तीनों लड़के मीरा के पास पहुँच चुके थे।
करण मुस्कुराकर बोला, “इतनी जल्दी क्या है? थोड़ी देर हमारे साथ भी बातें कर लो।”
मीरा ने बिना उसकी तरफ़ देखे कहा, “रास्ता छोड़ो, मुझे जाना है।”
युवराज हँसते हुए बोला, “आज इतना घमंड मत दिखाओ। आज कोई तुम्हें बचाने नहीं आएगा।”
मीरा घबरा गई। उसने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन तीनों ने उसका रास्ता घेर लिया।
उसके हाथ काँपने लगे। उसने ज़ोर से कहा, “रास्ता छोड़ो… नहीं तो मैं चिल्लाऊँगी।”
विवेक हँसकर बोला, “चिल्ला लो, यहाँ तुम्हारी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं आएगा।”
मीरा की आँखों में डर साफ़ दिखाई देने लगा। उसने पूरी ताकत से चिल्लाया, “बचाओ… कोई है… बचाओ!”
उसकी आवाज़ पहाड़ों के बीच गूँज उठी।
कुछ ही दूरी पर खड़ा साहिल यह आवाज़ सुनते ही बिजली की तरह दौड़ पड़ा।
उसने बिना एक पल गँवाए करण का हाथ पकड़कर ज़ोर से पीछे धक्का दिया।
करण सीधे ज़मीन पर गिर पड़ा। उसके हाथ से बोतल दूर जाकर टूट गई।
युवराज गुस्से से चिल्लाया, “तू बीच में क्यों आया?”
साहिल ने मीरा को अपने पीछे करते हुए कहा, “जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई इसे हाथ भी नहीं लगा सकता।”
यह सुनते ही तीनों लड़के साहिल पर टूट पड़े।
साहिल ने बचाया मगर मीरा ने उसे ही मारा थप्पड़
करण ने साहिल के चेहरे पर ज़ोरदार मुक्का मारा। उसके होंठ से तुरंत खून निकल आया।
साहिल पीछे नहीं हटा। उसने फिर एक लड़के को धक्का देकर मीरा से दूर कर दिया।
मीरा डर के कारण काँप रही थी। उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
युवराज ने पीछे से लकड़ी उठाकर साहिल पर वार किया। साहिल का कंधा ज़ोर से चोटिल हो गया।
दर्द के बावजूद उसने मीरा की तरफ़ मुड़कर कहा, “डरो मत… मैं हूँ।”
यह सुनकर मीरा कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप हो गई।
तीनों लड़के अब मिलकर साहिल को मारने लगे, लेकिन वह लगातार उनका सामना करता रहा।
उसी समय दूर से कुछ छात्रों की आवाज़ सुनाई दी। शायद सभी लोग उसी तरफ़ आ रहे थे।
करण घबरा गया। उसने जल्दी से अपनी चाल चल दी।
वह ज़ोर से चिल्लाया, “सर… जल्दी आइए… साहिल मीरा को परेशान कर रहा है।”
इतने में अध्यापक और कई छात्र वहाँ पहुँच गए।
सभी ने देखा कि साहिल के कपड़े फटे हुए थे, चेहरे पर खून था और मीरा डरी हुई खड़ी थी।
अध्यापक कुछ समझ पाते, उससे पहले करण फिर बोला, “हम लोग तो मीरा को बचाने आए थे।”
मीरा अभी भी डर के कारण कुछ समझ नहीं पा रही थी।
उसने केवल इतना देखा कि साहिल उसके बहुत पास खड़ा था और उसका हाथ पकड़े हुए था।
डर और घबराहट में उसने बिना कुछ सोचे साहिल के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ मार दिया।
पूरा बगीचा एकदम शांत हो गया।
साहिल ने धीरे से अपना हाथ पीछे कर लिया। उसकी आँखों में दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह थप्पड़ उसके चेहरे पर नहीं, सीधे उसके दिल पर लगा था।
अमन दौड़ता हुआ वहाँ पहुँचा और चिल्लाया, “मीरा… तुमने क्या कर दिया?”
