कॉलेज से शुरू हुई मीरा और साहिल की प्रेम कहानी, और घमंड में डूबी मीरा ने साहिल को क्यों ठुकराया? कैसे बदलते समय ने मीरा को रिश्तों की असली कीमत समझाई।
एक गरीब लड़के का संघर्ष, सपनों की उड़ान और सच्चे प्यार का इंतजार इस कहानी को खास बनाता है।
पाँच साल बाद जब दोनों फिर मिले, तो पुरानी यादों ने दिल को भावनाओं से भर दिया।
साहिल ने बदला नहीं लिया, बल्कि मीरा के पिता की जान बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की।
तो आपको इस “Sad Love Story In Hindi” की कहानी में सच्चा प्यार, घमंड, पछतावा, विश्वास, और झगड़ा यह सब पढ़ने को मिलेगा।
जब घमंड ने सच्चे दिल को पहचानने से इंकार कर दिया। Sad Love Story In Hindi
सुबह की हल्की धूप पूरे शहर पर फैल रही थी। सड़कें लोगों की आवाजाही से भर चुकी थीं और हर तरफ़ नई शुरुआत की खुशबू महसूस हो रही थी।
शहर के सबसे बड़े सरस्वती मेडिकल कॉलेज में आज नए सत्र का पहला दिन था। कैंपस छात्रों की हँसी और उत्साह से गूंज रहा था।
कोई नए दोस्तों से मिल रहा था, कोई अपने विभाग की तलाश कर रहा था और कोई कॉलेज की सुंदर इमारतों की तस्वीरें ले रहा था।
इसी भीड़ के बीच एक सफेद कार कॉलेज के मुख्य गेट पर आकर रुकी। जैसे ही कार का दरवाज़ा खुला, कई नज़रें उसी तरफ़ घूम गईं।
कार से उतरी एक बेहद खूबसूरत लड़की। लंबे काले बाल, हल्की मुस्कान, महंगे कपड़े और चेहरे पर अलग ही आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था।
उसका नाम मीरा कपूर था। पूरा कॉलेज उसके आने की चर्चा पहले ही सुन चुका था। कई छात्र उसे देखने के लिए वहीं रुक गए।
मीरा जितनी सुंदर थी, उससे कहीं ज़्यादा उसे अपने अमीर होने का घमंड था। उसे लगता था कि दुनिया में पैसों से बढ़कर कुछ नहीं।
उसके पिता महेंद्र कपूर शहर के बड़े कारोबारी थे। उनके पास दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन अच्छी सीख देने का समय कभी नहीं था।
महेंद्र अक्सर मीरा से कहते, “बेटा, हमेशा अमीर लोगों के साथ रहना। गरीब लोग केवल मदद माँगना जानते हैं।”
बचपन से यही बातें सुनते-सुनते मीरा के मन में भी अमीरी और गरीबी की दीवार खड़ी हो चुकी थी।
उसी कॉलेज में एक और छात्र पढ़ता था। उसका नाम साहिल वर्मा था। उसके कपड़े साधारण थे, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे।
साहिल के पिता एक छोटी-सी नौकरी करते थे और माँ घरों में सिलाई करके परिवार की मदद करती थीं।
घर की हालत अच्छी नहीं थी। कई बार फीस भरने के लिए पूरे परिवार को महीनों तक खर्च कम करना पड़ता था।
लेकिन साहिल ने कभी अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मेहनत थी।
वह पढ़ाई में पूरे कॉलेज का सबसे होशियार छात्र माना जाता था। हर शिक्षक उसकी तारीफ़ करते नहीं थकता था।
