महाभारत का सबसे खतरनाक योद्धा कौन था? The Mystery Of The Mahabharata‵s Greatest Warrior।

महाभारत का सबसे खतरनाक योद्धा कौन था? The Mystery Of The Mahabharata‵s Greatest Warrior। Hindirama.com
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क्या आप जानते हैं? महाभारत का सबसे खतरनाक योद्धा कौन था? कोई गदा चलाने में अद्वितीय था कोई धनुष चलाने मे सबसे श्रेष्ठ था और कोई दिव्य अस्त्रों का स्वामी था।

लेकिन जब सबसे खतरनाक योद्धा की बात होती है, तो सबसे पहले कर्ण का नाम लिया जाता है।

कर्ण ऐसा योद्धा था, जिसकी वीरता से पूरी युद्ध भूमि कांप उठता था उनकी आँखों मे आत्मविश्वास , चेहरे पर तेज और हाथों में ऐसी शक्ति थी की बड़े- बड़े महारथी भी उससे डरते थे।

करण के जीवन में जन्म ही रहस्य था। The Mystery Of The Mahabharata‵s Greatest Warrior

कर्ण का जन्म माता कुंती से हुआ था , लेकिन परिस्थितियो के कारण उन्हे जन्म के तुरंत बाद नदी में  बहा दिया गया। 

नदी में से उन्हे अधिरथ नें निकाला। अधिरथ हस्तिनापुर का एक सारथी था , उसी नें करण का पालन-पोषण किया।

बचपन से ही कर्ण के मन में सबसे बड़ा योद्धा बनने का सपना था।

लेकिन समाज उसे सुतपुत्र कहकर अपमानित करता था। लोग उसकी प्रतिभा को नही बल्कि उसके जन्म को देखते थे।

यही कारण था कि कर्ण के भीतर एक ऐसी आग पैदा हुई जिसने उसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली योद्धा बना दिया।

कर्ण ने कभी हार नही मानी। वह दिन-रात अभ्यास करता था और धनर्विद्या में सबसे आगे निकलना चाहता था।

उसकी मेहनत इतनी अधिक थी कि धीरे-धीरे उसकी वीरता की बाते पूरे आर्यवर्त में होने लगी।

लोग समझने लगे कि यह साधारण योद्धा नही है। उसके अंदर ऐसी शक्ति थी जो उसे बाकी योद्धाओ से अलग बनाती थी।

कर्ण ने भगवान परशुराम से अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की।

उसने बहुत कम समय में दिव्य अस्त्रों का ज्ञान हासिल कर लिया।

उसकी प्रतिभा देखकर स्वयं परशुराम भी चकित रह गए थे। कर्ण का लक्ष्य केवल एक था, कि दुनिया को साबित करना की सच्ची महानता जन्म से नहीं बल्कि उसके कर्म से होती है।

वह योद्धा जिससे देवता भी डरते थे

कर्ण की सबसे बड़ी ताकत उसका कवच और कुंडल थे हो उसे जन्म से प्राप्त थे । कहा जाता है कि जब तक ये उसके शरीर पर थे, तब तक उसको युद्ध मे हराना संभव नही था।

उसकी शक्ति इतनी भयानक थी की देवता भी चिंतित रहने लगे।

स्वयं इन्द्रदेव जानते थे की यदि कर्ण पूरी शक्ति के साथ युद्ध करेगा, तो अर्जुन को बचाना बहुत कठिन हो जाएगा।

इन्द्रदेव ब्राह्मण का रूप धारण करके कर्ण के पास पहुंचे और उससे कवच-कुंडल दान में माँग लिए।

कर्ण जानता था कि वह साधारण ब्राह्मण नही था फिर भी उसने बिना सोचे समझे अपने कवच और कुंडल दोनों काट कर दे दिये। यही कारण है कि उसे दानवीर कर्ण कहा जाता है।

उसकी महानता केवल युद्ध तक नही बल्क उनका दिल भी बहुत विशाल था।

कर्ण जब युद्धभूमि में उतरता था तो उसके रथ की गर्जना सुनकर सैनिक डर जाते थे। उसके बाण बिजली की तरह चलते थे।

और दुश्मन संभल भी नही पाते थे, कहा जाता है कि उसका चेहरा सूर्य की रोशनी में ऐसा चमकता था जैसे कोई देवता युद्ध भूमि में उतर गए हो।

अर्जुन और करण के बीच सबसे भयानक युद्ध

महाभारत का सबसे रोमांचक और खतरनाक युद्ध अर्जुन और कर्ण के बीच हुआ था। दोनों महान धनुर्धर थे और दोनों के पास दिव्य अस्त्र थे।

जब दोनों आमने-सामने आए तो युद्ध का मैदान कांप उठा आसमान में सभी देवता युद्ध देखने के लिए एकत्र हो गए सबको पता था

कि इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध होने वाला है।

कर्ण ने युद्ध में अपनी पूरी शक्ति लगा दी उसके बाण इतनी तेजी से चल रहे थे कि अर्जुन को भी परेशानी होने लगी।

भगवान कृष्ण सोचने लगे थे कि कर्ण को हल्के में लेना बहुत बड़ी भूल है।


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कर्ण के पास वासवी शक्ति नाम का दिव्य अस्त्र था, जो किसी भी योद्धा का अंत कर सकती थी। उसकी शक्ति देखकर पांडव सेना भयभीत हो उठी थी। लेकिन तभी पशुराम का श्राप सच साबित हुआ।

युद्ध के समय कर्ण के रथ का पहिया धरती में फंस गया और वह कुछ समय के लिए असहाय हो गया।

उसी समय वह अपने दिव्य अस्त्रों के मंत्र भूल गया । भगवान कृष्ण जानते थे, कि यदि कर्ण बच गया, तो पांडवों की विजय असंभव हो सकती है।

इसलिए उन्होंने अर्जुन को तुरंत बाण चलाने के लिए कहा। अर्जुन के बाण से कर्ण युद्धभूमि में गिर गया और महाभारत का सबसे भयानक योद्धा हमेशा के लिए शांत हो गया।

कर्ण क्यों आज भी सबसे महान योद्धा माना जाता है।

कर्ण केवल एक योद्धा नही बल्कि साहस, दान और आत्मविश्वास की सबसे बड़ी मिसाल था। उसने जीवन भर अपमान सहा लेकिन कभी अपने सपनों को नही त्यागा।

उसने यह साबित किया की महान बनने के लिए किसी राजघराने में जन्म लेना जरूरी नही।

उसकी मेहनत और आत्मविश्वास ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति थे।

भगवान कृष्ण भी कर्ण की वीरता का सम्मान करते थे उन्होंने कहा था, कि कर्ण जैसा दानी और पराक्रमी योद्धा बहुत दुर्लभ होता है।

यदि वह अधर्म के पक्ष में ना खड़ा होता, तो शायद महा भारत का परिणाम कुछ और होता।

उसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसकी मित्रता थी, क्योंकि उसने अंत तक दुर्योधन का साथ नही छोड़ा।

आज भी जब महाभारत की बाते होती है, तो कर्ण का नाम सबसे अलग दिखाई देता है। वह एक ऐसा योद्धा था जिसे दुश्मन भी सम्मान देते थे।

उसकी कहानी हमे सिखाती है, कि कठिन परिस्थितियाँ इंसान को कमजोर नही बल्कि महान भी बनाती है।

यही कारण है कि कर्ण को महाभारत का सबसे यादगार और खतरनाक योद्धा माना जाता है जो बहुत ही शक्तिशाली थे । Mahabharata Story In Hindi


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