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
करण ने मौका देखकर फिर साहिल को धक्का दिया। वह पत्थर से टकराकर नीचे गिर पड़ा।
उसके माथे से खून बहने लगा। फिर भी उसने किसी के खिलाफ़ एक शब्द नहीं बोला।
अध्यापक ने गुस्से में पूछा, “साहिल, सच क्या है?”
साहिल ने धीरे से जवाब दिया, “सर… किसी को सज़ा मत दीजिए… बस सबको वापस ले चलिए।”
अमन हैरान रह गया।
वह बोला, “यार, सच बता दे। तूने मीरा की जान बचाई है।”
साहिल ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा, “अगर आज सच बोलने से मीरा और परेशान होगी, तो यह सच मेरे पास ही रहने दो।”
यह सुनकर अमन की आँखें भी भर आईं।
मीरा दूर खड़ी सब सुन रही थी। उसके मन में पहली बार हल्की-सी उलझन पैदा हुई।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि अगर साहिल गलत था, तो वह किसी का नाम क्यों नहीं ले रहा।
मीरा को पूरी रात नींद नहीं आई
उस शाम पिकनिक का पूरा माहौल बदल चुका था।
जहाँ सुबह हँसी सुनाई दे रही थी, वहीं अब हर कोई चुप था।
साहिल ने अपने चेहरे की चोट छिपाने की कोशिश की, लेकिन दर्द उसकी आँखों में साफ़ दिखाई दे रहा था।
रात को सभी छात्र रिज़ॉर्ट लौट आए।
खाना लगा था, लेकिन साहिल ने एक निवाला भी नहीं खाया।
वह अकेला छत पर जाकर बैठ गया।
ऊपर चमकते तारों को देखते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
वह धीरे से बोला, “भगवान… मैंने तो बस उसकी रक्षा की थी। शायद मेरी किस्मत में उसका भरोसा कभी था ही नहीं।”
उधर मीरा अपने कमरे में बैठी थी।
बार-बार उसे साहिल का खून से भरा चेहरा याद आ रहा था।
उसके कानों में साहिल की वही आवाज़ गूँज रही थी… “डरो मत… मैं हूँ।” उस रात मीरा पहली बार चैन से सो नहीं सकी।
उसे लग रहा था कि इस पूरी घटना में कहीं न कहीं कोई सच्चाई छिपी हुई है।
लेकिन उसका घमंड अब भी उसे सच तक पहुँचने नहीं दे रहा था।
उसे बिल्कुल पता नहीं था कि अगले ही कुछ दिनों में उसकी और साहिल की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है।
कॉलेज का आख़िरी दिन और हमेशा का बिछड़ना

पिकनिक से लौटने के बाद कॉलेज का माहौल पहले जैसा नहीं रहा। साहिल पहले से भी ज़्यादा शांत रहने लगा था।
उसने मीरा से कभी शिकायत नहीं की। न थप्पड़ का ज़िक्र किया, न उस दिन की मारपीट का।
हर सुबह वह समय पर कॉलेज आता, अपनी पढ़ाई करता और चुपचाप घर लौट जाता।
अमन कई बार उससे कहता, “यार, एक बार मीरा को पूरी सच्चाई बता दे।”
साहिल हर बार मुस्कुराकर जवाब देता, “जिस रिश्ते में भरोसा नहीं बचा, वहाँ सफ़ाई देने से भी कुछ नहीं बदलता।”
उधर मीरा भी अब पहले जैसी नहीं रही थी। वह कई बार चुपचाप साहिल को देखती रहती।
उसे बार-बार वही सवाल परेशान करता था कि अगर साहिल गलत था, तो उसने किसी का नाम क्यों नहीं लिया।
एक दिन कॉलेज के एक चपरासी ने मीरा को पूरी घटना सच-सच बता दी।
उसने कहा, “बेटी, उस दिन मैंने अपनी आँखों से देखा था। साहिल ने तुम्हें बचाया था।”
यह सुनते ही मीरा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसके हाथ काँपने लगे और आँखें भर आईं।
उसे अपना वह थप्पड़ बार-बार याद आने लगा। पहली बार उसे अपने घमंड पर शर्म महसूस हुई।
अगले ही दिन वह साहिल के पास पहुँची। उसकी आवाज़ काँप रही थी।
उसने धीरे से कहा, “साहिल… मुझे तुमसे कुछ कहना है।” साहिल मुस्कुराया और बोला, “कहो, कोई नोट्स चाहिए क्या?”