साहिल का चेहरा भी बहुत आकर्षक था। लंबा कद, शांत स्वभाव और हमेशा मुस्कुराता चेहरा उसे सबसे अलग बनाता था।
कॉलेज की कई लड़कियाँ उससे दोस्ती करना चाहती थीं, लेकिन साहिल की नज़र हमेशा सिर्फ़ एक चेहरे को ढूँढती थी।
वह चेहरा था मीरा का।
पहले दिन से ही साहिल को मीरा अच्छी लगने लगी थी। उसे मीरा की सुंदरता से ज़्यादा उसकी मुस्कान पसंद थी।
उसे नहीं पता था कि जिस लड़की को वह दिल से चाहता है, वही लड़की उसे सबसे कम समझेगी।
जिस दोस्ती में केवल एक दिल सच्चा था

कुछ ही दिनों में पूरी कक्षा एक-दूसरे को पहचानने लगी। धीरे-धीरे सभी छात्रों के अपने-अपने दोस्त बन गए।
मीरा हमेशा अमीर घरों से आए छात्रों के साथ बैठती थी। उसकी टोली में हमेशा हँसी और दिखावा ज़्यादा होता था।
साहिल हमेशा पहली बेंच पर बैठता। उसकी कॉपी, किताबें और नोट्स पूरे कॉलेज में सबसे अच्छे माने जाते थे।
एक दिन परीक्षा की घोषणा हुई। पूरी कक्षा में हलचल मच गई। कई छात्रों को पढ़ाई की चिंता होने लगी।
मीरा भी परेशान दिखाई दे रही थी। उसने पूरे महीने ठीक से पढ़ाई ही नहीं की थी।
उसकी सहेली रिया ने मुस्कुराकर कहा, “चिंता क्यों करती हो? साहिल है ना, उससे नोट्स ले लेना।”
मीरा बिना कुछ सोचे साहिल की सीट के पास पहुँची। उसने पहली बार उससे ढंग से बात की।
“साहिल, तुम्हारे नोट्स सबसे अच्छे होते हैं। मेरे लिए भी बना दोगे?”
साहिल ने बिना एक पल सोचे मुस्कुराकर कहा, “ज़रूर, कल सुबह मिल जाएँगे।”
उस रात साहिल देर तक पढ़ता रहा। फिर उसने अपनी पढ़ाई छोड़कर मीरा के लिए अलग से सुंदर नोट्स लिखने शुरू किए।
वह हर पन्ना साफ़ लिखता, ज़रूरी बातों को अलग रंग से दिखाता और कठिन सवालों के आसान उत्तर भी जोड़ देता।
रात के दो बज चुके थे। उसकी माँ कमरे में आईं और बोलीं, “बेटा, अब सो भी जाओ।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “बस पाँच मिनट और माँ। किसी की पढ़ाई आसान हो जाएगी।”
माँ ने नोट्स देखे और पूछा, “ये किसके लिए बना रहे हो?”
साहिल हल्का मुस्कुराया और बोला, “एक दोस्त के लिए।”
अगली सुबह मीरा कॉलेज पहुँची। साहिल ने मुस्कुराते हुए नोट्स उसकी तरफ़ बढ़ा दिए।
मीरा ने नोट्स देखे और हैरान रह गई। हर पन्ना इतना सुंदर था कि जैसे किसी किताब से निकाला गया हो।
उसने बस इतना कहा, “अच्छे हैं।”
इतना बोलकर वह अपनी सहेलियों के पास चली गई। उसने धन्यवाद तक नहीं कहा।
साहिल उसे जाते हुए देखता रहा। उसके चेहरे पर फिर भी मुस्कान थी।
साहिल का दोस्त अमन पास आकर बोला, “यार, वह तुम्हारा इस्तेमाल करती है।”
साहिल हँसते हुए बोला, “अगर मेरी मेहनत से उसकी पढ़ाई आसान हो जाती है, तो मुझे खुशी मिलती है।”
अमन ने सिर हिलाया और कहा, “तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है। लेकिन हर कोई उसकी कीमत नहीं समझेगा।”
दिन बीतते गए। हर परीक्षा से पहले मीरा साहिल के पास आ जाती।
“साहिल… नोट्स तैयार हैं?”
और हर बार साहिल मुस्कुराकर कहता, “हाँ, तुम्हारे लिए हमेशा तैयार हैं।”
कई बार साहिल अपनी ज़रूरी पढ़ाई छोड़ देता, लेकिन मीरा के नोट्स कभी अधूरे नहीं रहने देता।
एक बार उसे तेज़ बुखार था। फिर भी वह पूरी रात जागकर मीरा के लिए नोट्स तैयार करता रहा।
अगले दिन उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन नोट्स पूरे थे।
मीरा ने नोट्स लिए और बोली, “अच्छा हुआ समय पर दे दिए।” साहिल बस मुस्कुराया। उसने अपनी तबीयत का ज़िक्र तक नहीं किया।
उधर मीरा अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में हँस रही थी। उसे यह भी नहीं पता था कि कोई उसके लिए रातभर जागा था।
धीरे-धीरे साहिल का प्यार और गहरा होता गया।
वह कभी मीरा से अपने दिल की बात नहीं कहता था। उसे डर था कि कहीं दोस्ती भी न टूट जाए।
उसे बस इतना अच्छा लगता था कि दिन में एक बार मीरा उससे बात कर ले।
उधर मीरा के लिए साहिल सिर्फ़ एक अच्छा छात्र था, जिससे ज़रूरत पड़ने पर मदद ली जा सकती थी।
उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसकी एक मुस्कान के लिए अपनी पूरी रातें जागकर गुज़ार देता है।
इसी बीच कॉलेज में एक बड़ी घोषणा हुई।
अगले महीने पूरे विभाग की तीन दिन की पहाड़ी पिकनिक रखी गई थी।
पूरी कक्षा खुशी से झूम उठी। हर कोई उस सफ़र की बातें करने लगा।
मीरा अपनी सहेलियों के साथ घूमने की योजना बनाने लगी।
दूसरी तरफ़ साहिल पहली बार मन ही मन मुस्कुराया।
उसे लगा, शायद इस सफ़र में उसे मीरा के साथ कुछ अच्छे पल बिताने का मौका मिल जाए।
उसे बिल्कुल नहीं पता था कि यही पिकनिक उसकी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत याद भी बनेगी और सबसे बड़ा दर्द भी।
पिकनिक की सुबह और एक अनकही खुशी

पिकनिक का दिन आखिर आ ही गया। सुबह से ही पूरे कॉलेज में अलग तरह का उत्साह दिखाई दे रहा था।
कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर तीन बड़ी बसें खड़ी थीं। हर छात्र के चेहरे पर मुस्कान और आँखों में घूमने की खुशी साफ़ दिखाई दे रही थी।
कोई अपने बैग की ज़िप बंद कर रहा था, कोई मोबाइल से तस्वीरें ले रहा था और कोई दोस्तों को आवाज़ देकर बुला रहा था।
अध्यापक बार-बार छात्रों के नाम पुकार रहे थे। सभी को समय पर बस में बैठने की सलाह दी जा रही थी।
साहिल सबसे पहले कॉलेज पहुँच गया था। उसके कंधे पर पुराना बैग था और हाथ में पानी की छोटी बोतल थी।
वह बार-बार कॉलेज के गेट की तरफ़ देख रहा था। शायद उसे किसी खास का इंतज़ार था।
कुछ ही मिनट बाद एक चमचमाती कार कॉलेज के सामने आकर रुकी। कार का दरवाज़ा खुला और मीरा बाहर उतरी।
आज उसने हल्के गुलाबी रंग की ड्रेस पहन रखी थी। खुले बाल हवा के साथ लहरा रहे थे।
पूरा कॉलेज कुछ पल के लिए उसे देखता ही रह गया। कई लड़के उसकी तस्वीरें लेने लगे।
साहिल भी उसे देख रहा था, लेकिन उसकी नज़रों में लालच नहीं, केवल सच्चा अपनापन था।
मीरा अपनी सहेलियों रिया, पूजा और कृतिका के साथ हँसते हुए बस की तरफ़ बढ़ गई।
उसी समय करण, युवराज और विवेक भी वहाँ पहुँचे। तीनों की नज़रें लगातार मीरा पर ही टिकी हुई थीं।
साहिल ने उन तीनों को देखा तो उसके मन में हल्की-सी बेचैनी होने लगी।