मीरा की आँखों से आँसू निकल पड़े। उसने कहा, “मुझे माफ़ कर दो। उस दिन मैंने बहुत बड़ी गलती की।”
साहिल ने उसकी तरफ़ देखा और शांत आवाज़ में बोला, “गलती इंसानों से ही होती है, मीरा।”
मीरा रोते हुए बोली, “तुमने मेरी जान बचाई और मैंने तुम्हें थप्पड़ मार दिया।”
साहिल ने बात बदलते हुए कहा, “अब उस बात को भूल जाओ। तुम्हारी पढ़ाई ज़्यादा ज़रूरी है।”
मीरा कुछ और कहना चाहती थी, लेकिन साहिल वहाँ से चला गया।
उस दिन पहली बार मीरा को एहसास हुआ कि उसने केवल एक दोस्त नहीं, बल्कि एक सच्चे इंसान का दिल दुखाया है।
समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। देखते ही देखते अंतिम वर्ष की परीक्षाएँ भी पूरी हो गईं।
पूरे कॉलेज में विदाई समारोह की तैयारियाँ शुरू हो गईं।
हर छात्र खुश भी था और भावुक भी। चार साल की यादें अब बस यादें बनने वाली थीं।
विदाई वाले दिन पूरा कॉलेज रंग-बिरंगे कपड़ों से सजा हुआ था। हर कोई तस्वीरें खिंचवा रहा था।
मीरा भी अपनी सहेलियों के साथ तस्वीरें ले रही थी, लेकिन उसकी नज़र बार-बार साहिल को ढूँढ रही थी।
साहिल दूर खड़ा अपने दोस्तों के साथ आख़िरी तस्वीर खिंचवा रहा था।
मीरा का फोन नंबर, जो कभी नहीं मिला
कार्यक्रम खत्म होने के बाद सभी छात्र एक-दूसरे से गले मिल रहे थे।
कोई यादगार बातें कर रहा था, कोई मोबाइल नंबर लिख रहा था और कोई रो रहा था।
साहिल कई मिनट तक दूर खड़ा मीरा को देखता रहा। उसके मन में एक ही बात चल रही थी।
वह सोच रहा था, “आज नहीं पूछा, तो शायद फिर कभी उससे मुलाकात नहीं होगी।”
आख़िर उसने हिम्मत जुटाई और धीरे-धीरे मीरा के पास चला गया।
मीरा ने उसे सामने देखा, लेकिन कुछ नहीं बोली।
साहिल ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “मीरा, आज कॉलेज का आख़िरी दिन है।”
मीरा ने सिर हिलाया और बोली, “हाँ, चार साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला।”
साहिल कुछ पल चुप रहा। फिर उसने हिम्मत करके कहा, “अगर तुम्हें बुरा न लगे… तो अपना मोबाइल नंबर दे दोगी?”
मीरा कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।
उसके मन में अभी भी अमीरी और गरीबी की वही पुरानी दीवार खड़ी थी।
उसने धीरे लेकिन ठंडे स्वर में कहा, “मुझे नहीं लगता इसकी ज़रूरत है।”
साहिल ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसके दिल के अंदर जैसे कुछ टूट गया।
वह बोला, “कोई बात नहीं… मैंने बस यूँ ही पूछ लिया था।”
मीरा ने कुछ नहीं कहा।
उसी समय उसकी सहेलियाँ उसे बुलाने लगीं और वह उनके साथ चली गई।
साहिल ने उसे जाते हुए देखा, लेकिन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया।
अमन उसके पास आया और बोला, “यार, किसी और से नंबर ले ले। पूरी क्लास के पास उसका नंबर है।”
साहिल ने तुरंत सिर हिलाया।
वह बोला, “नहीं अमन। अगर वह खुद कभी मुझसे बात करना चाहेगी, तभी बात होगी।”
अमन ने पूछा, “अगर वह कभी नहीं आई तो?”