उसे उनकी आदतों के बारे में पहले से पता था। इसलिए वह मन ही मन सतर्क हो गया।
कुछ देर बाद सभी छात्र अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए। बस धीरे-धीरे कॉलेज से निकल पड़ी।
बस का सफ़र और साहिल की खामोश मोहब्बत
बस के अंदर हँसी और शोर का अलग ही माहौल था। कोई गाना गा रहा था, कोई मज़ाक कर रहा था।
अध्यापक ने मुस्कुराकर कहा, “आज पढ़ाई की नहीं, केवल खुश रहने की इजाज़त है।”
बस में बैठे सभी छात्र ज़ोर-ज़ोर से तालियाँ बजाने लगे। पूरा माहौल खुशियों से भर गया।
कुछ ही देर में अंताक्षरी शुरू हो गई। दोनों तरफ़ की टीम एक-दूसरे को हराने की कोशिश कर रही थी।
रिया ने ज़िद करके मीरा को गाना गाने के लिए खड़ा कर दिया।
पहले तो मीरा मुस्कुराकर मना करती रही, लेकिन फिर उसने धीरे-धीरे गाना शुरू किया।
उसकी मीठी आवाज़ सुनकर पूरी बस तालियों से गूँज उठी। अध्यापक भी मुस्कुराने लगे।
साहिल पूरे समय चुपचाप उसे देख रहा था। उसके चेहरे पर सच्ची खुशी दिखाई दे रही थी।
अमन ने धीरे से साहिल के कान में कहा, “यार, तू भी गा दे। तेरी आवाज़ भी अच्छी है।”
साहिल मुस्कुराकर बोला, “आज उसे खुश देखकर ही मेरा दिन बन गया है।”
अमन हँस पड़ा। वह जानता था कि साहिल की दुनिया बस मीरा तक ही सीमित थी।
रास्ते में बस एक सुंदर ढाबे पर रुकी। सभी छात्र नाश्ता करने के लिए नीचे उतर गए।
कोई चाय पी रहा था, कोई समोसे खा रहा था और कोई तस्वीरें खिंचवा रहा था।
मीरा अपने दोस्तों के साथ हँसते हुए बातें कर रही थी। उसे साहिल की तरफ़ देखने की भी फुर्सत नहीं थी।
साहिल ने दूर से देखा कि मीरा अपनी पानी की बोतल बस में ही भूल गई है।
वह बिना कुछ कहे बस में गया, बोतल उठाई और धीरे से मीरा के पास पहुँचा।
“शायद यह तुम्हारी है।” मीरा ने बोतल ली और बस इतना कहा, “ओह… ठीक है।”
वह फिर अपने दोस्तों की बातों में व्यस्त हो गई। साहिल मुस्कुराकर वापस चला गया।
अमन यह सब देख रहा था। उसने फिर पूछा, “तुझे बुरा नहीं लगता?”
साहिल ने धीरे से जवाब दिया, “जिससे सच्चा प्यार हो, उसकी छोटी-सी मुस्कान भी बहुत बड़ी खुशी होती है।”
करीब चार घंटे का सफ़र पूरा होने के बाद बसें पहाड़ों के बीच बने सुंदर पर्यटन स्थल पर पहुँच गईं।
चारों तरफ़ ऊँचे पहाड़, हरे पेड़ और ठंडी हवा हर किसी का मन मोह रही थी।
दूर बहती नदी की आवाज़ पूरे माहौल को और भी सुंदर बना रही थी।
सभी छात्र बस से उतरते ही खुशी से इधर-उधर दौड़ने लगे। हर कोई इस पल को अपने कैमरे में कैद करना चाहता था।
पिकनिक की मस्ती, तस्वीरें और आने वाला तूफ़ान
अध्यापकों ने सभी छात्रों को एक साथ बुलाया और कहा, “कोई भी अकेले कहीं नहीं जाएगा।”
सबने एक साथ “जी सर” कहा और घूमने निकल पड़े।
पहले सभी ने मिलकर ग्रुप फोटो खिंचवाई। फिर दोस्तों ने अलग-अलग तस्वीरें लेना शुरू कर दिया।
रिया ने मीरा का हाथ पकड़कर कहा, “चल, नदी के पास तस्वीर लेते हैं।”
मीरा मुस्कुराते हुए वहाँ चली गई। उसकी तस्वीरें देखकर सभी उसकी तारीफ़ करने लगे।
साहिल दूर खड़ा बस उसे खुश होते हुए देख रहा था।
कुछ देर बाद कॉलेज की तरफ़ से कई मज़ेदार खेल शुरू हुए।
रस्साकशी, दौड़ और छोटे-छोटे खेलों में सभी छात्र हिस्सा लेने लगे।
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साहिल ने कई प्रतियोगिताएँ जीत लीं। अध्यापक उसकी मेहनत की तारीफ़ कर रहे थे।
मीरा भी यह सब देख रही थी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
दोपहर में सभी ने साथ बैठकर खाना खाया। हँसी-मज़ाक का माहौल पहले से भी अच्छा हो गया।
खाना खत्म होने के बाद अध्यापक कुछ देर आराम करने चले गए।
उधर करण, युवराज और विवेक चुपके से जंगल की तरफ़ निकल गए।
कुछ देर बाद तीनों वापस लौटे। उनके हाथों में ठंडे पेय की बोतलें थीं, लेकिन उनमें शराब मिली हुई थी।
धीरे-धीरे तीनों की बातें बदलने लगीं। उनकी नज़र बार-बार मीरा पर जाकर रुक रही थी।
साहिल ने यह सब दूर से देख लिया। उसके मन की बेचैनी अब और बढ़ने लगी।
उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। वह बिना किसी को बताए चुपचाप मीरा के आसपास ही रहने लगा।
उधर मीरा और उसकी सहेलियाँ नदी के दूसरी तरफ़ बने फूलों के बगीचे की ओर बढ़ रही थीं।
उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि कुछ ही देर बाद उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना पल आने वाला है।
पिकनिक पर लड़कों ने मीरा को छेड़ा

नदी के किनारे बना फूलों का बगीचा बहुत सुंदर था। चारों तरफ़ रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा मन को छू रही थी।
मीरा, रिया, पूजा और कृतिका हँसते हुए तस्वीरें खिंचवा रही थीं। हर कोई उस पल को यादगार बनाना चाहता था।
थोड़ी देर बाद रिया ने कहा, “मैं पानी की बोतल लेकर आती हूँ, तुम लोग यहीं रुकना।”
पूजा और कृतिका भी पास की दुकान की तरफ़ चली गईं। कुछ ही पलों में मीरा वहाँ अकेली रह गई।
मीरा अपने मोबाइल से फूलों की तस्वीरें लेने लगी। उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसे दूर से देख रहा है।
दूसरी तरफ़ करण, युवराज और विवेक शराब के नशे में उसी तरफ़ बढ़ रहे थे। उनके चेहरे पर बुरी नीयत साफ़ दिखाई दे रही थी।
साहिल दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसके मन की बेचैनी अब डर में बदल चुकी थी।
वह तेज़ कदमों से उसी दिशा में चल पड़ा, लेकिन तब तक तीनों लड़के मीरा के पास पहुँच चुके थे।
करण मुस्कुराकर बोला, “इतनी जल्दी क्या है? थोड़ी देर हमारे साथ भी बातें कर लो।”
मीरा ने बिना उसकी तरफ़ देखे कहा, “रास्ता छोड़ो, मुझे जाना है।”
युवराज हँसते हुए बोला, “आज इतना घमंड मत दिखाओ। आज कोई तुम्हें बचाने नहीं आएगा।”
मीरा घबरा गई। उसने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन तीनों ने उसका रास्ता घेर लिया।
उसके हाथ काँपने लगे। उसने ज़ोर से कहा, “रास्ता छोड़ो… नहीं तो मैं चिल्लाऊँगी।”
विवेक हँसकर बोला, “चिल्ला लो, यहाँ तुम्हारी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं आएगा।”
मीरा की आँखों में डर साफ़ दिखाई देने लगा। उसने पूरी ताकत से चिल्लाया, “बचाओ… कोई है… बचाओ!”
उसकी आवाज़ पहाड़ों के बीच गूँज उठी।
कुछ ही दूरी पर खड़ा साहिल यह आवाज़ सुनते ही बिजली की तरह दौड़ पड़ा।
उसने बिना एक पल गँवाए करण का हाथ पकड़कर ज़ोर से पीछे धक्का दिया।
करण सीधे ज़मीन पर गिर पड़ा। उसके हाथ से बोतल दूर जाकर टूट गई।
युवराज गुस्से से चिल्लाया, “तू बीच में क्यों आया?”