साहिल ने आसमान की तरफ़ देखते हुए कहा, “तो मैं उसकी यादों के साथ ही खुश रहूँगा।”
उसने उसी पल मन ही मन एक फैसला कर लिया।
वह अब अपनी पूरी ज़िंदगी केवल अपने सपने को देगा।
उसे डॉक्टर बनना था।
उसे इतना बड़ा इंसान बनना था कि उसके माता-पिता हमेशा उस पर गर्व करें।
दूसरी तरफ़ मीरा अपनी चमक-दमक वाली दुनिया में लौट गई।
उसे लगा कि कॉलेज खत्म हुआ है, ज़िंदगी भी पहले जैसी ही रहेगी।
यह कहानी भी पढ़ें ⇒ जब हिम्मत नहीं थी, तो वादा क्यों किया? 📖
लेकिन किस्मत चुपचाप दोनों की कहानी का नया अध्याय लिख रही थी।
कुछ महीनों बाद साहिल मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार अंकों से सफल हो गया। वह शहर छोड़कर आगे की पढ़ाई के लिए चला गया।
उधर महेंद्र कपूर का घमंड धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा था।
शराब की आदत बढ़ती जा रही थी।
फिर उन्होंने जल्दी अमीर बनने के लालच में जुए और शेयर मार्केट में बिना सोचे-समझे बड़ी रकम लगानी शुरू कर दी।
मीरा कई बार उन्हें रोकती, लेकिन महेंद्र किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे।
उन्हें पूरा विश्वास था कि उनका पैसा कभी खत्म नहीं होगा।
उन्हें नहीं पता था कि आने वाले कुछ सालों में यही घमंड उनके पूरे परिवार की दुनिया बदल देगा।
जब किस्मत ने दोनों को फिर आमने-सामने खड़ा कर दिया
कॉलेज खत्म हुए लगभग पाँच साल बीत चुके थे। समय ने दोनों की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी थी।
साहिल अब शहर के सबसे बड़े अस्पताल का प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ बन चुका था। लोग उस पर आँख बंद करके भरोसा करते थे।
उसकी पहचान केवल एक सफल डॉक्टर की नहीं, बल्कि एक दयालु इंसान की भी थी। वह गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज भी करता था।
उधर महेंद्र कपूर की दुनिया पूरी तरह उजड़ चुकी थी। शराब, जुए और शेयर मार्केट की गलत आदतों ने सब कुछ छीन लिया था।
उनकी करोड़ों की संपत्ति धीरे-धीरे बिक गई। बड़ी कोठी, महंगी गाड़ियाँ और आलीशान दफ़्तर अब केवल पुरानी यादें बन चुके थे।
अब पूरा परिवार शहर के एक छोटे से किराए के मकान में रहता था। खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था।
मीरा पूरी तरह बदल चुकी थी। अब उसके चेहरे पर घमंड नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारियों की थकान दिखाई देती थी।
वह सुबह से शाम तक छोटे-मोटे काम करके अपने पिता की दवाइयों का खर्च जुटाती थी।
महेंद्र कई बार अपनी बेटी को चुपचाप देखते रहते। उन्हें अपनी हर गलती पर गहरा पछतावा होता था।
एक रात उन्होंने रोते हुए कहा, “बेटी, मेरी गलतियों ने तुम्हारी पूरी ज़िंदगी बदल दी।”
मीरा ने उनके हाथ पकड़ लिए और बोली, “पापा, अब पुरानी बातें याद मत कीजिए। हम फिर से सब ठीक करेंगे।”
महेंद्र की आँखों से आँसू बहने लगे। पहली बार उन्हें अपनी बेटी की असली ताकत समझ आई।
अगली सुबह अचानक महेंद्र के सीने में तेज़ दर्द उठा। उनकी साँसें तेज़ चलने लगीं और चेहरा पीला पड़ गया।
मीरा घबरा गई। उसने पड़ोसियों की मदद से तुरंत उन्हें ऑटो में बैठाया और अस्पताल की तरफ़ दौड़ पड़ी।
रास्ते भर वह भगवान से बस एक ही प्रार्थना करती रही, “मेरे पापा को कुछ मत होने देना।”
कुछ ही मिनटों में ऑटो शहर के सबसे बड़े अस्पताल के बाहर रुका।
मीरा लगभग दौड़ते हुए अपने पिता को अंदर लेकर गई।
वह रोते हुए बार-बार चिल्ला रही थी, “डॉक्टर… कोई डॉक्टर मेरे पापा को बचा लीजिए… प्लीज़ जल्दी कीजिए।”
उस दिन अस्पताल मरीजों से खचाखच भरा हुआ था। हर डॉक्टर किसी न किसी मरीज के इलाज में व्यस्त था।
मीरा की आवाज़ सुनकर भी कोई तुरंत उसके पास नहीं पहुँच सका।
वह अपने पिता के सीने पर सिर रखकर फूट-फूटकर रोने लगी।
उसकी आवाज़ पूरे अस्पताल में गूँज रही थी। “कोई तो मेरे पापा को बचा लीजिए… प्लीज़… मैं हाथ जोड़ती हूँ…”
उसी समय सफेद कोट पहने एक युवा डॉक्टर तेज़ कदमों से उसकी तरफ़ बढ़ा।
उसने गंभीर आवाज़ में कहा, “सभी लोग थोड़ा पीछे हटिए। मरीज को तुरंत इमरजेंसी में ले जाइए।”
मीरा ने रोते हुए सिर उठाया।
डॉक्टर ने जैसे ही उसका चेहरा देखा, वह एक पल के लिए बिल्कुल ठिठक गया।
उसके मुँह से अनायास निकला… “मीरा… तुम?” मीरा ने भी हैरानी से उसकी तरफ़ देखा।
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते ही रह गए।
फिर मीरा की आँखों से आँसू और तेज़ बहने लगे।
वह काँपती आवाज़ में बोली, “साहिल… अच्छा हुआ तुम मिल गए… मेरे पापा को बचा लो… मैं ज़िंदगी भर तुम्हारा एहसान नहीं भूलूँगी।”
साहिल ने बिना एक पल गँवाए कहा, “पहले अंकल का इलाज करते हैं। बाकी बातें बाद में करेंगे।”
उसने तुरंत डॉक्टरों की पूरी टीम को बुलाया।
महेंद्र को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
बाहर मीरा दोनों हाथ जोड़कर भगवान से लगातार प्रार्थना कर रही थी।
उसकी आँखों के सामने बचपन से लेकर आज तक की सारी बातें घूम रही थीं।
उसे अपना हर घमंड, हर गलती और साहिल के साथ किया गया हर व्यवहार याद आने लगा।
करीब दो घंटे बाद ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुला।
साहिल बाहर आया। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। मीरा दौड़कर उसके सामने पहुँची।
उसने घबराकर पूछा, “मेरे पापा… कैसे हैं?”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “अब खतरे की कोई बात नहीं है। अंकल बिल्कुल ठीक हो जाएँगे।”
यह सुनते ही मीरा की आँखों से राहत के आँसू बहने लगे।
वह खुशी में साहिल के सामने ही रो पड़ी।
भावनाओं में बहकर उसने पहली बार साहिल का हाथ पकड़ लिया।
काँपती आवाज़ में बोली, “थैंक यू… तुमने मेरे पापा को नई ज़िंदगी दे दी।”
साहिल ने धीरे से कहा, “डॉक्टर होने के नाते यह मेरा फ़र्ज़ था।” लेकिन उसके दिल में आज भी वही पुराना प्यार चुपचाप ज़िंदा था।
पुरानी तस्वीर और टूटता हुआ घमंड

महेंद्र को कमरे में शिफ्ट कर दिया गया।
डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी।
साहिल रोज़ खुद आकर उनका हाल पूछता था।
वह कभी दवाइयाँ देखता, कभी रिपोर्ट समझाता और कभी महेंद्र का हौसला बढ़ाता।
महेंद्र अब साहिल को केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि अपने बेटे की तरह देखने लगे थे।
एक शाम साहिल मीरा को अस्पताल के शांत बगीचे में ले गया।
चारों तरफ़ हरियाली थी। ठंडी हवा चल रही थी और डूबता सूरज पूरे बगीचे को सुनहरा बना रहा था।
दोनों कई मिनट तक बिना कुछ बोले बेंच पर बैठे रहे।
आख़िर मीरा ने चुप्पी तोड़ी। उसने धीमी आवाज़ में पूछा, “साहिल… तुम सच में इतने बड़े डॉक्टर कैसे बन गए?”