साहिल ने मीरा को अपने पीछे करते हुए कहा, “जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई इसे हाथ भी नहीं लगा सकता।”
यह सुनते ही तीनों लड़के साहिल पर टूट पड़े।
साहिल ने बचाया मगर मीरा ने उसे ही मारा थप्पड़

करण ने साहिल के चेहरे पर ज़ोरदार मुक्का मारा। उसके होंठ से तुरंत खून निकल आया।
साहिल पीछे नहीं हटा। उसने फिर एक लड़के को धक्का देकर मीरा से दूर कर दिया।
मीरा डर के कारण काँप रही थी। उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
युवराज ने पीछे से लकड़ी उठाकर साहिल पर वार किया। साहिल का कंधा ज़ोर से चोटिल हो गया।
दर्द के बावजूद उसने मीरा की तरफ़ मुड़कर कहा, “डरो मत… मैं हूँ।”
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यह सुनकर मीरा कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप हो गई।
तीनों लड़के अब मिलकर साहिल को मारने लगे, लेकिन वह लगातार उनका सामना करता रहा।
उसी समय दूर से कुछ छात्रों की आवाज़ सुनाई दी। शायद सभी लोग उसी तरफ़ आ रहे थे।
करण घबरा गया। उसने जल्दी से अपनी चाल चल दी।
वह ज़ोर से चिल्लाया, “सर… जल्दी आइए… साहिल मीरा को परेशान कर रहा है।”
इतने में अध्यापक और कई छात्र वहाँ पहुँच गए।
सभी ने देखा कि साहिल के कपड़े फटे हुए थे, चेहरे पर खून था और मीरा डरी हुई खड़ी थी।
अध्यापक कुछ समझ पाते, उससे पहले करण फिर बोला, “हम लोग तो मीरा को बचाने आए थे।”
मीरा अभी भी डर के कारण कुछ समझ नहीं पा रही थी।
उसने केवल इतना देखा कि साहिल उसके बहुत पास खड़ा था और उसका हाथ पकड़े हुए था।
डर और घबराहट में उसने बिना कुछ सोचे साहिल के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ मार दिया।
पूरा बगीचा एकदम शांत हो गया।
साहिल ने धीरे से अपना हाथ पीछे कर लिया। उसकी आँखों में दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था।
वह थप्पड़ उसके चेहरे पर नहीं, सीधे उसके दिल पर लगा था।
अमन दौड़ता हुआ वहाँ पहुँचा और चिल्लाया, “मीरा… तुमने क्या कर दिया?”
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
करण ने मौका देखकर फिर साहिल को धक्का दिया। वह पत्थर से टकराकर नीचे गिर पड़ा।
उसके माथे से खून बहने लगा। फिर भी उसने किसी के खिलाफ़ एक शब्द नहीं बोला।
अध्यापक ने गुस्से में पूछा, “साहिल, सच क्या है?”
साहिल ने धीरे से जवाब दिया, “सर… किसी को सज़ा मत दीजिए… बस सबको वापस ले चलिए।”
अमन हैरान रह गया।
वह बोला, “यार, सच बता दे। तूने मीरा की जान बचाई है।”
साहिल ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा, “अगर आज सच बोलने से मीरा और परेशान होगी, तो यह सच मेरे पास ही रहने दो।”
यह सुनकर अमन की आँखें भी भर आईं।
मीरा दूर खड़ी सब सुन रही थी। उसके मन में पहली बार हल्की-सी उलझन पैदा हुई।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि साहिल किसी का नाम क्यों नहीं ले रहा। ऐसा उसके मन मे क्या हैं?
अगले भाग 2 में पढ़िए…
पाँच साल बीत चुके हैं।
अब पिकनिक के बाद क्या होगा? कुछ ही दिनों में सबका कॉलेज पूरा हो जाएगा लेकिन अमीर मीरा का घमंड तो देखो उसने आखिरी वक्त साहिल को अपना नंबर भी नहीं दिया।
साहिल ने भी उसका नंबर फिर किसी से नहीं लिया।
जिस गरीब साहिल को मीरा ने अपने घमंड में ठुकरा दिया था, वही आज शहर का सबसे मशहूर डॉक्टर बन चुका है।
उधर, अचानक मीरा के पिता की तबीयत बिगड़ जाती है। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है। घबराई हुई मीरा को वहाँ अपनी पुरानी सहेली मिलती है, जो एक ऐसा सच बताती है जिसे सुनकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।
जिस साहिल को उसने कभी अपना मोबाइल नंबर तक देना भी ज़रूरी नहीं समझा था… आज किस्मत उसी साहिल के अस्पताल के दरवाज़े पर उसे खड़ा कर चुकी है।
क्या साहिल मीरा को पहचान लेगा?
क्या मीरा अपने किए पर माफी माँग पाएगी?
क्या साहिल के दिल में आज भी वही प्यार होगा, या पाँच साल पहले मिला एक थप्पड़ और अपमान सब कुछ बदल चुका होगा?
क्या भगवान दोनों को दोबारा मिलाकर उनके प्यार की नई शुरुआत करवाएंगे, या इस बार किस्मत हमेशा के लिए उन्हें अलग कर देगी?