साहिल हल्का मुस्कुराया।
“जिस दिन कॉलेज में तुमने मेरा नंबर देने से मना किया था, उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि अब पूरी ज़िंदगी अपने सपने को दूँगा।”
“दिन-रात पढ़ाई की… मेहनत की… और भगवान ने मेरा साथ दे दिया।”
मीरा सिर झुकाकर उसकी बातें सुनती रही।
कुछ पल बाद उसकी नज़र साहिल के पास रखे पर्स पर गई।
हवा चलने से पर्स खुल गया। उसमें रखी एक पुरानी तस्वीर बाहर झाँकने लगी।
मीरा ने अनजाने में तस्वीर उठाई। तस्वीर देखते ही उसके हाथ काँपने लगे।
वह उसकी कॉलेज के दिनों की तस्वीर थी। मीरा की आँखों से आँसू लगातार गिरने लगे।
वह रोते हुए बोली, “तुमने… मेरी तस्वीर आज तक संभालकर रखी है?”
साहिल मुस्कुराया। “कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं… लेकिन दिल से कभी नहीं जाते।”
मीरा अब अपने आँसू नहीं रोक सकी।
वह फूट-फूटकर रोने लगी।
“साहिल… मुझे माफ़ कर दो… मैंने तुम्हें हमेशा गरीब समझा… तुम्हारा इस्तेमाल किया… तुम्हारा दिल दुखाया… फिर भी तुमने मेरे पापा की जान बचा ली।”
साहिल ने धीरे से कहा, “अगर उस समय तुम ऐसी नहीं होती, तो शायद आज हम दोनों इतने मज़बूत इंसान भी नहीं बनते।”
मीरा ने रोते हुए कहा, “आज समझ आया कि अमीर वह नहीं होता जिसके पास पैसा हो… अमीर वह होता है जिसके दिल में इंसानियत हो।”
यह सुनकर साहिल की आँखें भी नम हो गईं।
उसी समय कमरे के दरवाज़े से महेंद्र कपूर दोनों को देख रहे थे।
उन्होंने पहली बार अपनी बेटी की आँखों में सच्चा पछतावा और साहिल के लिए सम्मान देखा।
उनके मन में उसी पल एक फैसला जन्म ले चुका था।
जब टूटा हुआ रिश्ता फिर से जुड़ने लगा

अगली सुबह महेंद्र कपूर पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहे थे। उनके चेहरे पर कई दिनों बाद सुकून दिखाई दे रहा था।
उन्होंने साहिल को अपने पास बुलाया और उसका हाथ पकड़कर कुछ देर तक बिना बोले उसे देखते रहे।
फिर धीमी आवाज़ में बोले, “बेटा, मैंने ज़िंदगी में बहुत गलत फैसले लिए। सबसे बड़ी गलती घमंड और लालच को अपना दोस्त बनाना थी।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “अंकल, बीती हुई बातें याद करके खुद को तकलीफ़ मत दीजिए।”
यह कहानी भी पढ़ें ⇒ शादी के बाद भी पत्नी का बॉयफ्रेंड 📖
महेंद्र ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “अगर उस समय मैंने अपनी बेटी को अच्छे संस्कार दिए होते, तो शायद उसकी ज़िंदगी भी इतनी मुश्किल नहीं होती।”
मीरा की आँखें भर आईं। उसने अपने पिता का हाथ प्यार से थाम लिया।
महेंद्र बोले, “बेटा, अब मैं अपनी हर गलती सुधारना चाहता हूँ। क्या तुम मेरा साथ दोगे?”
साहिल ने बिना देर किए कहा, “अंकल, मैं हमेशा आपके साथ हूँ।”
कुछ दिनों बाद महेंद्र पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट आए।
साहिल रोज़ शाम उनके घर जाता। कभी दवाइयों के बारे में समझाता, कभी उनके साथ बैठकर बातें करता।
धीरे-धीरे महेंद्र के चेहरे की मुस्कान वापस लौटने लगी।
साहिल ने की मीरा के पिता की पैसों से मदद

एक दिन साहिल ने बैंक के अपने एक परिचित अधिकारी से बात करके महेंद्र के लिए कारोबार शुरू करने का लोन मंजूर करवा दिया।
महेंद्र को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कोई उनके लिए इतना कर सकता है।
साहिल यहीं नहीं रुका। उसने अपनी कई वर्षों की जमा पूँजी में से सात लाख रुपये भी महेंद्र के हाथों में रख दिए।
महेंद्र की आँखों से आँसू निकल पड़े। वह बोले, “बेटा, आजकल अपने भी इतना साथ नहीं देते, जितना तुमने हमारा दिया है।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “अंकल, परिवार कभी एहसान नहीं गिनता।” कुछ ही सप्ताह में महेंद्र का पुराना कारोबार फिर से शुरू हो गया।
इस बार वह पहले से कहीं ज़्यादा ईमानदारी और समझदारी से काम करने लगे।
मीरा भी सुबह से शाम तक अपने पिता के साथ कारोबार संभालती थी।
एक शाम महेंद्र ने साहिल और मीरा दोनों को अपने ऑफिस बुलाया।
उन्होंने दोनों को सामने बैठाया और गंभीर आवाज़ में कहा, “आज मुझे तुम दोनों से एक ज़रूरी बात करनी है।”
दोनों चुपचाप उनकी तरफ़ देखने लगे।
महेंद्र मुस्कुराए और बोले, “यह कारोबार दोबारा तुम्हारी वजह से शुरू हुआ है, साहिल।”
साहिल तुरंत बोला, “अंकल, यह सब आपकी मेहनत है।”
महेंद्र ने सिर हिलाया। “नहीं बेटा, आधी मेहनत तुम्हारी है। इसलिए आज से इस कारोबार की आधी हिस्सेदारी तुम्हारी होगी।”
साहिल ने तुरंत मना कर दिया। “अंकल, मैं डॉक्टर हूँ। मुझे कुछ नहीं चाहिए।”
महेंद्र हल्का मुस्कुराए।
“अगर तुम मना करोगे, तो मैं यह कारोबार आगे नहीं बढ़ाऊँगा।”
मीरा भी मुस्कुराते हुए बोली, “साहिल, इस बार पापा की बात मान लो।”
साहिल ने दोनों की तरफ़ देखा और आखिरकार हँसते हुए हामी भर दी।
महेंद्र बहुत खुश हो गए।
फिर उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “अब मेरी एक और बात माननी पड़ेगी।”
दोनों ने एक साथ पूछा, “क्या?”
महेंद्र बोले, “तुम दोनों कई सालों बाद मिले हो। ज़िंदगी ने तुम दोनों से बहुत कुछ छीन लिया।”
“दो-चार दिन कहीं घूम आओ। खुलकर बातें करो। पुरानी यादों को बोझ मत बनने दो।”
मीरा ने शर्माते हुए अपने पिता की तरफ़ देखा।
साहिल भी हल्का मुस्कुरा दिया।
कुछ दिनों बाद दोनों पहाड़ों की एक शांत और खूबसूरत जगह घूमने निकल गए।
सच्चा प्यार आखिर अपने मुकाम तक पहुँच ही गया

सुबह की ठंडी हवा, ऊँचे पहाड़ और बादलों से ढकी वादियाँ दोनों के चेहरे पर मुस्कान ले आईं।
दोनों धीरे-धीरे एक पगडंडी पर साथ चल रहे थे।
कई बार दोनों एक-दूसरे को देखते, फिर मुस्कुराकर नज़रें झुका लेते।
मीरा धीरे से बोली, “याद है… कॉलेज की पिकनिक में भी हम पहाड़ों पर आए थे।”
साहिल मुस्कुराया।
“हाँ… वही दिन था, जब पहली बार मुझे समझ आया कि प्यार केवल पाने का नाम नहीं होता।”
दोनों कुछ देर तक चुपचाप चलते रहे।
एक जगह रंग-बिरंगे फूलों से भरा छोटा-सा बगीचा था।
दोनों वहीं बैठ गए।
मीरा ने धीरे से कहा, “साहिल… अगर समय पीछे लौट जाए, तो मैं अपनी हर गलती बदल दूँ।”
साहिल ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “अगर समय लौट भी जाए, तो शायद मैं फिर भी तुम्हीं से प्यार करूँगा।”
यह सुनकर मीरा की आँखें भर आईं। उसने काँपते हुए साहिल का हाथ अपने हाथों में ले लिया।
धीरे से बोली, “क्या तुम्हारे दिल में आज भी मेरे लिए वही जगह है?”
साहिल मुस्कुराया।
“कुछ रिश्ते समय से नहीं बदलते। मेरा दिल आज भी वहीं है, जहाँ कॉलेज के पहले दिन था।”
मीरा अब अपने आँसू नहीं रोक सकी। वह साहिल के कंधे पर सिर रखकर रोने लगी।
“मैंने तुम्हें बहुत रुलाया है… क्या तुम मुझे सच में माफ़ कर चुके हो?”
साहिल ने प्यार से कहा, “जिससे सच्चा प्यार हो, उससे शिकायतें ज़्यादा देर तक नहीं रहतीं।”
कुछ देर तक दोनों बिना कुछ बोले बैठे रहे।
हवा उनके बीच की सारी दूरियाँ अपने साथ उड़ाकर ले जा चुकी थी।
शाम को दोनों घर लौट आए।
महेंद्र दरवाज़े पर ही उनका इंतज़ार कर रहे थे।
उन्होंने मुस्कुराकर मीरा का हाथ पकड़ा और धीरे से साहिल के हाथ में रख दिया।
उनकी आँखों में आँसू थे।
वह बोले, “बेटा, अगर तुम्हें मंजूर हो, तो मैं अपनी बेटी का हाथ तुम्हारे हाथों में देना चाहता हूँ।”
साहिल ने एक पल के लिए मीरा की तरफ़ देखा।
मीरा ने मुस्कुराते हुए सिर झुका दिया।
साहिल अपनी जेब से एक छोटा-सा डिब्बा निकाल लाया।
उसमें एक सुंदर-सी अंगूठी थी। वह घुटनों के बल बैठ गया।
मुस्कुराकर बोला, “मीरा… कॉलेज के पहले दिन से लेकर आज तक मेरा दिल सिर्फ़ तुम्हारा नाम जानता है।”
“क्या तुम इस बार मेरा हाथ हमेशा के लिए थामोगी?” मीरा रोते-रोते मुस्कुरा उठी। उसने बिना कुछ कहे अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।
साहिल ने उसके हाथ में अंगूठी पहना दी।
मीरा ने भी साहिल को गले लगा लिया। वह धीमी आवाज़ में बोली, “अब कभी मुझे छोड़कर मत जाना।”
साहिल मुस्कुराया। “अब तो मौत भी आएगी, तो तुम्हारा हाथ पकड़कर ही आएगी।”
महेंद्र की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।
कुछ ही दिनों बाद दोनों की सादगी से शादी हो गई।
शादी में दिखावा कम था, लेकिन प्यार और अपनापन बहुत ज़्यादा था।
कुछ साल बाद साहिल शहर का सबसे सम्मानित डॉक्टर बन गया।
मीरा अपने पिता के साथ कारोबार संभालने के साथ-साथ गरीब बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करने लगी।
महेंद्र ने शराब, जुआ और लालच से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ दिया।
एक शाम मीरा ने मुस्कुराकर साहिल से पूछा, “अगर उस दिन मैंने तुम्हें नंबर दे दिया होता, तो क्या होता?”
साहिल हँस पड़ा।
“शायद हमारी कहानी छोटी हो जाती… लेकिन भगवान को हमारी प्रेम कहानी यादगार बनानी थी।”
दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मुस्कुराने लगे।
प्यार की सीख
“प्यार में कभी घमंड नहीं करना चाहिए। अगर प्यार करने वाला गरीब है, तो भी उसके प्यार का सम्मान करना चाहिए।”
कभी-कभी सच्चा प्यार देर से मिलता है, लेकिन जब मिलता है, तो पूरी ज़िंदगी की हर कमी पूरी कर देता है।
____कहानी समाप्त____




